<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075</id><updated>2012-02-16T17:58:15.520-08:00</updated><title type='text'>हसरत</title><subtitle type='html'>क्योंकि दिल में एक चाहत है...</subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/'/><link rel='hub' 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style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 400px; height: 295px;" src="http://4.bp.blogspot.com/-0n4zwfr6UGE/Tj5t0aOqSNI/AAAAAAAAAV8/8pcyaETjKzI/s400/LOKPAL.jpg.crop_display.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5638064530675878098" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://2.bp.blogspot.com/-zZofCvjS96s/Tj5tu8SKgJI/AAAAAAAAAV0/Y2f2O4Loqvw/s1600/law-lokpal.jpg"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 400px; height: 200px;" src="http://2.bp.blogspot.com/-zZofCvjS96s/Tj5tu8SKgJI/AAAAAAAAAV0/Y2f2O4Loqvw/s400/law-lokpal.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5638064436738162834" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/-Dm723zBlun4/Tj5tp2sg_kI/AAAAAAAAAVs/U4Q8UV6JM9A/s1600/Anna.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 300px; height: 291px;" src="http://4.bp.blogspot.com/-Dm723zBlun4/Tj5tp2sg_kI/AAAAAAAAAVs/U4Q8UV6JM9A/s400/Anna.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5638064349338730050" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;अन्ना हजारे को अब सारा देश पहचानता है। ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जो अन्ना को सालों से जानते हों। लेकिन पिछले तीन महीनों में अन्ना की ख्याति दावालन के आग की तरह फैली। और शायद यही वजह हो सकती है कि समाज का एक तबका उन्हे किसी ना किसी बहाने निशाने पर लेने की कोशिश कर रहा है। ये तबका कौन है इसे समझाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। साधारण भाषा में हम उन्हे नेता कहते हैं। ये प्राणी हर पांच साल बाद हमारे आस-पास लोकलुभावन वादों के लॉलीपॉप लेकर आते हैं। भोली-भाली जनता से वोट लेकर ऐसे ग़ायब होते हैं जैसे गधे के सर से सींग। इन बातों के दुहराना भी अब बेमानी सा लगता है। लेकिन अंदर की चोट की विवशता की शिकार हूं जो मैं बार-बार उन्हे कोसता हूं। देश में भ्रष्टाचार चरम पर है। हर दिन एक नया खुलासा हमें झकझोर कर कहता है कि क्या ये वहीं इंदिरा और राजीव गांधी की पार्टी है और क्या ये वही नेता हैं जो गांधी-नेहरू के आदर्शों पर चलने का दम भरते हैं। जितनी बार चिल्लाते रहे कि हम भर्ष्टाचार के खिलाफ हैं उतनी बार एक नए घोटाले सामने आए। और देश ने जब कार्रवाई की मांग की तो सारे एक दूसरे पर आरोपों के मिसाइल दागने में लगे रहे। मैं कांग्रेस विरोधी नहीं हूं और ना ही भारतीय जनता पार्टी का समर्थक। लेकिन आलोचना मेरा अधिकार है। और मैं वही लिख रहा हूं जो मैने महसूस किया है। 2-जी घोटाले में राजा तो तब नापा गया जब मीडिया ने मामले के सार पर्दे खोल डाले। सरकार ने दखा की सारे देश की नज़र इस मामले पर है और फजीहत से बचने के लिए उसने राजा को मंत्रिमडल से बाहर कर दिया। भला हो सुप्रीम कोर्ट का जिसकी वजह से देश के साथ धोखा करने वाला आज सलाखें गिन रहा है। लेकिन कांग्रेस को राजनीति करने में महारत हासिल है। देश भर में डंका बजाया कि राजा के खिलाफ कार्रवाई कांग्रेस की भर्ष्टाचार के खिलाफ लड़ाई की प्रतिबद्धता का एक उदाहरण है। लेकिन देश की जनता बेवकूफ नहीं है। काले धन के मुद्दे को लेकर बाबा रामदेव ने दिल्ली की ओर कूच किया तो मंत्रियों का एक समूह उन्हे मनाने गया। बात नहीं बनी तो 4 जून की रात को रामलील मैदान में महाभारत मचा दिया। अब निशाना अन्ना हजारे की ओर है। अन्ना ने लोकपाल बिल लाने की बात क्या कह दी, सरकार और देश के सभी नेताओं को सांप सा सूंघ गया। देश के नेताओं को ये गलतफहमी हो गई है कि वे हमारे नेता नहीं बल्कि हमारे भगवान बन गए हैं। अन्ना ने उन्हे ये अहसास कराने की कोशिश की कि वो भगवान नहीं बल्कि उस जनता के महज़ एक सेवक हैं जिसने उन्हे वोट देकर अपने हितों की रखवाली के लिए आगे भेजा है। इससे ज्यादा उनकी हैसियत और कुछ नहीं है। शायद राजजीतिक तबके के अहं को इस बात से कुछ ज्यादा ठेस पहुंची है कि जनता अब जाग गई है और अब उनकी एक नहीं चलेगी। राजनीतिक गलियारों में बर संभव कोशिश हो रही है कि 16 अगस्त को होने वाले अन्ना हजारे के अनशन को रोक दिया जाए। अन्ना की बेदाग छवि और करोड़ों लोगो का जनसमर्थन देखकर सरकार के हौसले पस्त हैं। हालांकि अन्ना पर हमले जारी हैं। कुछ नेता अन्ना को ब्लैकमेलर भी कह रहे हैं। मैंने इक लेखक का लेख पढ़ा। और मेरे दिमाग में ब्लैकमेलिंग की परिभाषा अब स्पष्ट है। ब्लैकमेलिंग तब होती है जब एक व्यक्ति अपने निजी स्वार्थों की पूर्ति के लिए सामने वाले पर दबाव बनाए और या फिर उसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करे। लोकपाल बिल की मांग से अन्ना को कोई निजी लाभ नहीं पहुंचेगा। और नाही उन्होने किसीको नुकसाने पहुंचाने की धमकी दी या कोशिश की। अनशन पर बैठने से उन्हे ही स्वास्थय हानि होगी। तो फिर ब्लैकमेलिंग की कौन सी परिभाषा कपिल सिब्बल जैसे नेताओं ने पढ़ी है। 120 करोड़ की आबादी वो हर शख्स लोकपाल जैसे कठोर कानून की मांग कर रहा है जो भ्रष्टाचार से पीड़ित है। महज चंद लोग ही ऐसे जो इसके विरोध में हैं..एकमात्र कारण ये कि इस कानून से उनकी सार्वभौमिकता और उनके निजी स्वार्थों और कुशासन पर अकुंश लग सकता है। फिर वो चाहे नेता हों, नौकरशाह हों या फिर मंत्री। कपिल सिब्बल को ज़मीनी हक़ीकत दिखाने के लिए अन्ना एंड कंपनी ने उन्ही के निर्वाचन क्षेत्र दिल्ली के चांदनी चौक में लोकपाल बिल को लेकर सर्वे कराया। इलाके के 85 प्रतिशत लोगों ने अन्ना के लोकपाल का सम्रथन किया। कांग्रेस को जैसे ही कांटा चुभा फौरन उनके एक तीस मार खां सिपाही मनीष तिवारी ने अन्ना को चुनाव लड़ने की चुनौती दे डाली। मनीष ये भूल गए कि जिस अन्ना ने देश के लिए लड़ाई लड़ी,जिस अन्ना से अपने के विकास की शुरूआत करके पूरे देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लडाई लडी उसे चुनाव लड़ने की क्या जरूरत है। अन्ना की ताकत का अंदाज़ा इस सरकार को जंतर-मंतर से लेकर देश कर हर कोने से मिले समर्थन को देखकर लग चुका है। दबाव में ही सही सरकार ने इस सत्र में लोकपाल का एक मसौदा पेश कर दिया। लेकिन हैरत की बात ये कि जो मसौदा संसद में पेश किया गया वो ड्राफ्टिंग कमेटी के और खुद मंत्रियों के एक समूह के द्वारा बनाए गए मसौदे से भी बिलकुल अलग है। इस मसौदे में प्रधानमंत्री, सांसद, नौकरशाह और न्यायव्यवस्था को बाहर रखा है। हास्यापद यह है कि जिन लोगों को लोकपाल के दायरे में रखा गया है उनका प्रतिशत बेहद कम है। आकंड़ों की मानें तो लगभग 0.5 प्रतिशत। ये आंकड़ो मैंने एक लेखक के लेख से साभार लिए हैं। मंत्रियों और नौकरशाहों को लोकपाल से बाहर रखने पर शायद पूरा देश नाराज़ है। क्योंकि मंत्री भ्रष्टाचार नहीं करते बल्कि नौकरशाह उन्हे ऐसा करना सिखाते हैं। इसलिए चोर-चोर दोनों मौसेरे भाई कभी भी अपने ऊपर अंकुश सहन नहीं करना चाहेंगे। लोकपाल किसी के खिलाफ मामले नहीं दर्ड कर सकता। लोकपाल को कुछ मंत्रियों का समूह मिलकर निकालने की कार्रवाई कर सकता है। यानि कुल मिलाकर जनता के लोकपाल की हत्या करके नेताओं और अफसरों के लोकपाल को जनता पर थोपने की तैयारी की जा रही है। लेकिन क्या जनता इसे स्वीकार करेगी ?  जवाब जरूर दीजिएगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-5168289725996432291?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/5168289725996432291/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2011/08/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/5168289725996432291'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/5168289725996432291'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2011/08/blog-post.html' title='निशाने पर अन्ना'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/-0n4zwfr6UGE/Tj5t0aOqSNI/AAAAAAAAAV8/8pcyaETjKzI/s72-c/LOKPAL.jpg.crop_display.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-2497363311705918164</id><published>2011-06-05T06:14:00.001-07:00</published><updated>2011-06-05T06:15:39.055-07:00</updated><title type='text'>इमरजेंसी ?</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://2.bp.blogspot.com/-TyWs87n5guI/TeuBcw9ZjZI/AAAAAAAAAVk/ACZ522wuQPA/s1600/poor_indian2.jpg"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 240px;" src="http://2.bp.blogspot.com/-TyWs87n5guI/TeuBcw9ZjZI/AAAAAAAAAVk/ACZ522wuQPA/s320/poor_indian2.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5614723691626204562" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://1.bp.blogspot.com/-nRRqFO_XoAg/TeuBYRIeiQI/AAAAAAAAAVc/O5snmotTRjc/s1600/Baba-Ramdev-arrested-300x198.jpg"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 200px; height: 132px;" src="http://1.bp.blogspot.com/-nRRqFO_XoAg/TeuBYRIeiQI/AAAAAAAAAVc/O5snmotTRjc/s200/Baba-Ramdev-arrested-300x198.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5614723614363257090" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/-kxUzR9Pzc8c/TeuBQemMXSI/AAAAAAAAAVU/gRSj0Ej4Xbw/s1600/my-word.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 283px; height: 283px;" src="http://3.bp.blogspot.com/-kxUzR9Pzc8c/TeuBQemMXSI/AAAAAAAAAVU/gRSj0Ej4Xbw/s320/my-word.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5614723480538602786" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मैं क्रांतिकारी नहीं हूं, और ना ही मैां हिंसा में विश्वाश करता हूं। देश का हर ज़िम्मेदार नागरिक मेरी ही तरह सोचता है। लेकिन 4 जून की रात को रामलीला मैदान में जो कुछ भी उसे देखकर अगर कोई उग्र हो जाए तो दोष आप किसे देंगे। भद्रजनों के मन में पहले ही व्यवस्था के खिलाफ रोष था। लेकिन अब ये क्रोध अपनी सारी सीमाएं लांघ चुका है। आम आदमी का गुस्सा अब सत्ता और व्यवस्था दोनों में परवर्तन चाहता है। और हो भी क्यों ना, जिन सत्ता आरूढ़ हमारे अगुवाइयों की ज़िम्मेदारी है समाज की व्यवस्था को हमारे अनुकूल बनाना और समाज का सही ताना-बाना बुनना। लेकिन जिस दिन सत्ता अपनी व्यवस्था की जिम्मेदारी से दूर हो जाएगा...परिवर्तन की मांग ज़रूर उठेगी। दिल्ली के रामलीला मैदान में हजारों की भीड़ सत्ता बदलने के लिए नहीं आई थी। लोगों का सैलाब मात्र व्यवस्था को अपने अनुकूल बनाने की मांग कर रहा था। जिसकी मांग करने का अधिकार देश का संविधान हमें देता है। लेकिन सत्ता का एक रूप ऐसा भी सामने आता है जो हमारे अधिकारों का दमन कर देता है। देश के 120 करोड़ लोगों की गाढ़ी मेहनत की कमाई देश के बाहर जमा हो रही है। ये पैसा कितना है अब ये बताने की ज़रूरत नहीं है। सारा देश जानता है कि जिस दिन ये पैसा देश में आ गया भारत की किस्मत बदल जाएगी। रामदेव के साथ खड़ा जनसैलाब उसी पैसे का भारत लाने की मांग कर था। 13 अप्रैल 1919 को भारत की ब्रिटिश सरकार ने रॉलेट एक्ट का शांतिपूर्वक विरोध करने पर जननेता पहले ही गिरफ्तार कर लिए थे। इस गिरफ्तारी की निंदा करने और पहले हुए गोली कांड की भर्त्सना करने के लिए जलियांवाला बाग़ में शांतिपूर्वक एक सभा आयोजित की गयी थी। दिन के तीसरे पहर दस हज़ार से भी ज़्यादा निहत्थे स्त्री, पुरुष और बच्चे जनसभा करने पर प्रतिबंध होने के बावजूद अमृतसर के जलियांवाला बाग़ में विरोध सभा के लिए एकत्र हुए। उसके बाद क्या हुआ इतिहास उसका गवाह है। 4 जून की रात दिल्ली के रामलीला मैदान में जो कुछ भी हुआ उसने जलियांवाला बाग हत्याकांड की तस्वीरें एक बार फिर सामने ला दीं। नई पीढ़ी ने उस हत्याकांड के बारे में पढ़ा होगा लेकिन 4 जून 2011 को जो कुछ भी हुआ अब हम उसके गवाह हैं। यहां नरसंहार नहीं हुआ लेकिन गहरी नींद में सो रही जनता को लाठी-डंडों से पीटा गया। गोलियां नहीं चलीं लेकिन आंसू गैस के गोले दागे गए। निहत्थों को मौत के घाट नहीं उतारा गया लेकिन जबरन घसीटा गया। क्या पुरुष, क्या महिला और क्या बच्चे....सत्ता का आतंक का शिकार हर कोई हुआ। ये देखकर रूह थरथरा गई कि पिटने वाले भी अपने थे और पीटने वाले भी। लेकिन आदेश किस जनरल डायर का था इसका जवाब शायद हमें कभी नहीं मिलेगा। कानून तोड़ना अपराध है। बाबा रामदेव ने अनशन के लिए इजाजत नहीं ली थी। और इस अपराध के लिए उनके और उनके समर्थकों पर बल प्रयोग किया गया। लेकिन देश के साथ गद्दारी करने वाले और सारे नियम-कानून तोड़कर अपनी इच्छा से कानून को धराशायी करने वालों पर बल प्रयोग करने की मंशा तक दिखाई नहीं पड़ती। ए.राजा और सुरेश कलमाड़ी जेल में भी हंसते दिखाई देते हैं। मानों हमपर हास्य कर रहे हों कि हमारा कोई कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता है। हमारे पास उस हास्य को स्वीकार करने के अलावा और कोई चारा नहीं बचता। हम उस दिन को को कोसते हैं जिस दिन उन्हे अपना कीमती मत देकर अपने सिर पर बिठाया। ये सरकार दम चाहे जितना भी भरे लेकिन आज तक कोई भी ठोस कदम कभी नहीं उठाया गया। हमारे आगे हाथ जोड़ने वाले हमें ही अपने पैरों से रौंद रहे हैं। क्या संविधान ने इन्हे ये अधिकार दिया है। देश के साथ धोखा, देशवासियों के साथ धोखा ना जाने कितना धोखा ये सरकार करेगी। हम धन्यवाद करते हैं सुप्रीम कोर्ट का जिसने देश के नागरिकों ये भरोसा दिलाया है कि कानून से बढकर कोई नहीं। तो क्या अब फिर से सुप्रीम कोर्ट को ही पहल करनी होगी इस सत्ता और व्यवस्था को बदलने के लिए।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-2497363311705918164?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/2497363311705918164/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2011/06/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/2497363311705918164'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/2497363311705918164'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2011/06/blog-post.html' title='इमरजेंसी ?'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' 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href="http://3.bp.blogspot.com/-kiWsmue7uoI/TaGcurWp50I/AAAAAAAAAVA/dsluFW3lhx4/s1600/anna-hajare.jpg"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 190px; height: 200px;" src="http://3.bp.blogspot.com/-kiWsmue7uoI/TaGcurWp50I/AAAAAAAAAVA/dsluFW3lhx4/s200/anna-hajare.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5593924537896527682" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://2.bp.blogspot.com/-uV5sE06cSZs/TaGcruDgG4I/AAAAAAAAAU4/_O1rN1r8kuE/s1600/CORRUPTION.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 351px; height: 225px;" src="http://2.bp.blogspot.com/-uV5sE06cSZs/TaGcruDgG4I/AAAAAAAAAU4/_O1rN1r8kuE/s400/CORRUPTION.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5593924487081892738" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;अण्णा हजारे के साथ हजारों। जंतर-मंतर पर ये नारा थमने का नाम नहीं ले रहा था। सिस्टम के खिलाफ आम आदमी का गुस्सा था। कुछ दिन पहले देश ने वर्ल्डकप जीता था। अब देश एक बार फिर कप जीता है। करप्शन की पिच पर फ्रंटफुट पर बैटिंग करने उतरे यूपीए के टॉप आर्डर को अण्णा की फिरकी ने बैकफुट पर फेंक दिया। मैंने 1947 का आंदोलन नहीं देखा और ना ही मेरी नई पीढ़ी ने इस तरह का आंदोलन देखा होगा। &lt;br /&gt;लेकिन 2011 के के इस क्रांति का मैं गवाह भी हूं और हिस्सा भी। हमारी लड़ाई ना बाबू से थी, और ना खादी से। ना साहब से थी और ना खाकी से। ये लड़ाई थी सिस्टम से। अब तक कहते रहे कि इस देश का कुछ नहीं हो सकता क्योंकि इस देश का सिस्टम ही खराब है। दुनिया की सबसे बड़ी डेमोक्रेसी की विडंबना ही यही थी। लेकिन पानी सर से ऊपर हो गया। &lt;br /&gt;                गांधी और भगत सिंह के किस्से पढ़े भी और सुने भी, लेकिन जंतर-मंतर पर मैंने गांधी और भगत सिंह को देख लिया। इस पीढ़ी के साथ आनेवाली पीढ़ी को भी क्रांतिकारी बनते देख लिया। हाथों में तिरंगा और सत्ता कि खिलाफ गुस्सा...ये क्रांति नहीं तो और क्या है ?  ये गुस्सा शायद सालों से हमारे अंदर था। करप्शन का शिकार हममें हर कोई हो चुका है। स्कूल में एडमिशन के लिए करप्शन, गाड़ी चलाने की परमिशन के लिए करप्शन....लेकिन अब बस...&lt;br /&gt;      मैं विधिज्ञानी नहीं हूं। इसलिए नहीं जानता कि लोकपाल बिल कितना कारगर होगा...होगा भी या नहीं। लेकिन इतना समझ गया कि पब्लिक अब चुप नहीं रहेगी। अब लालबत्ती पर 100 रुपए नहीं दूंगा। गलती की, तो सज़ा भुगत लूंगा लेकिन 100 रुपए देकर इस करप्ट सिस्टम का हिस्सा नहीं बनूंगा। किसी ने अन्याय किया तो चुपचाप सहने की बजाए लोकपाल का दरवाजा खटखटाउंगा। अब तक देश में अंधेर देखा है इसलिए देर से ही सही लेकिन हक की लड़ाई लड़ूंगा। &lt;br /&gt;                  अरे ! वोट देकर जिसे अपना रहनुमा बनाकर दिल्ली भेजा उसने हमारे सीने में छुरा भोंक दिया। मेरा घर संभालने के लिए मैंने जिसे पावर दिया उसीने मेरे घर में डाका डाल दिया। अब मैं अपने घर की रखवाली के लिए नेता की बजाए अपना अधिकारी रखना चाहता हूं। वो मेरा लोकपाल होगा। वो मेरी बात सुनेगा। ना जाने कितने राजा और कलमाड़ी मेरे घर से मेरी ही मेहनत की कमाई लूटकर अपनी तिजोरी भर रहे हैं। मेरी शिकायत सुनने वाला कोई नहीं है। मेरा लोकपाल मेरी सुनेगा। और ऐसे राजा और कलमाड़ी से मेरा पैसा मुझे वापस लाकर देगा। इतना ही नहीं उन्हें उनके कारनामों की सजा भी देगा। &lt;br /&gt;                     मैं भी जंतर-मंतर गया था। अण्णा हजारे को समर्थन देने नहीं बल्कि अपने आनेवाली पीढ़ी को ये बताने कि मैंने इस सिस्टम को बदलने के लिए आवाज़ उठाई थी। मेरा नाम इतिहास में भले ना लिखा जाए लेकिन मैं उस इतिहास का हिस्सा हूं। मैं सरकार को झुका दिया। उन्हे झुका दिया जो खुद को खुदा समझते थे। मैंने उन्हे बता दिया कि मालिक मैं हूं और तुम सिर्फ नौकर। अण्णा के एहसान मैं कभी नहीं भूलुंगा। अण्णा ने मुझे ताकत दी मेरे गुस्से को सही रास्ता दिखाया। मेरी आवाज के आगे सिस्टम झुक गया। ये मेरी जीत है...ये हमारी जीत है......&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-5135931316903615892?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/5135931316903615892/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2011/04/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/5135931316903615892'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/5135931316903615892'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2011/04/blog-post.html' title='हम जीत गए, मैं जीत गया....'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/-tQXlgsWkhTE/TaGcyvdPOtI/AAAAAAAAAVI/ojLPn-4r0VA/s72-c/law-lokpal.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-1504030472434250073</id><published>2011-03-27T05:22:00.000-07:00</published><updated>2011-03-27T05:29:06.283-07:00</updated><title type='text'>बदलता बिहार...</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/-giKgxXRqTwo/TY8tjqtftiI/AAAAAAAAAUw/ISpVLbUnmbk/s1600/lalu-prasad-yadav_010111110548.jpg"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 200px; height: 148px;" src="http://3.bp.blogspot.com/-giKgxXRqTwo/TY8tjqtftiI/AAAAAAAAAUw/ISpVLbUnmbk/s200/lalu-prasad-yadav_010111110548.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5588735753373857314" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/-Vm2SSsdBwNI/TY8tf6e7vcI/AAAAAAAAAUo/J0SdThi1pE8/s1600/nitish.jpg"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 221px;" src="http://4.bp.blogspot.com/-Vm2SSsdBwNI/TY8tf6e7vcI/AAAAAAAAAUo/J0SdThi1pE8/s320/nitish.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5588735688888270274" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/-Gmuo1V3KELs/TY8tbHoJUoI/AAAAAAAAAUg/wfOgoekyIc0/s1600/businessgraph.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 200px; height: 164px;" src="http://3.bp.blogspot.com/-Gmuo1V3KELs/TY8tbHoJUoI/AAAAAAAAAUg/wfOgoekyIc0/s200/businessgraph.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5588735606517224066" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सालों से अगर हमारे मस्तिष्क पटल पर अगर कोई भ्रांति ने डेरा जमा रखा हो तो ज़रूरी नहीं है को वो अटल सत्य है। वस्तुत: उस विषय विशेष से जुड़ी धारणा किसी परिपेक्ष में यथार्थ हो सकती है। मैंने बिहार नहीं देखा है। लेकिन बिहार पर कटाक्ष करने में मैं भी पीछे नहीं रहा। मैं भी से मेरा तात्पर्य कदाचित आपको भी समझ में आ गया होगा। जब मतभ्रांति टूटी तो मुझे नालंदा विश्वविद्यालय याद आया। मुझे वो वक्त भी याद आया जब सिर्फ आर्यावार्त ही नहीं अपितु समस्त संसार के विद्याप्रेमी बिहार की धूलि पाकर स्वयं को धन्य समझते थे। सार और संसार का ज्ञान केवल बिहार के पास था। राजनीति और कूटनीति यहीं की देन है। इसी राज्य ने चाण्क्य दिया तो इसी राज्य ने चंद्रगुप्त मौर्य भी दिया। इतिहास के पन्नों से शुरू इस यात्रा को मैं वर्तमान परिवेश में ले जाना चाहुंगा। 90 के दशक तक बिहार पर लालू यादव सत्ता शीर्ष रहे। राजनीति और साम्राज्यवाद का अनुपम मेल बिहार में देखने के मिल रहा था। लालू अवसरवादी थे लेकिन जनता के सामने अपनी छवि वो समाजसेवी की बनाए रखते थे। बिहार को विकास की बारहखड़ी भी नहीं पता थी। समयचक्र बदला...लोगों की जिज्ञासा बढ़ी और बदलाव की बयार ने सबकुछ बदल दिया। बिहार में शिक्षा की दर सबसे कम रही। बावजूद इसके देश की व्यवस्था बनाए रखने वाले साहब इसी प्रदेश से आते रहे। बिहार और बिहार के लोग आज भी उनपर गर्व करते हैं। लोकतंत्र का चौथा स्तंभ भी इसी प्रदेश ने मजबूत किया।    &lt;br /&gt;15 सालों के लालूराज ने बिहार की छवि कुछ यूं बदहाल की जिसका नतीजा बिहार के लोगों को पूरे देश में भुगतना पड़ा। प्रदेश को विकास और शिक्षा से दूर क्या रखा, पलायन दर बढ़ती रही। महाराष्ट्र में बिहार वासियों के साथ जो कुछ भी हुआ उसका एक कारण आप पलायन को मान सकते हैं। कूटनीति और राजनीति का जगतगुरू बना ये प्रदेश अब सांस लेने लगा है। विकास दर बढ़ चुकी है। शिक्षा दर बढ़ रही है। पूंजीवादी अब बिहार में मौका तलाशन लगे हैं। ज़ाहिर है आनेवाला वक्त बिहार के लिए एक नया सूरज लेकर आने वाला है। इस लेख को लिखने के लिए मुझे एक लेख ने प्रेरित किया है। कहीं पढ़ा था कि देश के अन्य राज्यों की तुलना में विभिन्न क्षेत्रों में पिछड़ा बिहार शराब की खपत के मामले में भी सबसे पीछे है और यहां प्रति सौ व्यक्ति इसकी खपत मात्र 45 लीटर है। देश की राजधानी दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में शराब की खपत क्रमश: 999 लीटर, 612 लीटर, 594 लीटर, 414 लीटर और 144 लीटर है। अगर विदेशों की बात करें तो दक्षिण अफ्रीका में 2122 लोगों पर शराब की एक दुकान है। इसी प्रकार ब्रिटेन में 303, अमेरिका में 265, आस्ट्रेलिया में 483, रुस में 432 तथा चीन में 195 लोगों पर एक दुकान मौजूद है। इस खबर को मैं बिहार के लिए एक नया सवेरा मानता हूं। बिल गेट्स का हालिया दौरा इस सेवरे में जान फूंकता है। मैं किसी पार्टी या व्यक्ति विशेष का नाम नहीं लूंगा न ही मैं किसी राजनीतिक पार्टी से संबंध रखता हूं। लेकिन बिहार का वर्तमान चेहरा मुझे सोचने पर मजबूर करता है कि मैं अपनी राय बदलूं। हर अंधकार के बार सूरज उगता है और बिहार का सूर्योदय हो चुका है। बिहार के लोग बदलाव के पक्ष में हैं और अब बिहार में एक नया युग आएगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-1504030472434250073?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/1504030472434250073/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2011/03/blog-post_27.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/1504030472434250073'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/1504030472434250073'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2011/03/blog-post_27.html' title='बदलता बिहार...'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/-giKgxXRqTwo/TY8tjqtftiI/AAAAAAAAAUw/ISpVLbUnmbk/s72-c/lalu-prasad-yadav_010111110548.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-3446712917495969500</id><published>2011-03-12T06:38:00.000-08:00</published><updated>2011-03-12T06:40:57.510-08:00</updated><title type='text'>बस कुछ दिन ?</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/-JQbbxH6oEAM/TXuF9asxZ9I/AAAAAAAAAUY/iPNShuE0OME/s1600/Our_Mother_is_Crying.jpg"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 300px;" src="http://4.bp.blogspot.com/-JQbbxH6oEAM/TXuF9asxZ9I/AAAAAAAAAUY/iPNShuE0OME/s320/Our_Mother_is_Crying.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5583203453241485266" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/-_tcaccPB9wo/TXuF4ggTGvI/AAAAAAAAAUQ/_O50DVPBIY0/s1600/299217-japan-tsunami.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 180px;" src="http://3.bp.blogspot.com/-_tcaccPB9wo/TXuF4ggTGvI/AAAAAAAAAUQ/_O50DVPBIY0/s320/299217-japan-tsunami.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5583203368900434674" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;जापान में ज़लज़ला क्या आया...सारी दुनिया की ज़बान पर एक ही सवाल है। बस कुछ दिन और ?  धरती की तबाही की शुरूआत हो चुकी है। विनाश की उल्टी गिलती शुरू हो चुकी है। सालों लंबी ज़िंदगी अब लम्हों में कट रही है। जापान के साथ सारी दुनिया ने जो मंज़र देखा उसकी तस्वीर ज़िंदगी भर ज़िंदा रहेगी। कुदरत का क़हर धरती पर ऐसा बरपा मानो विनाश का दिन आज ही है। माया सभ्यता के कैलेंडर ने विनाश की दिन मुकर्रर कर दी है। जापान की विनाशकारी घटना आने वाले खतरे का संकेत मात्र है। प्रलय किसे कहते हैं अब ये समझना मुश्किल नहीं है। पाप और पुण्य के तराजू में पाप का पलड़ा शायद भारी हो चुका है। डर हर किसी के जेहन में घर कर चुका है। सारी दुनिया धरती मां से प्रार्थना कर रही है कि हे धरती मां हमें हमारी ग़लतियो के लिए माफ कर दो। ये विनाशलीला रोक दो। &lt;br /&gt;                                 आखिर हमें हमारी ग़लतियों का एहसास अब क्यों हो रहा है ? सालों तक हमने प्रकृति की उपेक्षा की। और अब जब प्रकृति हमारी उपेक्षा कर रही है तो हम चीख-पुकार मचा रहे हैं। इस दिन की कल्पना पर्यावरणविदों ने बहुत पहले ही कर दी थी। लेकिन मानवी लोलुपता और पिपाशा के वशीभूत होकर मानवों ने प्रकृति के हर उस नियम की अवहेलना की जिसका दुष्परिणाम आज हमारे सामने है। अपने निजी हितों के लिए हमने प्रकृति में परिवर्तन करना शुरू किया। निजी स्वार्थ के चलते धरती की हरियाली पतनोन्मुख हो गई। क्या धरती..क्या आसमान सब दूषित होते गए। जल, थल और वायु पर नियंत्रण करने की हमारी मंशा ने हमें अंत के द्वार पर खड़ा कर दिया है। दुनिया के विकसित देश बढ़ते प्रदूषण या यूं कहें की ग्रीन हाउस इफेक्ट के लिए प्रगतिशील देशों को ज़िम्मेदार ठहराते हैं। प्रगतिशील देशों में ताकतवर और कद्दावर बनने की होड़ मची है, चाहे इसके लिए कोई भी कीमत क्यों ना चुकानी पड़ी। जापान में जो ज़लज़ला आया वो इतिहास की सबसे बड़ी विनाशकारी घटना है। लाखों लोग अभी भी लापता हैं। मरनेवालों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जापान ने मित्र राष्ट्रों में सबसे कद्दावर देश अमेरिका को पर्ल हार्बर जैसा ज़ख्म दिया। अमेरिका ने जापान को नागासाकी और हिरोशिमा पर परमाणु बम बरसाकर करारा जवाब दिया। जापान एक त्रासदी भूला भी नहीं था कि अब एक और जख्म से पीड़ित हो चुका है। और सिर्फ जापान ही क्यों...26 जुलाई, मुंबई, पिछले साल चीन की बाढ़, लेह और लद्दाख की त्रासदी के साथ दुनिया के अलग-अलग कोने लगातार मिल रही तबाही की खबरें हमें इस बात का इशारा कर रही हैं कि अब वो वक्त आ गया है। जापान के पास बचने के लिेए 12 मिनट मात्र शेष थे। लेकिन हमारे पास तो शायद अभी सालों का वक्त है। हम अभी भी अपनी गलतियां सुधार कर मानव सभ्यता को विलुप्त होने से बचा सकते हैं। हम अभी भी तबाही को रोक सकते हैं। बशर्ते हम प्रकृति का आदर करें।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-3446712917495969500?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/3446712917495969500/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2011/03/blog-post_12.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/3446712917495969500'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/3446712917495969500'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2011/03/blog-post_12.html' title='बस कुछ दिन ?'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/-JQbbxH6oEAM/TXuF9asxZ9I/AAAAAAAAAUY/iPNShuE0OME/s72-c/Our_Mother_is_Crying.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-2620133336519600768</id><published>2011-03-05T23:43:00.001-08:00</published><updated>2011-03-06T00:21:22.075-08:00</updated><title type='text'>इन आंखों की मस्ती के दीवाने हज़ारों हैं !</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://1.bp.blogspot.com/-HLCqo5eR0A4/TXND-4fcFPI/AAAAAAAAAUI/vLT7gbqAwJM/s1600/REKHA.jpg"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 400px; height: 300px;" src="http://1.bp.blogspot.com/-HLCqo5eR0A4/TXND-4fcFPI/AAAAAAAAAUI/vLT7gbqAwJM/s400/REKHA.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5580879110837376242" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/-klyJ6tcwlIU/TXND6cQcWjI/AAAAAAAAAUA/7GTig-bX75c/s1600/rekha50-1_1192024859_l.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 303px; height: 360px;" src="http://3.bp.blogspot.com/-klyJ6tcwlIU/TXND6cQcWjI/AAAAAAAAAUA/7GTig-bX75c/s400/rekha50-1_1192024859_l.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5580879034538809906" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;हम बीसवीं सदी में जी रहे हैं। सारी दुनिया के रंग और कलेवर अब बदल चुके हैं। बात करें फिल्मों की तो अब 36 मिमी का रंग 70 मिमी के परदे पर उतर चुका है। सिंगल स्क्रीन थिएटर तो अब आंखों से दुर्लभ हो गए हैं। मल्टीप्लेक्स का ज़माना है। कभी लकड़ी की कुर्सियों पर बैठकर फिल्मों का लुत्फ उठाते लोग अब गोल्टन टिकट लेकर लेटकर बॉलीवुड का मज़ा लेते हैं। लेकिन मैं बात यहां ना तो फिल्मों की करुंगा और ना ही थिएटरों की...आज मुझे याद आ रही है उन्नीसवीं सदी की उस महान अदाकारा की जिसकी खूसबसूरती का आज भी कोई जवाब नहीं। जिसके अभिनय की नकल तो दूर उसके पास पहुंचने की हिमाकत भी आज की किसी अभिनेत्री ने नहीं की। आज मुझे याद आ रही है रेखा की। जिस रेखा के बिना आज भी बॉलीवुड अधूरा है उसने ज़िंदगी में  संघर्ष और सफलता के बीच का फैसला कैसे तय किया, वो आज भी एक मिसाल है। चार साल की उम्र में बेबी भानुरेखा ने रूपहले पर्दे पर पहला कदम रखा। हिंदी फिल्मों की जान बनने से पहले रेखा अभिनय की शुरूआत दक्षिण भारतीय फिल्मों से की। &lt;br /&gt;1970 में रेखा ने हिंदी फिल्मों का रुख किया। बतौर अभिनेत्री रेखा की पहली हिंदी फिल्म थी ‘सावन भादों’। इस फिल्म से रेखा को कुछ खास सफलता नहीं मिली जिसकी वजह से उन्हे बेहद निराशा हुई। लेकिन उन्हे नहीं पता था कि इस फिल्म के बाद हिंदी फिल्मों के तमाम निर्देशकों की नज़र अब उन पर पड़ चुकी थी। रेखा के हाथों की रेखा &lt;br /&gt;ने अपना जलवा तब दिखाया जब उन्हे पहली बार आज की सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म अलाप में काम करने का मौका मिला। इस जोड़ी की सफलता देखकर प्रकाश मेहरा ने इन दोनों को फिल्म ‘मुकद्दर का सिकंदर’ फिल्म बनाई। फिल्म इसी जोड़ी को मौका दिया गया। और देखते ही देखते रेखा और अमिताभ ने शोहरत के आसमान को छूना शुरू कर दिया। फिल्म की कामयाबी के साथ रेखा के सितारे भी सातवें आसमान को पार कर चुके थे। अमिताभ के साथ ही फिल्म ‘मि.नटवरलाल’&lt;br /&gt;में रेखा एक बार फिर नज़र आईं। फिल्म का गीत ‘परदेसिया’ इतना ज़बरदस्त हिट हुआ कि उसके बोल सुनते ही आज की पीढ़ी भी थरकने को नजबूर हो जाती है। एक गांव की भोली-भाली लड़की का किरदार रेखा ने बखूबी निभाया। वहीं फिल्म ‘सुहाग’ में रेखा की अदायगी ने उन्हे प्रशंसकों के दिलोदिमाग पर हावी कर दिया। अपनी कई फिल्मों में तवायफ का किरदार रेखा ने कुछ ऐसा निभाया कि उनपर मर मिटने वालों का रेला सा लग गया। रेखा की आंखें बिना बोले ही बहुत कुछ कह जाती थीं। उनकी आँखों की कशिश ने ना जाने कितनों को घायल किया। रेखा के चाहने वालों की तादात बढ़ती जा रही थी। वहीं रेखा के दिल में भी किसी शख्स ने अपनी जगह बनानी शुरू कर दी। वो शख्स कोई और नहीं बल्कि अमिताभ बच्चन थे। दोनों के अफेयर के चर्चे खूब चले। &lt;br /&gt;बॉलीवुड की सबसे हिट जोड़ी को हर चाहने वाला जीवन भार साथ देखने की चाहत पालने लगा। लेकिन अमिताभ के दिल में पहले ही जया बहादुरी बस चुकी थीं। रेखा, अमिताभ और जया के बीच लवट्राएंगल को यश चोपड़ा ने देखा। यश चोपड़ा ने जया, अमिताभ और रेखा को लेकर फिल्म बनाई जिसका नाम था ‘सिलसिला’। फिल्म बेहद मशहूर हुई। फिल्म की सफलता के पीछे आज भी वजह इन तीनों कलाकारों के रिश्ते का माना जाता है। रील लाइफ की कहानी को लोगों ने रीयल लाइफ से जोड़कर देखा। &lt;br /&gt;प्रेम की मारी रेखा ने अपना प्रेम खो दिया। लेकिन ज़िंदगी से हार नहीं मानी। फिल्म &lt;br /&gt;‘उमराव जान’ में रेखा ने जो अदायगी दिखाई वो एक मिसाल बन गई। उसी ‘उमराव जान’ को जब दोबारा पर्दे पर उतारा गया जो उसमें रेखा की जगह ऐश्वर्या राय नज़र आईं। ऐश्वर्या ने ‘उमराव जान’ के किरदार को निभाने की पूरी कोशिश की लेकिन दर्शकों ने इस ‘उमराव जान’ को उस ‘उमराव जान’ के ज़रा भी करीब नहीं पाया। मैं खुद भी रेखा के चाहने वालों में से एक हूं। और इसलिए मैं जानता हूं कि जिस दिन रेखा और अमिताभ दोबारा सिल्वर स्क्रीन पर आए तो बॉलीवुड में एक नया इतिहास बनेगा। रेखा अपने आप में एक अनसुलझी कहानी हैं। प्रेम ऐसा किया कि दोबारा किसी को दिल में जगह नहीं दी। किसने क्या कहा और क्यों कहा इसकी परवाह ज़रा भी नहीं की। रेखा की इस प्रेम को मैं सलाम करता हूं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-2620133336519600768?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/2620133336519600768/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2011/03/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/2620133336519600768'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/2620133336519600768'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2011/03/blog-post.html' title='इन आंखों की मस्ती के दीवाने हज़ारों हैं !'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/-HLCqo5eR0A4/TXND-4fcFPI/AAAAAAAAAUI/vLT7gbqAwJM/s72-c/REKHA.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-7620228280875417948</id><published>2011-02-28T05:56:00.000-08:00</published><updated>2011-02-28T06:21:36.613-08:00</updated><title type='text'>कभी देखी है ऐसी शादी ?</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/-fOYTAK9dRdo/TWuvacFNIkI/AAAAAAAAAT4/YGO98WEJ_0Q/s1600/helicopter-coloring-pages.gif"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 299px; height: 320px;" src="http://4.bp.blogspot.com/-fOYTAK9dRdo/TWuvacFNIkI/AAAAAAAAAT4/YGO98WEJ_0Q/s320/helicopter-coloring-pages.gif" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5578745432177975874" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/-s6ELSZPgrvs/TWuvWZZFelI/AAAAAAAAATw/s7DjP8SEIIw/s1600/chopper_25611_f.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 250px; height: 250px;" src="http://4.bp.blogspot.com/-s6ELSZPgrvs/TWuvWZZFelI/AAAAAAAAATw/s7DjP8SEIIw/s320/chopper_25611_f.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5578745362736577106" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;आज सुबह का अखबार सिर्फ आम आदमी की बजट से उम्मीदों से ही भरा नहीं था। ना ही इसमें सिर्फ प्रणब दा की गई गुहारों और घर बैठे खाली विश्लेषकों की राय से भरा था। अखबार के एक पन्ने में कुछ अलग ही खबर छपी थी। खबर भी ऐसी की जिसपर यकीन करना मुश्किल था, लेकिन ये सच था। दिल्ली की एक जानी-मानी हस्ती हैं कंवर सिंह तंवर। दिल्ली और आस-पास रहने वाले लोग इनको बखूबी जानते होंगे। विधानसभा और लोकसभा में ये बहुजन समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार रहे हैं। इन साहब के साहबज़ादे शादी की उम्र् तक पहुंच गए हैं। ज़ाहिर है इतनी बड़ी हस्ती के घर की शादी है तो कुछ खास ही होगी। तो जनाब तंवर साहब के साहबजादे का रिश्ता पूर्व विधायक सुखबीर सिंह जौनपुरिया की बेटी से तय हुई है। अब आप सोचेंगे कि मैं दूसरों के घरों के निजी मामलों पर कटाक्ष करता हूं। लेकिन कहानी शुरू ही यहीं से होती है। चलिए मैं आप से ये सवाल पूछता हूं कि आप अपनी बेटी की शादी में क्या तोहफा देते हैं। मैं तोहफा इसलिए कह रहा हूं क्योकि अगर मैं दहेज का नाम लूंगा तो आप मुझपर असमाजवादी और दहेज जैसी बुरी प्रथा को बढ़ावा देने का आरोप लगाएंगे। इससे अच्छा है कि मैं इसे तोहफे का ही नाम दूं। हां तो जनाब...आप अपनी बेटी और दामाद को तोहफे में क्या दे सकते हैं। गाड़ी...लाखों रुपए...बंगला...या फिर गहने। लेकिन एक पिता ऐसा भी है जिसने पितृप्रेम का एक नया इतिहास रच दिया है। जी हां सुना है पूर्व विधायक जौनपुरिया ने अपने होने वाले दामाद को तोहफे के रूप में उड़न खटोला यानि हेलिकॉप्टर दिया है। पिता के अरमान देखिए..सोचा होगा कि बेटी और दामाद सड़क पर गाड़ियों के भीड़ में कहीं परेशान नाहो जाएं। कहीं गाड़ी का एसी खराब हो गया तो दामाद जी को तकलीफ होगी। और गर कहीं दिल्ली से चंडीगढ़ जाना होगा तो घंटों गाड़ी चलाने की जेहमत ना उठानी पड़ी। सो जौनपुरिया साहब ने अपने दामाद को एक नया हेलिकॉप्टर तोहफे में दे दिया। मेरी भाषा से आपको लग रहा होगा कि मैं ईर्ष्या और द्वेश का शिकार हो रहा हूं। लेकिन ऐसा नहीं है। मैं तो पिता के प्रेम पर विश्वास करने की कोशिश कर रहा हूं। जौनपुरिया साहब ने चुनाव लड़ते समय अपनी संपत्ति का जो ब्यौरा दिया था उस पर नज़र डालें तो उनका ये तोहफा कुछ और ही कहानी कहता है। लेकिन जब काफी समय के लिए वो विधायक की कुर्सी पर विराजमान थे तो कत्तई ताज्जुब नहीं होता। सालों पहले बिहार में भी कुछ ऐसी ही मिसाल देखने को मिली थी। बिहार की कुर्सी पर लालू यादव विराजमान थे। सीएम साहब की बेटी की शादी थी। सुना है शहर की सभी दुकानों से फ्रिज, टीवी और कूलर एक एणे मार्ग पहुंच गए थे। बेटी की शादी में आए सभी मेहमानों को तोहफे दिए गए थे। लेकिन जौनपुरिया साहब ने बेटी के प्रेम में जो नया इतिहास रचा है उसे तो कोई टाटा-बिड़ला या अंबानी भी नहीं तोड़ पाएंगे। जौनपुरिया साहब ने अरबों रुपए का ये हलिकॉप्टर कितनी पसीना बहाकर खरीदा है इसकी जांच होगी या नहीं ये मैं नहीं जानता लेकिन इस शादी को मैं कभी भी नहीं भूल पाउंगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-7620228280875417948?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/7620228280875417948/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2011/02/blog-post_28.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/7620228280875417948'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/7620228280875417948'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2011/02/blog-post_28.html' title='कभी देखी है ऐसी शादी ?'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/-fOYTAK9dRdo/TWuvacFNIkI/AAAAAAAAAT4/YGO98WEJ_0Q/s72-c/helicopter-coloring-pages.gif' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-122767436354612360</id><published>2011-02-26T07:26:00.000-08:00</published><updated>2011-02-26T07:28:08.205-08:00</updated><title type='text'>बिगड़ गया बजट...</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/-jMYngQUCQD0/TWkcAykAGMI/AAAAAAAAATo/1Dm9KZTjGPY/s1600/INFLATION.jpg"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 279px;" src="http://3.bp.blogspot.com/-jMYngQUCQD0/TWkcAykAGMI/AAAAAAAAATo/1Dm9KZTjGPY/s320/INFLATION.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5578020413373421762" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/--9zL56zA0BI/TWkb5591WPI/AAAAAAAAATg/ho4oU9bzMgU/s1600/PRANAB.jpg"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 227px; height: 320px;" src="http://4.bp.blogspot.com/--9zL56zA0BI/TWkb5591WPI/AAAAAAAAATg/ho4oU9bzMgU/s320/PRANAB.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5578020295101733106" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://1.bp.blogspot.com/-j8QMoSmeq9U/TWkb05jqs5I/AAAAAAAAATY/0q-sLmQPzRU/s1600/budget-cuts1_jpg.gif"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 320px;" src="http://1.bp.blogspot.com/-j8QMoSmeq9U/TWkb05jqs5I/AAAAAAAAATY/0q-sLmQPzRU/s320/budget-cuts1_jpg.gif" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5578020209092637586" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बजट आने वाला है। आद आदमी बढ़ती महंगाई से पहले ही हलकान है। ज़ाहिर है हर किसी की नज़र प्रणब के पिटारे पर लगी है। दादा के बक्से में आम लोगों के लिए क्या है...कोई कहता है कि दादा टैक्स की छूट को 2 लाख तक कर देंगे। तो कई कहता है कि निवेश की सीमा बढ़ा सकते हैं। हर किसी की अपनी-अपनी सोच है। लेकिन सोच के पीछे का सच दरअसल ये है कि ये इनकी ज़रूरत है और अपनी ज़रूरत के लिए आम आदमी इस बजट स उम्मीदें लगाए बैठा है। देश के प्रधानमंत्री ने वादा किया है कि विकास दर को इस साल 9 फीसदी तक पहुंचाएंगे। आगे क्या होगा ये तो पता नहीं लेकिन महंगाई दर अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। दाल रोटी से भी मोहताज हो रहे देश के लोगों ने नज़रें उठाकर सवाल पूछा तो उन्हे जवाब में कहा गया कि सब्र करो। देखिए ना...महंगाई भी कैसे-कैसे छलावा करती है। कागज़ों में महंगाई दर कम होती दिखाई पड़ी लेकिन बाज़ार में रोजमर्रा की चीज़ों के दाम और आम आदमी की जेब कुछ और ही कहानी कहती है। सुना है कि भारत की अर्थव्यवस्था की गणना दुनिया में पांचवें नंबर पर की जाती है। हम विकसित देशों की तुलना में खड़े होने लगे हैं। लेकिन ज़मीनी हक़ीकत फिर से हमारे सपनों के आगे अंधेरा कर देती है। गरीबी, बेरोजगारी, और भ्रष्टाचार हमारी ज़ड़ों को खोखला कर रहा है। लेकिन फिर भी हमारे सपने सातवें आसमान के घोड़े पर सवार हैं। प्रणब बाबू बजट के रूप में क्या तोहफा देंगे। रेल बजट में दीदी ने आम आदमी की जेब का ख्याल रखा। चालू डिब्बे में सफर करने वालों पर बोझ नहीं डाला। टिकटों के दाम नहीं बढ़ाए। ये और बाता है कि उनका बजट सिर्फ बंगाल के लिए ही था। लेकिन हम इस बात से ही खुश हैं कि हमारी जेब से ज्यादा पैसे नहीं निकलेंगे। महंगाई में कुछ पैसे तो बचेंगे। हमारे कुछ भाई ऐसे हैं जो पैसों से पैसा बनाना जानते हैं। शेयर बाज़ार के दांव-पेंच हमें समझ में नहीं आते लोकिन वो खिलाड़ी हैं। साल के इस दिन उनकी धड़कनें भी बढ़ी होंगी। दादा के पत्ता खोलने के बाद बैंकों के ब्याज दरों में भी उथल-पुथल हो सकती है। ज़ाहिर है ब्याज़ बढ़ेंगे तो कइयों के सपने बिखर जाएंगे। बंगले का सपना 2 बेडरूम वाल फ्लैट में बदल जाएगा और फ्लैट का सपना देखने वाले तो घर को ही सपना समझ कर संतोष कर लेंगे। पेट्रोल की कीमतें पहले ही आसमान पर हैं। डीजल के दाम रोककर सरकार तेल कंपनियों के दबाव में है। ज़ाहिर है उस तबके का दबाव सरकार बर्दाश्त नहीं कर सकती है। फिर चाहे कीमतों में आग ही क्यों ना लग जाए। तो मन मारने से अच्छा है कि पहले ही तैयार रहें और भगवान से प्रार्थना करें कि दादा का पिटार जब खुले तो मेरी लिखी सारी बातें सिर्फ कोरी कल्पना बनकर रह जाए। सच कहूं तो मैं भी यही चाहता हूं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-122767436354612360?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/122767436354612360/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2011/02/blog-post_26.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/122767436354612360'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/122767436354612360'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2011/02/blog-post_26.html' title='बिगड़ गया बजट...'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/-jMYngQUCQD0/TWkcAykAGMI/AAAAAAAAATo/1Dm9KZTjGPY/s72-c/INFLATION.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-8509809463823450707</id><published>2011-02-24T06:55:00.001-08:00</published><updated>2011-02-24T07:01:37.983-08:00</updated><title type='text'>ये बाबा बोलता है...</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/-hlgLUo8YHL4/TWZyzE2TrRI/AAAAAAAAATQ/TKetLLkFKNs/s1600/j_140_Black_Money_and_Swiss_Bank.jpg"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 262px;" src="http://4.bp.blogspot.com/-hlgLUo8YHL4/TWZyzE2TrRI/AAAAAAAAATQ/TKetLLkFKNs/s320/j_140_Black_Money_and_Swiss_Bank.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5577271410345356562" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://2.bp.blogspot.com/-qvv9lYzgYyQ/TWZyvfeIoxI/AAAAAAAAATI/mRSkg8AahAM/s1600/Swami-ramdev.jpg"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 248px; height: 178px;" src="http://2.bp.blogspot.com/-qvv9lYzgYyQ/TWZyvfeIoxI/AAAAAAAAATI/mRSkg8AahAM/s320/Swami-ramdev.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5577271348772250386" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/-1TECWF-HR9Q/TWZysEJW4GI/AAAAAAAAATA/J_3Ud9YHFxE/s1600/black%2Boney.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 273px; height: 185px;" src="http://3.bp.blogspot.com/-1TECWF-HR9Q/TWZysEJW4GI/AAAAAAAAATA/J_3Ud9YHFxE/s320/black%2Boney.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5577271289897738338" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;बाबा रामदेव आजकल सुर्खियों में हैं। कारण है काला धन... काला धन बाबा के पास है या नहीं ये या तो बाबा बखूबी जानते हैं या फिर वो लोग जो बाबा पर काला धन रखने का आरोप लगाते हैं। दुनिया भर में योग क्रांति लाने वाले बाबा रामदेव के सितारे फिलहाल गर्दिश में हैं। जब से बाबा को राजनीति की चस्का लगा है, आए दिन उनपर सियासी हमले हो रहे हैं। हाल ही में बाबा आसाम गए थे। योग शिबिर में योग का ज्ञान देते-देते ना जाने बाबा की ज़बान फिसली या फिर आदतन समझिए, बाबा ने भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ बोलना शुरू कर दिया। योगगुरू का ये ज्ञान स्थानीय कांग्रेस नेता को रास नहीं आया। नोताजी ने बाबा को सिर्फ योग पर ध्यान देने की नसीहत दे डाली। बस फिर क्या था ? बाबा नेताजी पर बरस पड़े और बाबा बनाम कांग्रेस में बयानबाज़ी का दौर शुरू हो गया। रामदेव ने साफ-साफ कह दिया कि अगर बाबा को छेड़ोगे तो बाबा छोड़ेगा नहीं। बाबा का बयान और क्रांतिकारी सोच की लपट दिल्ली तक पहुंच गई। विवादों और बयानों के साथ चोली-दामन का साथ निभाने वाले कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह ने बाबा रामदेव को चुनौती देते हुए कहा कि बाबा को अपनी संपत्ति का ब्यौरा भी देना चाहिए। बाबा ने आव देखा ना ताव..तुरंत गरम तवे पर हथौड़ा मारते हुए अपनी संपत्ति के सारे कागज़ लेकर खडे़ हो गए। खुलासे में पता चला कि बाबा रामदेव ट्रस्ट यानि पचंजलि योगपीठ के पास अरबों रुपए की संपत्ति है। बाबा ने सफाई में कहा कि ये पैसा उनके भक्तों ने उन्हे दान में दिया है। लेकिन कांग्रेस बाबा के इस सफाई से कहां मानने वाली थी। दिग्विजय सिंह ने फिर अपने तीखे तीर चलाते हुए कहा कि बाबा को चंदा या दान लेते वक्त इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कहीं उन्हे दान में दिया जाने वाला पैसा काला धन तो नहीं। योगगुरू को दिग्गी राजा का ये बयान बिलकुल भी रास नहीं आया। बाबा ने पूरी कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा कि कांग्रेस चाहे तो उनकी संपत्ति की जांच भी करवा सकती है। महज़ 12 साल में योग के गुर सिखाते-सिखाते बाबा रामदेव की ख्याति सात समंदर पार कर चुकी है। बाबा के भक्त देश ही नहीं दुनिया के हर कोने में हैं। बाबा की यही प्रसिद्घि राजनीतिक दलों के पेशानी पर बल लाने के लिए काफी है। बाबा ने पहले ही ऐलान कर दिया है कि वो देश में फैले भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए राजनीति में उतरेंगे और अगला लोकसभा चुनाव भी लड़ेंगे। ज़ाहिर है बाबा की ख्याति राजनीतिक गलियारों में चिंता की सबब बन चुकी है। ऐसे में बाबा का काले धन पर बोलना आग में घी का काम कर रहा है। ट्यूनिशिया से लेकर लीबिया तक सत्ता के खिलाफ फैले आक्रोश को दुनिया देख रही है। इजिप्त और ट्यूनिशिया में हुआ क्रांतिकारी बदलाव एक सटीक उदाहरण है। ज़ाहिर है हिंदुस्तान की सत्ता की कुर्सी पर विराजे लोगों के अंदर भी खौफ है। कहीं बाबा अपने भक्तों के साथ सड़क पर ना उतर जाए। फिलहाल बाबा राजनीति में उतरने के लिए धोती कस चुके हैं। देखना होगा कि आने वाला समय बाबा के लिेए अच्छा साबित होता है या नहीं.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-8509809463823450707?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/8509809463823450707/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2011/02/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/8509809463823450707'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/8509809463823450707'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2011/02/blog-post.html' title='ये बाबा बोलता है...'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/-hlgLUo8YHL4/TWZyzE2TrRI/AAAAAAAAATQ/TKetLLkFKNs/s72-c/j_140_Black_Money_and_Swiss_Bank.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-3684543520007606985</id><published>2010-07-26T23:16:00.000-07:00</published><updated>2010-07-26T23:58:04.798-07:00</updated><title type='text'>इज्जत का सवाल है...</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/TE6DdHnYVGI/AAAAAAAAARM/VQ3SbeMuL2E/s1600/metro.jpg"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 231px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/TE6DdHnYVGI/AAAAAAAAARM/VQ3SbeMuL2E/s320/metro.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5498476731349619810" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/TE6DWkwaZSI/AAAAAAAAARE/FZc2g4ijJiw/s1600/airport.bmp"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 214px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/TE6DWkwaZSI/AAAAAAAAARE/FZc2g4ijJiw/s320/airport.bmp" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5498476618913047842" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/TE6CVyEFsHI/AAAAAAAAAQ8/YSbXBUps-Qw/s1600/2010+new+delhi+games+3.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 230px; height: 230px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/TE6CVyEFsHI/AAAAAAAAAQ8/YSbXBUps-Qw/s320/2010+new+delhi+games+3.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5498475505793740914" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;कॉमनवेल्थ गेम्स नज़दीक हैं। चारों ओर हल्ला है कि देश की इज्जत खतरे में है। देश की नाक कट जाएगी। सरकार ने पानी की तरह पैसा बर्बाद कर दिया। लेकिन कबतक इस शोर से हम सरकार को जगाने की कोशिश करेंगे। एक बार हमें भी तोसोचना होगा....मैं नोएडा से कनॉट प्लेस आ रहा था। यात्रा के दौरान मुझे एक साल पीछे की तस्वीरें दिखाई देने लगीं। उन तस्वीरों और आज की तस्वीरों में जो फर्क दिखा वो सकून देने वाला था। एक पल मैं ये सोचने को मजबूर हो गया कि मैं दिल्ली में ही हूं या कहीं और। जिन सड़कों पर गाड़ियों का काफिला लग जाता था आज वहीं गाड़ियों को इंतजार नहीं करना पड़ता। सिंगल लेन सड़क डबल लेन के बराबर हो गई है। फ्लाई ओवर ने रास्ता और आसान कर दिया। एक दूसरा फ्लाईओवर जो डबल लेन का है उसके खुलने के बाद ये रास्ता बेहद आसान हो जाएगा। चारों ओर हरियाली है। जितने पेड़ काटे गए उससे कहीं ज्यादा लगाए गए हैं। खेलगांव और अक्षरधाम मंदिर के पास से होती हुई सड़क पर अब ट्रैफिक नहीं लगता। इसी इलाके में खिलाड़ियों के लिए बनाए गए फ्लैटों की खूबसूरती देखते ही बनती है। यहां भी एक फ्लाईओवर बनाया गया है। यानि ट्रैफिक की समस्या यहां भी बस कुछ दिनों की बात है। अब आइए इंद्रप्रस्थ पार्क के पास...तस्वीरें यहां भी आपको खुश कर देंगी। चौड़ी होती सड़कें और खूबसूरत पार्क देखने लायक है। इसी तरह दिल्ली की तमाम सड़कों को देखिए कहीं सड़के चौड़ी हो रही हैं तो कहीं फ्लाईओवर बन रहे हैं। आखिर ये किसके लिए हैं ?  मैं ये नहीं कहता कि सरकार जनताका भला सोच रही है...जाहिर है जितना पैसा खर्च हमारे भले के लिए किया गया है उसके आंकड़ों में हेरा-फेरी की गई है। कई बाबुओं की तिजोरी भर चुकी है खेलों के नाम पर। खेल सर पर हैं और हम दिल्ली की एक अलग ही तस्वीर दुनिया को दिखा रहे हैं। सब कहते हैं कि देश की नाक कटने वाली है....मैं बचपन से एक कहावत सुनता हूं...फर्स्ट इंप्रेशन इज़ लास्टइंप्रेशन....। मतलब भी सुनिए। खिलाड़ी और हमारे विदेशी मेहमान जब सरज़मीन-ए-हिंदुस्तान पर कदम रखेंगे तो उनकी आंखों के सामने होगा दिल्ली का टी-3 टर्मिनल। इस एयरपोर्ट के बारे में मीडिया के जरिए सारा देश जानता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस एयरपोर्ट पर उतरते ही उन्हे भारत की शान का अंदाज़ा होगा। एयरपोर्टसे निकलते ही उन्हे मिलेगी एयरपोर्ट लाइन मेट्रो। हवा की रफ्तार से हमारे मेहमान दिल्ली के दिल पर दस्तक देंगे। कनॉट प्लेस की खूबसूरती उन्हे दिल्ली का दीवाना बना देगी। जाहिर है पहली तस्वीर उनके जेहन में उतर जाएगी। तो शिकायत का मौका नहीं मिलेगा। खेलों के दौरान कमर्शियल गाड़ियों,ब्लूलाइन बसों को हटा दिया जाएगा। यानि सड़कों पर से 30 फीसदी ट्रैफिक कम हो जाएगा। सरकार दिल्ली की जनता से आग्रह करेगा कि खेलों के दौरान निजी वाहनों का इस्तेमाल कम से कम करें। दिल्ली की जनता भी देश की इज्जत की खातिर थोडी कुर्बानी देकर मेट्रो से सफर करेगी। स्कूल, कॉलेज और सरकारी दफ्तर बंद रहेंगे। यानि ट्रैफिक की समस्या हमारे मेहमानों के सामने नहीं आएगी। एक न्यूज़ चैनल पर पूर्व खेल मंत्री मणिशंकर अय्यर ने कहा था कि वो नहीं चाहते कि कॉमनवेल्थ थेल सफल हों। अय्यरसाहब से कोई पूछे कि कल को आप उनके देश क्या नहीं जाएंगेजो आपके दरवाजे पर आने वाले हैं। आप ना भी जाएं लेकिन आपको कोई हक नहीं कि आप देश की इज्जत का फैसला करें। हमें भी उनके देश जाना है। मीडिया पर लगातार दिखाया जा रहा है कि तैयारियां पूरी नहीं हुई हैं। मैं भी जानता हूं कि तैयारियां पूरी नहीं हुई हैं। लेकिन मैं वो तस्वीर भी देखना चाहता हूं जिसमें दिल्ली का वो चेहरा भी दिखाई दे जिसमें विकास की तस्वीर दिखती है।वो सड़कें देखना चाहता हूं चोडबल लेन के बराबर हो चुकी हैं और जिन सड़कों के बीच पौधे लगाकर हरा-भरा करने की कोशिश की गई। रामकृष्ण आश्रम मेट्रो से होकर पहाड़गंज की ओर जाइए...यकीन मानिए तस्वीर बिलकुल अलग है। हरियाली के साथ सड़कों के किनारे लटकने वाले जानलेवा बिजली के तार अब आपको नज़र नहीं आएंगे। सीवर सिस्टम बेहतर हो चुका है। लाने पक्के और सीमेंटेड हैं। सड़कों पर मलबा पड़ा है, मैंने भी देखा है। लेकिन सड़कों पर लगे बिजली के नए खंबे भी मैंने देखे हैं। बिजली की कमी के बावजूद भी दिल्ली में बिजली की कटौती ज्यादा नहीं हुई। अमूमन चारों ओर यही हाल है। खेल मंत्री गिल ने एक बार कहा था कि तैयारियों के बारे में मीडिया सवाल ना उठाए क्योंकि हमारे देश में बारात आने तक लड़की के घर में तैयारी होती है।ये बयान एक मंत्री के लिए शर्मनाक है लेकिन हम सब जानते हैं कि येसच भी है। मैं सरकार की भाषा नहीं बोल रहा हूं। लेकिन अपने देश की इज्जत की चिंता मुझे भी है। कई खिलाड़ी और मेहमान देश में आ चुके हैं। मीडिया में तैयारियों पर सवाल लगातार उठ रहे हैं। इन सवालों पर नज़र उनकी भी पड़ रही है। जाहिर है दिल्ली का एक ऐसा चेहरा वो देख रहे हैं जो उन्हे नहीं देखना चाहिए। आखिर अपने घर की बात है, किसी और को क्यों बताएं। खेलों के बाद हर घोटाले का हिसाब लिया जा सकता है। किसने कहां कितना पैसा खाया इसबात की पड़ताल की जा सकती है। लेकिन फिलहाल वक्त है हमारे मेहमानों को 'फीलगुड' कराने का। क्योंकि दिल्ली बदल रही है। सरकार को हम बदल सकते हैं लेकिन सरकारी बाबुओं को नहीं। इसलिए उन्हे सबक जरूर सिखाया जाए..लेकिन देश की इज्जत बचाने के बाद।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-3684543520007606985?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/3684543520007606985/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/07/blog-post_26.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/3684543520007606985'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/3684543520007606985'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/07/blog-post_26.html' title='इज्जत का सवाल है...'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/TE6DdHnYVGI/AAAAAAAAARM/VQ3SbeMuL2E/s72-c/metro.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-3759331864320050106</id><published>2010-07-24T21:03:00.000-07:00</published><updated>2010-07-26T23:14:49.851-07:00</updated><title type='text'>सलेम पर हमला !</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/TEu_6msOohI/AAAAAAAAAQ0/8c_f6cI1jv8/s1600/mumbai-police-logo11111.jpg"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 310px; height: 240px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/TEu_6msOohI/AAAAAAAAAQ0/8c_f6cI1jv8/s320/mumbai-police-logo11111.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5497698783675195922" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/TEu_1MljRhI/AAAAAAAAAQs/x4h-VVJsOTM/s1600/dawood.gif"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 320px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/TEu_1MljRhI/AAAAAAAAAQs/x4h-VVJsOTM/s320/dawood.gif" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5497698690768520722" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/TEu_cF63-wI/AAAAAAAAAQk/HosFz1J_ZGk/s1600/040510104155abusalemcourt_320.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 220px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/TEu_cF63-wI/AAAAAAAAAQk/HosFz1J_ZGk/s320/040510104155abusalemcourt_320.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5497698259482180354" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;मुंबई....अंडरवर्ल्ड का सेंट्रल प्वाइंट है। ये शहर कई गैंगस्टरों को पैदा करता है। यहां किसी एक की सत्ता नहीं चलती। लेकिन शहर पर हक हर कोई जताता है। जिसके पास जितने आदमी उता ही शहर उसका। जिसके पास जितनी पुलिस उतनी ही पकड़ मजबूत....यही है मुंबई अंडरवर्ल्ड का सच। खबर आपने सुनी होगी। मुंबई की आर्थर रोड जेल में फिर गैंगवार हुई। जेल में बंद 93 में हुए धमाकों के आरोपी अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम पर जानलेवा हमला हुआ। कहा जा रहा है कि सलेम पर ये हमला दाऊद इब्राहिम के गुर्गे मुस्तफा मंजू उर्फ मुस्तफा दौसा ने करवाया है। दौसा भी इसी जेल में बंद है। दौसा और उसके आदमियों ने सलेम पर धारदार हथियार से हमला किया। जांच में पता चला कि हमला कैदियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली चम्मच से हुआ। आर्थररोड जेल प्रशासन के लिए इस तरह की खबर नहीं है। इससे पहले भी जेल में राजन के खास गर्गे डीके राव पर हमला हो चुका है। हमले के बाद राव को अंडासेल में भेज दिया गया। अंडासेल में रहकर भी राव ने अपने विरोधियों से बदला लिया। राव के लोगों ने दाउद के कई गुर्गों पर हमला करवाया। इन हमलों में एक खास तरह के हथियार का इस्तेमाल किया गया। जेल के कैदी एल्यमिनियम की जिस प्लेट में खाना खाते हैं उसी प्लेट के किनारे वाले हिस्से को जेल के अंदर पत्थरों पर घिसकर उसे नुकीला बनाते हैं। और इसी हथियार से जेल के अंदर होता है गैगवार। जेल के अधिकारियों को इस खास हथियार के बारे में पता है। 1995 के बाद से इस जेल में लगभग हर साल गैंगवार होते रहे। हर बार हमले का तरीका एक ही रहा। लेकिन अब तक प्रशासन ने कोई खास कदम नहीं उठाए। &lt;br /&gt;                                     मुंबई अच्छी तरह जानती है कि अंडरवर्ल्ड के तार मुंबई पुलिस से जुड़े हैं। जेल में दाउद के गुर्गों को हर वो चीज़ मुहैया है जो उन्हे बाहर मिल सकती है। अच्छा खाना, अच्छा बिस्तर, केबल टीवी और वो सबकछ जिसकी जरूरत उन्हे है। बदल में उन पुलिसवालों को दुबई से तनख्वाह मिलती है। सलेम किसी ज़माने में दाउद के साथ डी कंपनी चलाता था। मनमुटाव हुआ और दाउद का दामन सलेम ने छोड़ दिया। तब तक छोटा राजन उर्फ दीपक निकालजे &lt;br /&gt;दाउद के साथ था। सलेम को दाउद के तमाम धंधों की जानकारी थी। सलेम का साथ छोड़ना दाउद को रास नहीं आया। कहा तो ये भी जाता है कि सलेम को गिरफ्तार करवाने के लिए दाउद ने भी काफी हाथपैर मारे थे। पुर्तगाल में दाउद का ड्रग्स का कारोबार है। जाहिर है पुर्तगाल सरकार और पुलिस में उसकी अच्छी पैठ है। इंटरपोल का नोटिस पहले ही सलेम के खिलाफ था। भारतीय इंटेलीजेंस ने जब सलेम के प्रत्यर्पण की बात पुर्तगाल सरकार से की तो दाउद ने भी सलेम की गिरफ्तारी के लिए प्रयास किए। सलेम मुंबई पुलिस के पास आ गया। लेकिन दाउद को अब ये डर है कि कहीं सलेम के सीने में दफन वो राज जो दाउद के कारोबार पर असर डाल सकता है, कहीं मुंबई पुलिस को पता  चल जाए। पुलिस में दाउद के कई लोग हैं। इनकी मदद से दाउद सलेम को लगातार परेशान करवाता रहा। सलेम की जान को शरू से ही खतरा था। और इस बार तो उसपर बाकायदा हमला हो भी गया। यानि जेल के अंदर हो या बाहर अंडरवर्ल्ड हर जगह हावी है। भाई के लोग आपको देख रहे हैं....&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-3759331864320050106?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/3759331864320050106/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/07/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/3759331864320050106'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/3759331864320050106'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/07/blog-post.html' title='सलेम पर हमला !'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/TEu_6msOohI/AAAAAAAAAQ0/8c_f6cI1jv8/s72-c/mumbai-police-logo11111.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-1465036502907266416</id><published>2010-03-29T23:39:00.000-07:00</published><updated>2010-03-30T00:12:19.447-07:00</updated><title type='text'>सानिया, सोहराब और शोएब...</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S7GkATqZzKI/AAAAAAAAAQc/t3xxrvdNPQ0/s1600/san1.jpg"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 242px; height: 320px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S7GkATqZzKI/AAAAAAAAAQc/t3xxrvdNPQ0/s320/san1.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5454320948907461794" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S7Gj7PyZr-I/AAAAAAAAAQU/24iJ8EZGUao/s1600/smalikspo1-1_1234253703.jpg"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 195px; height: 200px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S7Gj7PyZr-I/AAAAAAAAAQU/24iJ8EZGUao/s200/smalikspo1-1_1234253703.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5454320861967921122" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S7Gj1vAWQUI/AAAAAAAAAQM/w9RZUxISsbg/s1600/sania_mirza_SPE_20060109.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 221px; height: 320px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S7Gj1vAWQUI/AAAAAAAAAQM/w9RZUxISsbg/s320/sania_mirza_SPE_20060109.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5454320767268700482" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;मेरे प्यारे भाईलोग और सिर्फ भाईलोग...आज मैंने टीवी पर एक हटके खबरे देखेला है। बोले तो देखा है। खबर देखतेइच अपुन का दिमाग खराब हो गया। मैंने क्या देखा कि सीरे टीवी चैनल चीख-चीख कर कह रहे थे कि सानिया मिर्जा शादी कर रहेली है। भाईलोग मेरेको अभी भी याद है कुछ महीने पहले इच सानिया ने अपने मंगेतर सोहराब मिर्जा से रिश्ता तोड़ा था। अभी सोहराब का जख्म भी नहीं भरा होगा कि सानिया नए जोड़े के साथ शादी के कोर्ट में कूद गएली है। बोले तो शादी कप में शानिया का डबल्स अवार्ड। अपुन के कान में सुनने को आया है कि सानिया मिर्जा के साथ जिंदगी का गेम खेलने वाला नया प्लेयर है पाक क्रिकेटर शोएब मलिका। भिड़ू लोग शोएब क्रिकेट कमाल का खेलता है। अभी सानिया के साथ ये उसका कौन सा गेम है मेरेको भी समझ में नहीं आ रहेला है। ये न्यूज के बाद सिर्फ मेराइच नहीं बल्कि इंडिय़ा और पाकिस्तान में भी काफी लोगों का दिल टूट गएला है। बेचारा दिल सानिया की मिनी स्कर्ट और उसकी नोज़रिंग पर मरता था। अभी सोहराब की जगह शोएब कैसे आ गया मै वहीच जबाव खोज रहेला हूं। तो एक अखबार में मेरे को जवाब मिला। अभी भिड़ू लोग तुम लोग सोचेगा कि मैं अखबार पढ़ता भी हूं क्या। तो भाईलोग मैं बतादूं मेरे को पढ़ना अच्छा लगता है। अभी क्या है हर किसी को पढ़ना लिखना मांगता है। तो मेरे को भी पड़ना मांगता है सोचके मैं भी अखबार पढ़ना शुरू किया। तो मैंने क्या पढ़ा कि  &lt;br /&gt;जनवरी में सोहराब से सानिया की सगाई टूटी और फिर सानिया फरवरी में दुबई में एक टूर्नामेंट में खेलने के वास्ते गई। &lt;br /&gt;इधर शोएब मलिक की पाक क्रिकेट ने वाट लगा दी थी। आपको मालूम इच होगा कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने ऑस्ट्रेलिया दौरे में पिटने के बाद शोएब पर एक साल का बैन लगा दिया है। तो वाट लगने के बाद शोएब भी दुबई चला गया। शोएब का कुबई में भी एक घर है। तो भिड़ू उधरीच रहने को चला गया। इधर जब सानिया टेनिस खेल रही थीं तभी शोएब की मुलाकात सानिया से हुई। अभी दोनों के बीच कुछ-कुछ हुआ। बोले तो दोनों की दो-दो आंखें मिलकर चार होने लगीं। अभी आप लोग भी किसी ना किसी से लव तो कियाइच होंगा। अपुन ये नहीं पूछ रहेला है कि वो सच्चा था या फिर टाइमपास। बोले तो लव क्या है ये अभी केजी के बच्चे को भी पता है। तो वहीं हुआ इन दोनों खिलाड़ियों के बीतच में। बोलेतो लव एट फर्स्ट साइट....&lt;br /&gt;               इधर सानिया अपने सोहराब को छोड़कर आई थी तो उधर गेम में वाट लगने से सोएब भी काफी टेंशन में था। अभी ऐसे माहौल में दोनों की मुलाकात दवाई बनने लगी। जास्ती मजा लेने का नहीं...उधर शोएब का भी दिल कुछृ-कुछ टूटेला टाइप का ही था। शोएब मलिका का टक्कर मिस इंडिया और ऐक्ट्रेस सयाली भगत से भी था। उसके बाद उसका टांका भिड़ा हैदराबाद की आयशा सिद्दकी के साथ। पन कुछ हुआ नहीं उलटे सोएब टेंशन में आ गया। अभी हैदराबाद से शोएब का क्या लफड़ा है अपने को भी समझ में नहीं आता। हैदराबाद की सनसनी सानिया पर शोएब का दिल आ गया। इधर दुबई में दोनों के दिल बीच में लफड़ा चलने लगा। इतना ही नहीं इस कपल ने अक्खे दुबई का टूर किया। और जभी दोनों को लगा कि अभी सिंगल खेलने की बजाए कपल्स खेलना चाहिए तो घर वालों के सामने इन दोनों ने प्रपोजल रख दिया। अभी मियां-बीवी राजी तो क्या करेगा काजी वाली कहावात ओ आपने सुनीच होगी। बेटे की खातिर शोएब की मां हैदराबाद आई और सानिया की मां से बातचीत की। अभी बात बनगएली होगी इसीलिए दोनों अप्रैल में शादी कर रहेले हैं। अभी मेरेको तो नहीं बुलाया पन भिड़ू अगर कोई भी शादी में गया तो प्लीज़ मेरेको भी बताने का कि उधर क्या हुआ। अभी क्या है मैं भी सानिया का फैन रहेला हूं लेकिन सानिया अपने इस फैन को तो बुलाएगी नहीं। सुना है 7 अप्रैल को शोएब अपना फुलटू फैमिली के साथ इंडिया आ रहेला है। हैदराबाद में दोनों की शागी होगी और पाकिस्तान में दावत।  &lt;br /&gt;                                अभी सानिया शादी के बाद टेनिस खेलेगी क्या नहीं ये मेरे को नहीं मालूम। क्या है कि सोहराब ने भी सानिया को बोला था शादी के बाद खेलना है कि नहीं तुम खुदीच डिसाइड करो। ठीक यही बाद शोएब ने भी सानिया को बोलेला है। पन आगे क्या होएंगा ये दोनों को भी मालूम नहीं है। इधर सानिया चाहती है कि लंदन ओलंपिक में खेले। दो भाई लोग सानिया-शोएब को मेरी ओर से all the best.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-1465036502907266416?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/1465036502907266416/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/03/blog-post_29.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/1465036502907266416'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/1465036502907266416'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/03/blog-post_29.html' title='सानिया, सोहराब और शोएब...'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S7GkATqZzKI/AAAAAAAAAQc/t3xxrvdNPQ0/s72-c/san1.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-6288882538224016654</id><published>2010-03-26T01:58:00.000-07:00</published><updated>2010-03-26T02:32:28.968-07:00</updated><title type='text'>महानायक पर महाभारत !</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S6x_I9B3RtI/AAAAAAAAAQE/yt8HAXA_E2M/s1600/sea.bmp"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 200px; height: 150px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S6x_I9B3RtI/AAAAAAAAAQE/yt8HAXA_E2M/s200/sea.bmp" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5452873040636888786" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S6x_CaDjkjI/AAAAAAAAAP8/cXPAOqa8AFA/s1600/amitabh.jpg"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 256px; height: 320px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S6x_CaDjkjI/AAAAAAAAAP8/cXPAOqa8AFA/s320/amitabh.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5452872928169529906" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S6x-7-7iypI/AAAAAAAAAP0/nJG8R7TFhKU/s1600/Mumbai.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 166px; height: 200px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S6x-7-7iypI/AAAAAAAAAP0/nJG8R7TFhKU/s200/Mumbai.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5452872817808951954" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;हमने इस शख्सियत को सदी का महानायक घोषित किया है। सदी का सबसे बड़ा सितारा है ये। बॉलीवुड इसे शहंशाह मानता है। लेकिन कुछ मतलब परस्त इस शख्स से किनारा करने लगे हैं। माजरा समझने के लिए इतना ही मजमून काफी है। अमिताभ बच्चन के साथ जो कुछ भी हुआ और जो कुछ भी किया गया इसका जिम्मेदार कौन है ? मुंबई में अमिताभ बच्चन सी-लिंक के उद्घाटन में क्या गए हंगामा हो गया। हंगामा ऐसे जैसे आतंकियों ने पुल को उड़ा दिया हो। मुंबई से शुरू हुई हलचल ने दिल्ली को हिला दिया। यकीन ना आए तो कोई पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश से पूछे। अमिताभ को स-लिंक के उद्घाटन समारोह में शामिल होने के लिए न्यौता दिया गया या नहीं सवाल अब ये नहीं रहा। सवाल ये है कि आखिर अभिनय की दुनिया की सबसे बड़ी शख्सियत के साथ नामजोड़कर ओछी राजनीति क्यों ? अमिताभ के समारोह में शामिल होने से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को ऐतराज हुआ। अमिताभ को मंच पर जगह घेरे देखकर महाराष्ट्र प्रदेश के कुछ कांग्रेस नेताओं को तीर चुभने लगा। एक वजह ये भी हो सकती है कि समारोह में कांग्रेस का मुख्यमंत्री सदी के सबसे बड़े नायक के साथ खड़ा होने का सम्मान पा रहा था लेकिन छुटऊभैये नेताओं को ये गंवारा नहीं हो रहा था। इसलिए भी अमिताभ के आने का मुद्दा बड़ा बना दिया गया। मुद्दा इसलिए बना क्योंकि अमिताभ गुजरात के ब्रांड एंबेसडर हैं। अमिताभ पर आरोप है कि उनकी विचारधारा नरेंद्र मोदी से मेल खाती है। इसलिए क्योंकि उन्होने गुजरात का ब्रांड एंबेसडर बनान स्वीकार किया। इस बेतुके तर्क पर आप चाहें तो हंस भी सकते हैं। गुजरात की विकास दर अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर है। मोदी ने राज्ज में निवेश को बढ़ावा दिया। नौकरी और व्यवसाय की उपलब्धता के चलते गुजरात में पलायन अन्य राज्यों की अपेक्षा बेहद कम है। और शायद यही वजह है कि गुजरात में कांग्रेस को कभी भी सफलता नहीं मिली और आगे भविष्य में भी आसार नज़र नहीं आते। कांग्रेस इस तथ्य को भलीभांति महसूस करती है। राज्य में निवेश और बढ़े और उसकी अच्छी ब्रांडिंग हो इसलिए मोदी ने बिगबी को राज्य का ब्रांड एंबेसडर बनाया। तो आखिरकार इस मुद्दे को लेकर अमिताभ बच्चन ये सवाल क्यों पूछें कि &lt;strong&gt;मैंने क्या किया ?&lt;/strong&gt; आप गुजरात जाकर वहां के हालात देख सकते हैं। आम आदमी की कार लखटकिया नैनो का सपना पूरा गुजरात से हुआ। मोदी राजनीति जरूर करते हैं लेकिन अपने राज्य को विकास का तोहफा देने के बाद। शायद यही कांग्रेस की आंख में खटकता है। सवाल ये उठता है कि अगर कोई शख्स किसी राज्य विशेष को प्रमोट करता है तो क्या जरूरी है कि वो उस राज्य के नेतृत्व की विचाराधारा से भी समानता रखता हो ? जवाब ना भी हो सकता है लेकिन राजनीति में सिर्फ अपना फायदा देखा जाता है। और मुंबई में कांग्रेस ने यही किया। अमिताभ पर आरोप लगा दिया कि उनके विचार मोदी से मिलते हैं इसलिए उन्हे कांग्रेस के समारोह में नहीं आना चाहिए था। सवाल एक और, क्या कांग्रेस संविधान से ऊपर है जो ये निर्णय ले कि कौन सा शख्स किस जगह पर जाए ? जवाब आप दीजिए और सवाल कांग्रेस से पूछिए। मैं मोदी विचाराधारा से बिलकुल सहमत नहीं हूं। किसी धर्म विशेष के खिलाफ या पक्ष में नहीं हूं। लेकिन जो सच मुझे नज़र आता है उसे जाहिर करने से पीछे मैं नहीं हटूंगा। बिना गलती के अमिताभ बच्चन को सज़ा दी जा रही है। कांग्रेसी नेता अपनी गंदी राजनीति का कीचड़ अमिताभ के दामन पर डालकर मीडिया में ध्यान का केंद्र बनने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस वो दिन भूल गई जब नेहरू ने बिग के बड़े भाई अजिताभ बच्चन के लिए निजीतौर पर सेवाईं दी थीं। समारोहों में उनका खास ख्याल रखा जाता था। वहीं कांग्रेस आज बच्चन के नाम को दागदार कर रही है। महाराष्ट्र में एनसीपी के साथ कांग्रेस ने साझा सरकार बनाई है और उसी साथी पक्ष के नेता ने ही बच्चन को आमंत्रित किया था। स्टेज पर बच्चन के साथ बैठते समय मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण को दिक्कत नहीं हुई क्योंकि वो विरोधी पार्टी के चहेते के साथ बैठे थे। शायद ये बात उनके जेहन में भी नहीं थी लेकिन जैसे ही पार्टी के छुटभैयों ने आलाकमान से शिकायत की चव्हाण बिगबी के जन्मजात विरोधी की तरह बर्ताव करने लगे। इसके पहले भी टैक्सी ड्राइवरों के लाइसेंस के मामले में अशोक चव्हाण पर पलटने का आरोप लग चुका है। मुंबई में मची हलचल दिल्ली तक पहुंच गई। दिल्ली में पर्यावरण के मुद्दे पर आयोजित एक कार्यक्रम में पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश को आना था। इसी समारोह में अमिताभ बच्चन को भी बतौर मुख्य अतिथि बुलाया गया था। लेकिन बिगबी के साथ बैठने पर मचे कोहराम का नतीजा रमेश देख चुके थे इसलिए ऐन वक्त पर आने से कन्नी काट गए। लोगों को कहा कि तबीयत खराब है लेकिन उसी वक्त कहीं और रमेश साहब मीडिया से मुखातिब हो रहे थे। खैर जो कुछ भी हुआ उसमें गलती किसकी है कांग्रेस अभी भी इसी में लगी हुई है। जल्द ही महाराष्ट्र में एक और समारोह है जिसमें चव्हाण साहब के साथ अमिताभ बच्चन को भी बुलावा भेजा गया है। देखते हैं क्या करेंगे सीएम साहब ?&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-6288882538224016654?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/6288882538224016654/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/03/blog-post_26.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/6288882538224016654'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/6288882538224016654'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/03/blog-post_26.html' title='महानायक पर महाभारत !'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S6x_I9B3RtI/AAAAAAAAAQE/yt8HAXA_E2M/s72-c/sea.bmp' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-1887532259502419371</id><published>2010-03-22T23:02:00.000-07:00</published><updated>2010-03-22T23:43:51.566-07:00</updated><title type='text'>दिल्ली को लूट लिया !</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S6hgpcmmmdI/AAAAAAAAAPs/e84vhJNbHM4/s1600-h/stadium.bmp"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 270px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S6hgpcmmmdI/AAAAAAAAAPs/e84vhJNbHM4/s320/stadium.bmp" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5451713614100994514" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S6hgkf7bV6I/AAAAAAAAAPk/rFbtbFlYoOI/s1600-h/M_Id_108680_Commonwealth_Games.jpg"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 300px; height: 250px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S6hgkf7bV6I/AAAAAAAAAPk/rFbtbFlYoOI/s320/M_Id_108680_Commonwealth_Games.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5451713529094297506" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S6hggFgxkRI/AAAAAAAAAPc/5a_t_fEDcjw/s1600-h/20060407002610401.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 236px; height: 300px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S6hggFgxkRI/AAAAAAAAAPc/5a_t_fEDcjw/s320/20060407002610401.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5451713453283709202" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;कुछ ही महीनों में देश कॉमनवेल्थ खेलों की मेज़बानी करेगा। अगर इस दरम्यान आप दिल्ली आते हैं तो आपके लिए राजधानी बिलकुल नई होगी। जिन सड़कों पर धूल और गंदगी कभी आपने देखी होगी वो सड़कें आपको किसी और देश में होने का अहसास कराएंगी। सड़कों पर कदम-कदम पर बने फ्लाईओवर के चलते आप रास्ता भी भूल सकते हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी के लिए पिछले तीन सालों से दिल्ली में कई बदलाव किए जा रहे हैं। पूरे शहर को मेट्रो जैसे क्रांतिकारी परिवर्तन में ढालने के बाद नई-नई लो-फ्लोर बसें और सड़कों से किलर या फिर कहें जानलेवा ब्लू-लान बसों को हटाना एक अच्छी पहल माना जा सकता है। लेकिन खेलों के नाम पर अरबों रुपए भी स्वाहा किए गए हैं। आलम ये है कि दिल्ल सरकार का खजाना अब खाली हो चुका है। महज तीन साल पहले दिल्ली सरकार के पास 11,000 करोड़ रुपये का फंड था, लेकिन लुटी-पिटी दिल्ली के पास आज फंड के नाम पर बचे हैं केवल 200 करोड़ रुपये। खबरों की मानें तो इस बार सरकार को 3 हजार करोड़ से भी ज्यादा का घाटा हुआ है। इतना ही नहीं दिल्ली को खूबसूरत बनाने के नाम पर राजधानी को 27 हजार करोड़ रुपए का कर्ज भी झेलना पड़ रहा है। क्या कोई शीला दीक्षित और सरकारी महकमें के अधिकारियों से ये पूछेगा कि आखिर जनता के खून-पसीने की कमाई किसने डकार ली? आखिर कहां गया सरकारी खजाना? लेख लिखे जाने के दो दिन पहले ही दिल्ली में दूध के दाम 2 रुपए तक बढ़ गए। 1 लीटर दूध के लिए अब 30 रुपए तक देने पड़ रहे हैं। सब्जी, अनाज, फल हर चीज़ के दाम जेब पर भारी पड़ रहे हैं। लेकिन जो सरकारी बंगले में रहते हैं और सब्सिडी के अलावा ऊपर से भी खाते हैं उनके लिए इसकी चिंता करना ज़रूरी नहीं है। जनता पर पड़ते बोझ से कहीं सरकार की कुर्सी ना हिलने लगे इसलिए सरकार परेशान ज़रूर है। मीडिया के सवालों का जवाब देने से अधिकारी और नेता दोनों ही बच रहे हैं। दिल्ली पर हाथ का कब्जा है, इसलिए पैसा पानी की तरह यमुना में बहा दिया गया। काम कितना हुआ इसकी सुध लेने के नाम पर भी पैसा बहाया गया। परवाह किसी को नहीं थी। दिल्ली सरकार के बजट में खर्चों की भारी लिस्ट है। वजीराबाद एक इलाका है दिल्ली में। सरकार यहां एक सिग्नेचर ब्रिज बनाना चाहती है। खर्चा आएगा लगभग 1200 करोड़ रुपए। हालांकि इस ब्रिज के लिए केंद्र सरकार भी मदद आर्थिक मदद करेगा। बावजूद इसके दिल्ली सरकार को 700 करोड़ रुपए खर्च करने होंगे। इस पुल को दिल्ली की शान के नाम पर बनाया जा रहा है। सरकार की जेब खाली है लेकिन महज दिखावे के नाम पर करोड़ों रुपए स्वाहा करने की तैयारी की जा चुकी है। इस पुल से दिल्ली के लोगों का भला तो होने से रहा लेकिन नेताओं और अफसरों के वारे-न्यारे ज़रूर होंगे। और जब अपनी जेब भरती हो तो अधिकारियों और नेताओं के पास जनता की सुध लेने की सुध कहां? दिल्ली में ही गीता कॉलोनी के पास भी हाल ही में एक पुल बनाया गया है। इस पुल की कुल लागत लगभग 100 करोड़ रुपए रही। महज 100 करोड़ रुपए दिल्ली को एक ज़बरदस्त पुल का तोहफा मिला। पुल की लंबाई भी ज्यादा और 4 लेन हाइवे से भी ज्यादा जगह है इस पुल पर और खूबसूरती के क्या कहने। लेकिन इस पुल के खर्चे और आसानी से दिल्ली सरकार खुश नहीं है। आपको बतादें कि इस पुल की वजह से इलाके में ट्रैफिक नाममात्र रह गया  है। गीताकॉलोनी से दरियागंज सेकेंडों में पहुंचा जा सकता है। दिनभर अगर 10 हजार गाड़ियां इस रास्ते से गुजरें तो लाखों रुपए का पेट्रोल बच जाता है। लेकिन सरकार इसे महत्व नहीं देती। उन्हे तो सिग्नेचर ब्रिज ही चाहिए। भले ही दिल्ली पर कर्ज बढ़ता रहे। आखिर इन पांच सालों में उन्हे अपनी पीढ़ियों के लिए धन भी तो जमा करना है। मैंने अखबार में पढ़ा कि सरकार ने लालकिले के पीछे रिंग रोड बाइपास के लिए 655 करोड़ रुपये और बारापूला नाले पर बनने वाले रोड पर 550 करोड़ रुपये खर्च करने का मन बनाया है। हालांकि यहां इतने बड़े प्रोजक्ट की ज़रूरत नहीं है। और अगर है भी तो इसे खेलों के बाद भी बनाया जा सकता है। दिल्ली बदल रही है। रेडियो पर सरकार चीख-चीख कर कह रही है। ऐसा लगता है जैसे लोगों की आंखें नहीं है और वो बदलाव को देख नहीं सकते। खैर राजधानी में सड़कों के आसपास खूबसूरती के नाम पर 500 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। पूरी दिल्ली में करीब 280 करोड़ रुपये की लागत से स्ट्रीट लाइट के खंभे बदले गए हैं। ये खंबे थोड़े खूबसूरत लगते हैं, नए जो हैं। सरकार ने दलील दी है कि कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान पूरी दिल्ली में एक जैसे खंभे हों, लेकिन मजे की बात है कि जितने भी खंभे शहर में लगाए गए हैं, उनके डिजाइन एक जैसे नहीं हैं। ब्लू-लाइन से शबर को निजात दिलाना एक अच्छी पहल थी। लेकिन इसके लिए सरकार ने लो-फ्लोर के नाम पर लूट मचा दी। जो बसें सरकार 20 लाख रुपए में खरीद सकती थी उसे खरीदने के लिए 52 करोड़ रुपए खर्च किए गए। आखिर ये पैसा इन सफेदपोश चोरों के खून-पसीने का नहीं था। सरकार ने लो-फ्लोर बसों के लिए 2000 करोड़ रुपए बर्बाद कर दिए। करोड़ों रुपए की बचत से सरकार कई महीनों की किश्त दे सकती थी। लेकिन अगर ऐसा किया जाता तो करोड़ों रुपए अपनी जेब आने का रास्ता नहीं बनता। दिल्ली जलबोर्ड घाटे में हैं। लेकिन उसे रोकने के लिए सरकार के पास वक्त नहीं है। डीटीसी का घाटा कम करने के लिए दिल्ली की जनता पर बढ़े हुए किराए का बोझ डालव दिया गया। बावजूद इसके 500 करोड़ रुपए डीटीसी को देने पड़ रहे हैं। हर मर्ज की दवा होती है। लेकिन सरकार बीमारी को ठीक करने के बजाए हरकदम एक नया मर्ज इजाद करने में जुटी है। खेलों में कुछ महीने बचे हैं। शहर भर में निर्माण कार्य धड़ल्ले से हो रहे हैं। करोड़ों का खर्चा अरबों तक पहुंच गया है। खेलों में स्टेडियम में लगाई जाने वाली घास लाने के लिए अफसरान जनता का पैसा किस तरह खर्च किया इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि अफसर हर एक दौरे के लिए बिजनेस क्लास में बैठकर दिल्ली से कोलकाता का सफर करते रहे। एक बार घास लाने के बाद उसे तबतक इस्तेमाल में नहीं लाया गया जबतक कि वो सड़ नहीं गया। घायस जब सड़ गई तो अधिकारी फिर से दिल्ली-कोलकाता करते रहे। करोड़ों रुपए की घास बर्बाद करने के बाद फिर उसी क्रिया को दोहराया गया। लेकिन जिस घास को कोलकाता से करोड़ों रुपए देकर मंगाया जा रहा था वो दिल्ली में ही यमुना किनारे भारी मात्रा में मौजूद है ये देखने की जेहमत किसी ने नहीं उठाई। इनका मकसद था सरकारी खजाने को खाली करना। अब जब सरकारी कंगाल हो रही है तो नए-नए रास्ते निकाले जा रहे हैं कि कर्ज लेकर भी अपनी जेब भरी जाए। दिल्ली वालों, आप तैयार रहें क्य़ोंकि सरकारी खजाना आपके ही पैसों से भरा जाएगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-1887532259502419371?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/1887532259502419371/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/03/blog-post_22.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/1887532259502419371'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/1887532259502419371'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/03/blog-post_22.html' title='दिल्ली को लूट लिया !'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S6hgpcmmmdI/AAAAAAAAAPs/e84vhJNbHM4/s72-c/stadium.bmp' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-7026237043156008723</id><published>2010-03-21T23:03:00.000-07:00</published><updated>2010-03-22T00:23:07.398-07:00</updated><title type='text'>चलो इलाहाबाद चलें !</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S6cWVBdmIDI/AAAAAAAAAPU/b-wW6rjkd_Y/s1600-h/Allahabad+chowk.jpg"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 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src="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S6cV8A2OBSI/AAAAAAAAAPE/iDNQorF6BY8/s200/sangam-allahabad.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5451349994719020322" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;इलाहाबाद का नाम सुनते ही संगम नगरी का चेहरा सामने आ जाता है। जो लोग इस तीर्थ को देख चुके हैं उनकी यादें एक बार फिर ताजा हो जाएंगी। लेकिन जिन्होंने इस इस देवनगरी के दर्शन नहीं किए हैं उन्हे मैं इलाहाबाद का दर्शन कराउंगा। 26 साल तक मैंने केवल इस नगरी का नाम सुना था। कुछ ऐसा संयोग बना कि अब मैं अक्सर इलाहाबाद जाता रहता हूं। दिल्ली से प्रयागराज एक्पप्रेस में रात 9 बजकर 25 मिनट पर मैं चला। इसे वीआईपी ट्रेन कहते हैं और अगर कोई प्राकृतिक आपदा ना आए तो ट्रेन अक्सर वक्त पर य़ानि अगले दिन सुबह साढे 6 बजे आपको संगम नगरी पहुंचा देती है। तो साहेबान अगले दिन मैं भी वक्त पर इलाहाबाद पहुंच गया। स्टेशन से बाहर निकलते ही आपको अंदाज़ा हो जाएगा कि आप उत्तरप्रदेश में आ गए हैं। जनाब इलाहाबाद में मैं आपका स्वागत करता हूं। रेलवे स्टेशन से बाहर आइए। यहां आनेवाले ज्यादातर मुसाफिर संगम की ओर बढ़ते हैं। तो चलिए आपको भी संगम ले चलता हूं। हिंदुस्तान की ज्यादातर आबादी ये जानती है कि इलाहाबाद में संगम कहां है और इसका नाम संगम क्यों पड़ा। संक्षिप्त में आपको मैं भी बतादूं, इलाहाबाद में जिस जगह पतित पावनी गंगा, जीवन दायिनी यमुना और पवित्र सरस्वती आपस में मिलती हैं उसे संगम कहते हैं। रेलवे स्टेशन के बाहर तीन पहिए वाले ऑटोरिक्शा (विक्रम) वाले आपका स्वागत करेंगे। एक साथ वो आपपर झपटेंगे। अपने विवेक से काम लें और सही जगह देखकर विक्रम की सवारी का मजा लें। हां अपने सामान की जिम्मेदारी आपकी ही होगी ये बताने की जरूरत नहीं है। तो जनाब इलाहाबाद की गलियों से आप गुजरें। जर्जर होती पुरानी इमारतों के बीच से आप चल रहे हैं। सड़कें पतली हैं और गाड़ियों का काफिला दोनों ओर से गुजर रहा है। किस्मत अच्छी रही तो ज्यादा ट्रैफिक जाम नहीं मिलेगा। बाजार, गली, मोहल्ला पार करने के बाद आपको खुली सड़क भी मिलेगी। बीच-बीच में कई सारे छोटे-छोटे मंदिर भी मिलेंगे। लोगों ने अपने पसंदीदा देवताओं की श्रद्धा के हिसाब से मंदिर बना रखे हैं। चाहें तो रिक्शा में बैठे-बैठे ही सिर झुकाकर आस्था प्रकट कर लें। लोग अक्सर ऐसा करते हैं। हां अगर जोर-जोर से मंदिरों में लाउडस्पीकर पर फिल्मी धुनों पर भजन बज रहे हों तो परेशान ना हों। आस्था प्रकट करने का लोगों का अपना-अपना तरीका। मंदिरों के जमघट पार करने के बाद आप रूबरू होंगे पुराने पुल से। आप चाहें तो नए पुल से भी जा सकते हैं। लेकिन वहां से में आपको बाद में ले चलुंगा। तो साहब हम पहुंच गए पुराने पुल पर। अंग्रेजों के जमाने से चला आ रहा पुल हिलता जरूर है लेकिन अभी तक गिरा नहीं है। आए दिन सरकारी खर्चे पर इसकी मरम्मत भी होती है। मरम्मत के बहाने स्थाई ठेकेदार की दुकानदारी भी चल जाती है। पुल के ऊपर से ट्रेनें भी गुजरती हैं। अगर उसी दौरान नीचे से आप भी गुजर रहे होंगे तो शोर से आपको तकलीफ भी हो सकती है। बहरहाल अब पुल से अपने दोनों ओर देखिए। पुल के नीचे यमुना मैया आपको दर्शन देंगी। अगर वक्त सुबह का है सूरज की रोशनी के चलते आपको यमुना का पानी काला नहीं दिखाई देगा। हाथ जोड़कर उनसे माफी मांगिए कि हे यमुना मैया हम तुम्हारा पानी काला होने से नहीं बचा सकते, हमें माफ करो। ऑटो में बैठै-बैठे आप देख सकेंगे कि कैसे स्थाई लोगों के साथ बाहर के मुसाफिर भी अपने घर का बचा-खुचा सामान यमुना नदीं में प्रवाहित करके पुण्य प्राप्त करने का लाभ महसूस करते हैं। उन्हे ये मत कहिएगा कि आपने कचरा नदी में क्यों बहाया। वो आपसे नाराज़ हो सकते हैं। उन्हे लगता है कि उनके घर की गंदगी यमुना स्वीकार करेंगी और उन्हे यश का प्रसाद देंगी। अपने बाईं ओर थोड़ी दूर देखने की क्षमता अगर आप में होगी तो आप संगम भी देख सकेंगे। ध्यान देंगे तो आपको गंगा मैया की कराह भी सुनाई देगी जो अपने बेटों से कहती है कि मेरा दर्द सुनो। मुझे बचाओ, मेरा अस्तित्व खतरे में है। लेकिन हम हिंदुस्तानी हैं, दूसरों की दर्द की परवाह किए बगैर सतत आगे बढ़ते जाना हमारी आदत में शामिल है। किसी और की पीड़ा सुनने के लिए हमारे पास वक्त नहीं है। तो दर्द और मायूसी से बाहर निकलें। पुराना पुल पार हो चुका है। आगे बढ़ें,तो गुलाब के फूलों की मंडी से गुजरेंगे। खुशबू से आपको अच्छा महसूस होगा। थोड़ा और आगे आएंगे तो एक बड़ा चौराहा पड़ेगा। यहां से सीधा रास्ता आपको नैनी, बनारस और विंध्याचल की ओर ले जाएगा। बाईं सड़क आपको नए पुल से होते हुए वापस इलाहाबाद शहर की तरफ ले जाएगी। दाईं तरफ की सड़क पर ध्यान ना दें। वहां आपको सड़क किनारे कई ट्रक दिखाई देंगे। और ड्राइवरों से बातचीत करते पुलिस वाले। उनके बीच होनेवाले लेन-देन को बिलकुल ना देंखें। नहीं तो आप उन्हे घूसखोर कहेंगे। और अगर आपने ऐसा किया तो आपका सफर प्रभावित हो सकता है। इसलिए बिलकुल भारतीय बनकर आगे बढ़े। चलिए अब इसी चौराहे से संगम की ओर चला जाए। नए पुल पर आपका स्वागत है। देश में विदेशी तरीके से बना ये पुल आपको बेहद खूबसूरत लगेगा। इस पुल से आप नीचे यमुना का गंदा पानी भी देख सकेंगे। इक्का-दुक्का मछुआरे भी अपनी छोट-छोटी नाव में दिखाई देंगे। पुल पर बने बड़े-बड़े खंबे और खंबों से लगे लंबे-लंबे तार आपको किसी दूसरे देश में होने का अहसास कराएंगे। इस पुल पर अगर कुछ देर रुकने की इच्छा है तो उसे रिक्शावाले को व्यक्त ना करें। क्योंकि वो रुकेगा नहीं। हां अगर आप चाहें तो रिक्शा रोक लें और कुछ देर रुककर दूसरा रिक्शा लें। यहां कुछ तस्वीरें आप ले सकते हैं। आपनी यात्रा की यादगार के लिए। आब आगे चलिए...पुल पार करने के बाद सड़क के दाईं ओर बनी पतली सड़क पकड़ लें। ये रास्ता आपको संगम की ओर ले जाएगा। लगभग 2 किलोमीटर चलने के बाद आप पहुंचेंगे तीर्थराज प्रयाग नगरी के संगम पर। कथा में वर्णित तीन की बजाए आपको दिखेंगी केवल 2 नदियां और उनका संगम। नदी के किनारे आते समय अपने आस-पास की दुकानों को देखिए। यहां पूजा-पाठ से जुड़ा हर सामान आपको मिलेगा। थोड़ा और नीचे गए तो मचान के नीचे तख्ता लगाकर आपको साधू बाबा भी दिखेंगे। ये प्राणी यहां भारी मात्रा में पाए जाते हैं। आपकी इच्छा हो या ना हो ये आपको अपना चेला बना ही लेंगे। चलिए टीका लगवाइए और इन्हे दस-पांच रुपए देकर आगे बढ़िए। अब अपने जूते उतारकर पवित्र यमुना के ठंडे पानी में पैर डालिए। उस अहसास का वर्णन करना मेरे लिए भी कठिन है। अपने सामने थोड़ी दर पर देखिए जहां गंगा और यमुना का मिलन होता है। यहां नाव वाले भी मिलेंगे। किसी नाव में बैठिए, 10 रुपए दीजिए और संगम पर पहुंच जाइए। नाव पर बैठे-बैठे ही संगम की धारा को अपने हाथों से स्पर्श कीजिए। गंगा और यमुना की महानता आपको खुद-बखुद समझ में आ जाएगी। उस पवित्र धारा में 3 डुबकी लगाइए और प्राचीन कथाओं के अनुसार अपने पापों को धो लीजिए। शीतल जल में स्नान के बाद आप एक बार ये महसूस करेंगे कि इस धारा का जल सदैव निर्मल रहे इसके लिए आपभी कुछ प्रयास करेंगे। लेकिन नदी से बाहर आने के बाद आपकी याद्दाश्त कुछ कमजोर हो जाएगी। चिंता ना करें, इसका भी बंदोबस्त बाहर है। यहां कई बड़-बड़े सरकारी घड़े रखे हैं। और किनारे लगे बड़े-बड़े बैनरों पर लिखा है कि नदी में कचरा ना डालें। लेकिन इसकी परवाह किए बिना लोग गंगा-यमुना में कचरा डालकर पवित्र होने का मौका खोना नहीं चाहते। अब चाहे तो क्रोध कीजिए या फिर अफसोस कीजिए लेकिन लोगों को कुछ मत कहिए। बेवजह नाराज हो जाएंगे। नदी से बाहर ऊपर की तरफ आईए। सामने एक राजा का किला है। कभी लोग परिवार के साथ घूमने आते थे, आजकल शहर के रोमियो-जूलियट के लिए पनाहगार है किला। जिस ओर नहीं जाना उसका जिक्र क्या करना लेकिन फिर भी मन में कुछ और चल रहा है तो जाइए घूम आइए। वापस आकर संगम किनारे बने मंदिरों के दर्शन भी कर लें। यहां एक बजरंगबली का भी मंदिर है। सुना है कि ये मंदिर बरसात के समय एक बार पानी से जरूर भरता है। गंगा मैया हनुमानजी को अपना दर्शन देती हैं। यहां अपनी इच्छानुसार पूजा-प्रार्थना कीजिए। पंडित जी बाहर मिलेंगे ही..आप चाहें तो हवन वगैरह भी करवा सकते हैं। अब संगम से बाहर निकलें तो इलाहाबाद बाजार की ओर चलें। सबसे पहले चलते हैं चौक बाजार में। यहां आपको इलाहाबाद का हर रंग मिलेगा। चौक बाजार खाने-पीने की चीजों के लिए प्रसिद्ध है। बाजार के एक ओर चा वालों का कब्जा है दूसरी ओर मिठाई वालों का। यहां की चाट अगर आपने एक बार चख ली तो दिल्ली और बंबई वालों की चाट का जाएगा आपको दोबारा नहीं भाएगा। तरह-तरह के चाट मिलते है यहां। गोलगप्पों के साथ-दही वड़ा भी काफी मशहूर है। जी ललचाए और अगर रहा ना जाए तो किसी भी चाट की दुकानपर जाइए और टूट पड़िए। लेकिन चाट की दुकानपर जाकर टमाटर वाली चाट एक बार जरूर खाएं वो भी बिना मीठी चटनी के। चाट की कीमतें इतनी सस्ती हैं कि अगर 20 रुपए में आप हर तरह की चाट का जाएका ले सकते हैं। गोलगप्पे, आलूचाट, टिक्की और टमाटर चाट खाने के बाद भी 20 रुपए खर्च नहीं होंगे। कम कीमत में उम्दा जाएका लेने के बाद मोहन जाचा की लस्सी जरूर पीजिए। इनकी दुकान काफी प्रसिद्ध है। 2 तरह की मलाई के साथ खड़ी चम्मच वाली लस्सी मिलेगी यहां। खड़ी चम्मच से अर्थ है कि लस्सी इतनी गाढ़ी कि चम्मच डालने पर वह गिरेगा नहीं। लस्सी में केसर और गुलाबजल पड़के बाद इसका जाएका और भी बढ़ जाएगा। मोहन चाचा की लस्सी के बाद सामने की दुकानों पर आप लाल पेड़े का स्वाद लेना ना भूलें। इसका स्वाद आपको जिंदगी भर याद रहेगा। यहां एक और मिठाई भी प्रसिद्ध है। परवर वाली मिठाई। ये मिठाई आपने शायद ही खाई होगी। इसका जाएगा आपके लिए यादगार रहेगा। चाहें तो इसे पैक भी करा सकते हैं लेकिन ये ज्यादा दिन नहीं टिकता। परवर मिठाई पैक कराइए और अब जाएगा लीजिए दही जलेबी का, मजा आ जाएगा। अब इस बाजार से बाहर निकलकर आगे बढ़े। आगे मिलेगी बताशेवाली गली। सफेद-सफेद बताशे आपको गांवों के मेलों की याद दिलाएंगै। सिक्के के बराबर बताशे के साथ आपको पूड़ी के बराबर के बताशे भी आपको बताशामंडी में मिल जाएगा। साइकिलरिक्शों के जमघट और भीड़-भाड़ से बाहर निकलें। अब आगे चलते हैं सिविल लाइंस की ओर। इलाहाबाद के लोग यहां से कपड़ों की खरीददारी करते हैं। यहां बिगबाजार भी है। शहर आधुनिकीकरण की ओर बढ़ रहा है। यहां भी हनुमान जी का मंदिर है। दर्शन कीजिए और यहां मिलनेवाली मिठाईयों का भी जाएका लीजए। चाहें तो पास ही में एल्फ्रेड पार्क भी जा सकते हैं। शहीद चंद्रशेखर आजाद ने यहीं कुर्बानी दी थी। इन खास जगहों के दर्शन के बाद वापस रेलवे स्टेशन लौटें और वापस अपने घर की गाड़ी पकड़ें।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-7026237043156008723?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/7026237043156008723/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/03/blog-post_21.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/7026237043156008723'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/7026237043156008723'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/03/blog-post_21.html' title='चलो इलाहाबाद चलें !'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S6cWVBdmIDI/AAAAAAAAAPU/b-wW6rjkd_Y/s72-c/Allahabad+chowk.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-7865172695998260824</id><published>2010-03-09T19:00:00.000-08:00</published><updated>2010-03-13T17:30:57.908-08:00</updated><title type='text'>डॉन का पासवर्ड शूटरों के पास</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S5w8R9gu3LI/AAAAAAAAAO8/kPXp-osx3F4/s1600-h/cops.jpg"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 196px; height: 200px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S5w8R9gu3LI/AAAAAAAAAO8/kPXp-osx3F4/s200/cops.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5448295928478751922" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S5w8LGaxQqI/AAAAAAAAAO0/ONfwA_iIoT8/s1600-h/dawoodibrahim_promo313.jpg"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 313px; height: 234px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S5w8LGaxQqI/AAAAAAAAAO0/ONfwA_iIoT8/s320/dawoodibrahim_promo313.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5448295810610578082" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S5w8FG5OEVI/AAAAAAAAAOs/rlnpsIEFFtw/s1600-h/dawood_20081215.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 200px; height: 163px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S5w8FG5OEVI/AAAAAAAAAOs/rlnpsIEFFtw/s200/dawood_20081215.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5448295707659080018" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;कोई भी डॉन अपने सारे राज अभी तक कभी भी अपने शूटरों को नहीं बताता था, लेकिन ऐडवोकेट शाहिद आजमी की हत्या को अंजाम देने के लिए अंडरवर्ल्ड डॉन भरत नेपाली ने अपने शूटरों को अपना पासवर्ड तक बता रखा था। आजमी की 11 फरवरी को हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में पुलिस ने देवेंद्र जगताप, विनोद विचारे और पिंटू दगड़े नामक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जबकि हंसराज सोलंकी नामक चौथी आरोपी अभी तक फरार है। क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी के अनुसार जब थाईलैंड में बैठे भरत नेपाली ने शाहिद आजमी की हत्या का फैसला कर लिया, तो गुगल सर्च से शाहिद आजमी की फोटो निकालकर अपने ई-मेल पर पेस्ट कर दी। बाद में उसने वीओआईपी कनेक्शन के जरिए अपने मुख्य शूटर देवेंद्र जगताप और विनोद विचारे को फोन किया और दोनों को ही अपना पासवर्ड बता कर कहा कि वे उसके (भरत नेपाली) ई-मेल को ओपन कर शाहिद आजमी की फोटो गौर से देखें। इसी दौरान भरत नेपाली ने जगताप और विचारे को शाहिद आजमी के कुर्ला के घर का पूरा पता भी लिखा दिया और सलाह दी कि उसके घर और दफ्तर की फौरन रेकी करो। यही नहीं, दोनों को भरत नेपाली ने यह भी बताया कि वे शाहिद आजमी को किसी बहाने कोर्ट में जाकर भी गौर से देख लें, ताकि मर्डर के वक्त कोई भी गड़बड़ न हो। इसके बाद जगताप और विचारे अपने दो साथियों पिंटू दगड़े और हंसराज सोलंकी के साथ कई दिन तक शाहिद आजमी के घर और दफ्तर की रेकी करते रहे। जिस 11 फरवरी को दोनों ने शाहिद आजमी का मर्डर किया, उसके ठीक एक दिन पहले जगताप ने यह कहकर पवई के पीसीओ से आजमी को फोन लगाया कि मेरा भाई ठाणे जेल में बंद है, उसी सिलसिले में मुझे आपसे अरजेंट मिलना है। इस पर आजमी ने जगताप को अगले दिन शाम को दफ्तर आने को कहा। जगताप इसके बाद पिंटू और सोलंकी को लेकर अगले दिन शाम को आजमी के दफ्तर पहुंच गया और फिर तीनों ने कई राउंड गोलियां चलाकर आजमी का कत्ल कर दिया। अब तक आतंकवादी किसी साजिश के लिए एक ही पासवर्ड का इस्तेमाल करते थे, पर किसी अंडरवर्ल्ड सरगना द्वारा अपने शूटरों को अपना पासवर्ड बताने का शायद यह पहला मामला है। क्राइम बांच के एक अधिकारी के अनुसार कई साल पहले अरुण गवली को बॉलीवुड के शेट्टी नाम के एक डुप्लीकेट (डमी रोल करने वाला) का मर्डर करना था। उस डुप्लीकेट का फोटो गवली के पास था नहीं, इसलिए गवली अपने शूटर को बॉलीवुड की फिल्म दिखाने ले गया, जिसमें उस शेट्टी ने डुप्लीकेट का रोल किया था। पर फिल्म देखकर भी शूटर उस डुप्लीकेट को सही से पहचान नहीं पाया और गलती से उस डुप्लीकेट के हमशक्ल का कुछ दिन बाद मर्डर कर दिया। दरअसल अब अंडरवर्ल्ड पूरी तरह आतंकवादियों की तर्ज पर अपना काम कर रहा है, इसलिए सिर्फ पासवर्ड नहीं, 26/11 के बाद वीओआईपी कनेक्शन का इस्तेमाल भी अब अंडरर्वल्ड में आम हो गया है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-7865172695998260824?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/7865172695998260824/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/03/10-mar-2010-0658-hrs-ist-discuss-11-11.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/7865172695998260824'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/7865172695998260824'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/03/10-mar-2010-0658-hrs-ist-discuss-11-11.html' title='डॉन का पासवर्ड शूटरों के पास'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S5w8R9gu3LI/AAAAAAAAAO8/kPXp-osx3F4/s72-c/cops.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-6459302200414977899</id><published>2010-03-08T22:41:00.000-08:00</published><updated>2010-03-08T23:07:56.346-08:00</updated><title type='text'>बहुत चालाक है कांग्रेस !</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S5Xzv-du8TI/AAAAAAAAAOk/i9L4SxqJTeM/s1600-h/women+bill-1.jpg"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 230px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S5Xzv-du8TI/AAAAAAAAAOk/i9L4SxqJTeM/s320/women+bill-1.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5446527329921593650" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S5Xzpd_DfXI/AAAAAAAAAOc/whYweUDrdFg/s1600-h/congress.jpg"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 200px; height: 142px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S5Xzpd_DfXI/AAAAAAAAAOc/whYweUDrdFg/s200/congress.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5446527218123767154" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S5XzlO5AK4I/AAAAAAAAAOU/DfNXkAdkaKY/s1600-h/inflation1.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 236px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S5XzlO5AK4I/AAAAAAAAAOU/DfNXkAdkaKY/s320/inflation1.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5446527145352375170" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;साल 2010 का बजट कितनी खुशियां लाया, ये किसी मध्यवर्गीय परिवार से पूछिए। उस परिवार से जो 20हजार में अपनी सारी जरूरत पूरी कर लेता है। सरकार के टैक्स के साथ बच्चों की पढ़ाई, बहन-बेटी की शादी, पत्नी और माता-पिता की दवाई के साथ घर की जरूरतें, ये तमाम जरूरत वो परिवार महज 20 हजार रुपए मासिक आमदनी में पूरी कर लेता है। इस बजट से उसने जो उम्मीदें की वो टूट गई होंगी। घर में अगर गाडी है तो इस बजट के वार ने उसे घायल जरूर किया होगा। बजट में पेट्रोल-डीजल महंगा हो गया। नतीजा तमाम जरूरत की चीजों के दाम आसमान पर पहुंच गए। यूपीए सरकार ने आम जनता खून चूस-चूस कर अपनी जेबें भर लीं। सरकार के तमाम मंत्री देश-विदेश का जायजा लेते रहे। लेकिन महंगाई के बोझ तले जनता की सुध लेने की किसी ने नहीं सोची। सरकार को जगाने के लिए देश की दूसरी राजनीतिक पार्टियां एकजुट होने लगीं। हालांकि इनका मकसद देश के साथ हमदर्दी नहीं बल्कि जनता की तकलीफों की लौ में अपनी रोटियां सेंकना था। तो जनाब देश की दूसरी पार्टियां सरकार के खिलाफ लामबंद होने लगीं। सरकार को डर सताने लगा। मामला इसके पहले गंभीर हो जाए, कांग्रेस ने फूट डाले राज करो की नीति अपनाई। नतीजा &lt;strong&gt;महिला आरक्षण बिल &lt;/strong&gt; का सामने आना। सन 96 में जिस विधेयक को लेकर सरकार घिरी थी, उसी विधेयक के जिन्न को यूपीए ने अपने फायदे के लिए फिर जगाया। महिला आरक्षण बिल को संसद के इसी सत्र में पास कराने की कवायद शुरू हो गई। महंगाई पर सरकार को घरने के लिए पूरी ताकत लगाने वाला विपक्ष महिला आरक्षण बिल के वार से चकनाचूर हो गया। पार्टियों की एकता गर्त मे चली गई। पने ही परा होने लगे। महिलाओं के खिलाफ बोलकर कोई भी पार्टी अपना वोटबैंक खत्म करने का रिस्क नहीं लेना चाहती थी। इसलिए बीजेपी और लेफ्ट ने बिल का समर्थन कर दिया। लेकिन कई क्षेत्रीय पार्टियों में बगावत के सुर उठने लगे। जेडीयू में भी दरार पड़ी। तो समाजवादी पार्टी भी बिल के खिलाफ हो गई। इन पार्टियों की मजबूरी ये है कि अगर महिला आरक्षण बिल पास हो जाता है तो इनके पास महिला चेहरे ऐसे नहीं हैं जिसे सामने रहकर ये वोट हथिया सकें। जाहिर है इनके अस्तित्व पर खतरा हो सकता है। इसके उलट लेफ्ट और बीजेपी के पास ऐसे चेहरे हैं जिसे वो कैश करा सकते हैं। लेकिन कामयाबी पर सवाल अभी भी है। लेकिन आरक्षण बिल का निवाल ना ही ये पार्टियां निगल सकती हैं और ना ही उगल सकती हैं। इसलिए नाराजगी झेलने से अच्छा है कि बिल के समर्थन में आ जाएं। इस बिल का प्रस्ताव रखते ही विपक्ष समेत सारे देश का ध्यान महंगाई से हट चुका है। देश के विकास का दम भरने वाली कांग्रेस देश को खोखला होने से बचाने के बजाए अब अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत कर रही है। हम किसी के उद्देश्य के खिलाफ नहीं हैं। लोकतंत्र में कोई भी अगुवाई कर सकता है। लेकिन पहले अपना फर्ज तो पूरा करे। महंगाई दर गिरती रही लेकिन कीमतों ने आसमान से नीचे उतरने का नाम ही नहीं लिया। कृषि मंत्री शरद पवार कहते हैं कि रबी की फसल आने के बाद महंगाई कम होगी। चीनी के दाम भगवान पर छोड़कर शरद पवार भी निश्चिंत हैं। आखिर उन्हे तो 9 घंटे की नौकरी के बाद महीने की तनख्वाह पर गुजारा तो नहीं करना है। आम आदमी पिसता है तो पिसे। उन्हे क्या ? भगवान ने चाहा तो रबी की फसल जल्द ही बाजार में आ जाएगी। लेकिन इस बात का यकीन कौन दिलाएगा कि बिचौलिए और दलाल इस फसल में सेंध नहीं लगाएंगे। आखिर सरकार ने महंगाई के लिए इन्हीं दीमकों को जिम्मेदार ठहराया था। जब महंगाई पर सारा देश अपना सुर एक कर रहा था तो कांग्रेस ने नया शिगूफा छेड़कर सबका ध्यान दूसरी ओर कर दिया। आम जनता के दुख को समझने का दम भरने वाले नेताओं के सुर भी बदल गए। अब महंगाई की लड़ाई कौन लड़ेगा। आम जनता की आवाज सरकार तक नहीं पहुंचेगी, इतना तो देश जानता ही है। इसलिए अब ये आवाज राख के नीचे दब गई है। लेकिन सरकार ये ना भूले कि चिंगारी पर सिर्फ राख पड़ी है। आग तो अंदर बाकी है...&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-6459302200414977899?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/6459302200414977899/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/03/blog-post_2221.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/6459302200414977899'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/6459302200414977899'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/03/blog-post_2221.html' title='बहुत चालाक है कांग्रेस !'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S5Xzv-du8TI/AAAAAAAAAOk/i9L4SxqJTeM/s72-c/women+bill-1.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-4219834000208205786</id><published>2010-03-08T22:30:00.000-08:00</published><updated>2010-03-08T22:35:49.609-08:00</updated><title type='text'>कलयुग में राम राज !</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S5XsO78x-kI/AAAAAAAAAOM/bUMqAK3O3lY/s1600-h/ragunath_temple.jpg"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 200px; height: 150px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S5XsO78x-kI/AAAAAAAAAOM/bUMqAK3O3lY/s200/ragunath_temple.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5446519065729432130" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S5XsI5Mdb9I/AAAAAAAAAOE/PsKt3euKCG4/s1600-h/lord_rama1.jpg"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 240px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S5XsI5Mdb9I/AAAAAAAAAOE/PsKt3euKCG4/s320/lord_rama1.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5446518961910673362" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S5XsEGvNUxI/AAAAAAAAAN8/jQ696aZjo7M/s1600-h/120623-bigthumbnail.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 200px; height: 150px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S5XsEGvNUxI/AAAAAAAAAN8/jQ696aZjo7M/s200/120623-bigthumbnail.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5446518879646733074" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;कलयुग में राम राज! सुनकर थोड़ा अजीब लगता है,पर ये सच है। राजा हरदौल की पवित्र नगरी बुंदेलखंड के ओरछा में अब भी 'राम राज' कायम है। यहां लोग मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की पूजा राजा के रूप में करते हैं। यही नहीं मध्य प्रदेश की पुलिस चारों पहर की आरती में भगवान श्रीराम को 'गार्ड ऑफ ऑनर' देती है। बुंदेलखंड के टीकमगढ़ जिले में राजा हरदौल की पवित्र नगरी ओरछा है। कहा जाता है कि यहां कभी बुंदेला राजा जुझार सिंह ने अपने सेनापति पहार सिंह के बहकावे में आकर अपने ब्रह्माचारी भाई राजा हरदौल को भोजन में जहर खिलाकर मरवा दिया था। किवदंती के मुताबिक राजा हरदौल अमर हो गए थे। इस नगरी में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम को राजा की पदवी दिए जाने के पीछे एक लोककथा प्रचलित है। झांसी की उर्मिला पटेल बताती हैं कि मान्यता के अनुसार संवत् 1600 में बुंदेला महाराजा माकुर शाह की पत्नी महारानी कुंअरि, गणेश और राम की प्रतिमा अयोध्या से ओरछा लाई थीं। उस वक्त राम ने शर्त रखी थी कि ओरछा में राजतंत्र नहीं बल्कि उन्हीं की सत्ता होगी। शर्त मानकर महाराजा माकुर ने ओरछा राज्य में 'राम के राज' की घोषणा कर दी। महाराजा के शासनकाल में चारों पहर की आरती में भगवान श्रीराम को 'गार्ड ऑफ ऑनर' दिया जाने लगा। राजाओं की पुरानी परंपरा को मध्य प्रदेश पुलिस बखूब निभा रही है। ओरछा तीर्थ नगरी के रूप में प्रसिद्ध है और देश के कई हिस्से से लोग यहां पूजा अर्चना के लिए आते हैं। यहां मंदिर की सुरक्षा के लिए मध्य प्रदेश सरकार की ओर से जवान तैनात किए गए हैं जो कि रोजाना आरती के समय गार्ड ऑफ ऑनर देते हैं। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt; सौ.नवभारत टाइम्स&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-4219834000208205786?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/4219834000208205786/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/03/blog-post_3395.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/4219834000208205786'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/4219834000208205786'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/03/blog-post_3395.html' title='कलयुग में राम राज !'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S5XsO78x-kI/AAAAAAAAAOM/bUMqAK3O3lY/s72-c/ragunath_temple.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-1939248534270275016</id><published>2010-03-08T22:06:00.000-08:00</published><updated>2010-03-08T22:28:01.921-08:00</updated><title type='text'>क्या बिक गए तुम ?</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S5XqZP_Og6I/AAAAAAAAAN0/ZrYc3kFTkMs/s1600-h/news_channels_.jpg"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 300px; height: 250px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S5XqZP_Og6I/AAAAAAAAAN0/ZrYc3kFTkMs/s320/news_channels_.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5446517043883836322" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S5XqVpCB-XI/AAAAAAAAANs/nPD1IexZ6Ik/s1600-h/1222603637353_breaking%2520news_t.png"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 221px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S5XqVpCB-XI/AAAAAAAAANs/nPD1IexZ6Ik/s320/1222603637353_breaking%2520news_t.png" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5446516981887007090" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S5XqRc-9XvI/AAAAAAAAANk/aA7yU3iPcnE/s1600-h/1220784054363_media_t.bmp"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 258px; height: 320px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S5XqRc-9XvI/AAAAAAAAANk/aA7yU3iPcnE/s320/1220784054363_media_t.bmp" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5446516909933420274" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;देश की आधी आबादी की आवाज़ है...&lt;br /&gt;आधा देश बुला रहा है...&lt;br /&gt;अब बराबरी का हक दो...&lt;br /&gt;मंगलवार को ये तमाम लाइनें तमाम न्यूज चैनलों के स्लग के रूप में दिखाई दे रही थीं। मामला था महिलाओं आरक्षण विधेयक से जुड़ा हुआ। दिन भर हंगामा चलता रहा। विपक्ष के कुछ नेताओं ने संसद में हंगामा किया। टीवी चैनलों की फुल स्क्रीन पर लिखा गया, संसद शर्मसार हुआ। नेताओं ने संसद की मर्यादा का नुकसान किया। ऐसा लगा कि नेताओं ने किसीकी हत्या कर दी हो। शाम को घर पहुंचते ही फिर से टीवी चालू किया। देश के नामी न्यूज चैनलों ने बड़े-बड़े नेताओं को बैठाकर अपनी टीआरपी बढ़ाने का माहौल बना लिया था। एक दूसरे का झगड़ा इनके लिए पैसा लाता है। हालांकि अब ये बात टीवी देखने वाले तमाम लोग जानते हैं। मैंने एक अंग्रेजी चैनल लगाया। देश में काफी नाम है इस चैनल का। अच्छी खासी व्यूअरशिप भी है। खबरों में हमेशा आगे रहने वाले इस चैनल की हरकतें मैं बेहद बारीकी से देख रहा था। महिला आरक्षण बिल लाने वाली कांग्रेस की नीयत पर सवाल उठाने के बजाए उस एक चैनल के अलावा देश के सभी बड़े चैनल विपक्ष को कोस रहे थे। मानो बिल का बहिष्कार करके उन्होने देश के साथ गद्दारी कर दी हो। अपनी राजनीति की दुकान चलाने की मजबूरी ने ही उन्हे बिल का विरोध करने पर मजबूर किया। जिन पार्टियों में महिला चेहरे नहीं हैं उनकी दुकानदारी इस बिल से प्रभावित हो सकती है। शायद यही वजह है कि विरोध के स्वर सुने गए। लेकिन चैनल के पत्रकार कबसे कांग्रेसी प्रवक्ता बन गए। बिल पर सार्थक बहस देखने के लिए मैंने तमाम चैनलों पर गौर किया। लेकिन कहीं भी सार्थकत नज़र नहीं आई। लालू यादव ने अगर अपना मत रखा तो चैनलों ने उसे गलत बता दिया। आखिर सही-गलत का फैसला करने के हक उन्हे किसने दिया। चैनलों का रवैया ऐसा था मानों कांग्रेस हाईकमान ने तमाम चैनलों में शेयर ले रखा हो। ऐसा लगा मानो विपक्ष के नेताओं को सिर्फ जलील करने के लिए बुलाया हो। मैं कांग्रेस या दूसरे दलों का विरोधी नहीं हूं। लेकिन अगर आपने किसी को चर्चा के लिए बुलाया होलतो उसे बोलने का मौका तो मिलना चाहिए। चैनलों में वक्त की कीमत भी समझ सकता हूं। लेकिन मेहमान से ज्यादा मेजबान का बोलना इसे खारिज कर देता है। मानो चैनलवाले कांग्रेस के खिलाफ कुछ सुनना ही नहीं चाहते। महिला बिल पास हो, सारा देश ये चाहता है लेकिन बिल पास होने से पहले मीडिया ने इतना बवाल क्यों किया। कौन देगा इसका जवाब। इसलिए क्योंकि आपके पास सैटेलाइट की ताकत है..या इसलिए क्योंकि आपके पास जनता का विश्वास है...आप खुद खुदा बन बैठे। लोकतंत्र में बोलने का हक हर किसी को है। तरीका गलत हो तो समर्थन हम भी नहीं करते। गंदी राजनीति की निंदा और विरोध हम भी करते हैं। लेकिन चौथे स्तंभ को किसी पार्टी का सरेआम साथ देना दुखद लगता है। मानो मीडिया बिक गई हो। संसद में हंगामा करने वाले नेता टीवी पर गुंड़ों के रूप में दिखाई दिए। लेकिन यही काम अगर कांग्रेस ने किया होता तो शायद वो वीर क्रांतिकारी कहलाते। कांग्रेसियों का विरोध भी सही हो जाता। कहीं कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज होता है तो खबरें ऐसी चलाई जाती हैं मानों भगत सिंह के साथियों पर अंग्रेजों ने लाठी चार्ज कर दिया है। कृपाशंकर सिंह और संजय निरूपम की बात सही लगती है लेकिन रविशंकर प्रसाद की दलील सुनी भी नहीं जाती। कौन सही है कौन गलत इसका फैसला जनता पर छोड़ना चाहिए। तराजू बराबर रखकर खबर बेची जाए, टीआरपी तब भी आती है। तरीके और भी हो सकते हैं। बिल सही है या गलत इसके लिए चर्चा तो होनी ही चाहिए। लेकिन पहले हर किसी की बात तो सुनी जाए।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-1939248534270275016?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/1939248534270275016/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/03/blog-post_08.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/1939248534270275016'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/1939248534270275016'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/03/blog-post_08.html' title='क्या बिक गए तुम ?'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S5XqZP_Og6I/AAAAAAAAAN0/ZrYc3kFTkMs/s72-c/news_channels_.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-4820225112300677125</id><published>2010-03-04T20:09:00.000-08:00</published><updated>2010-03-04T21:06:52.556-08:00</updated><title type='text'>भाई बोल रहा हूं...</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S5COxNsm48I/AAAAAAAAANc/0Z2Expkexeg/s1600-h/Chota_Rajan.jpg"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 200px; height: 200px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S5COxNsm48I/AAAAAAAAANc/0Z2Expkexeg/s320/Chota_Rajan.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5445008925632422850" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S5COsv9jCnI/AAAAAAAAANU/JYSAFldmmug/s1600-h/police.jpg"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 212px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S5COsv9jCnI/AAAAAAAAANU/JYSAFldmmug/s320/police.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5445008848930933362" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S5COnJFUL8I/AAAAAAAAANM/mzSGeIlgpPI/s1600-h/ezaz.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 80px; height: 100px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S5COnJFUL8I/AAAAAAAAANM/mzSGeIlgpPI/s320/ezaz.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5445008752595185602" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;मुंबई...सपनों का शहर... वो दुनिया जहां जाना हर किसी का सपना होता है। चाहत इतनी कि इसे मायानगरी कहते हैं। हर दिन यहां लाखों मुसाफिर आते हैं। कुछ को मंजिल मिलती है तो कुछ बेमंजिल हो जाते हैं। किसी की किस्मत चमकती है तो कोई ठोकरें खाता है। किसी के अरमान पूरे होते हैं तो कई हताश हो जाता है। जिसके सपने पूरे हुए वो बादशाह जिसका टूट गया वो फकीर। हार बर्दाश्त नहीं होती तो फकीर बादशाह बनने की कोशिश करता है। कोशिश के लिए कदम कहीं भी चल पड़ते हैं। उस रास्ते पर भी जिसकी मंजिल सलाखों के पीछे खत्म होती है, या फिर वहां जहां है सिर्फ अंधेरा। फिर पैदा होता है एक नया बादशाह। सपना..मुंबई पर राज करना। अपने सपनों के लिए कई लोगों को घर बर्बाद करना भी कबूल है। मुंबई अंडरवर्ल्ड में कुछ ऐसा ही होता है। वरना दाउद इब्राहिम आज खुद को बेताज बादशाह नहीं कहता। छोटा राजन और छोटा शकील का नाम भी नहीं होता। लेकिन इनका नाम है मतलब पर्दे के पीछे एक कहानी ऐसी जरूर है जो इन किरदारों को पैदा करने का काम करती है। बहरहाल अंडरवर्ल्ड का खात्मा करने के लिए मुंबई पुलिस जीतोड़ मेहनत कर रही है। लेकिन एक कहावत है...घर के भेदी लंका ढाए... मतलब समझाने की जरूरत नहीं है। खाकी के पीछे कई चेहरे इन बेताज बादशाहों के मोहरे का काम करते हैं। इन्हे वर्दीवाला गुंड़ा भी कहा जाता है। मुंबई पुलिस के कई अधिकारियों पर आरोप लग चुके हैं। मसलन सब इंस्पेक्टर दया नायक, अकेले 83 लोगों को मार गिराया...इन पर है अंडरवर्ल्ड से साठगांठ का आरोप।  विजय सालस्कर जैसे कई एनकाउंटर स्पेशलिस्टों पर ऐसे आरोप हैं। अकेले विजय सालस्कर ने ही अंर नाइक, जग्गू शेट्टी, साधु शेट्टी, कुंदन सिंह रावत और जहूर माखंडा जेसे अपरादिय़ों को मौत की नींद सुला दी। खाकी पहनकर सरकारी तरीके से शूटआउट करने वाले अंडरवर्ल्ड के इन मोहरों के खिलाफ सबूत मिलते भी नहीं मिलते। और इन्ही की शय पर अंडरवर्ल्ड फल-फूल रहा है। माया डोलस के एनकाउंटर के बाद अंडरवर्ल्ड के हौसले पस्त भी हुए थे। लेकिन वक्त बीतने के साथ ही काली दुनिया के शैतान फिर जाग उठे हैं। पिछले साल से अंडरवर्ल्ड एक बार फिर मुंबई पर हावी होने लगा है। नई कहानी आपको बताते हैं। &lt;br /&gt;                          मुंबई के कांदिवली में रहने वाले एक बिल्डर को हाल ही में अंडरवर्ल्ड का फोन आया है। फोन करने वाले अपना नाम एजाज लकड़ावाला बताया। अब इन दोनों के बीच क्या बातचीत हुई वो आपको बताते हैं..&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;एजाज- &lt;/strong&gt; खैरियत भाईजान&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;फैजल शेख (नाम बदला हुआ)- &lt;/strong&gt; बस अल्लाह का करम है&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;एजाज- &lt;/strong&gt; एजाज भाई बोल रहा  हूं&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;फैजल शेख (नाम बदला हुआ)- &lt;/strong&gt;: एजाज भाई लकड़ावाले ? हां बोलो&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;एजाज- &lt;/strong&gt;: रफीकभाई से मैसेज ले लेना और बात कर लेना। अपने वाले हो तो फोन करके बताया, नहीं तो दूसरी बात रहता है, बात अलग हो जाती है। जवाब दे देना। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;फैजल शेख (नाम बदला हुआ)- &lt;/strong&gt;: बराबर&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;एजाज- &lt;/strong&gt;: आपकी इज्जत कर रहा हूं, किसीको बीच में डाला तो मैं किसीकी इज्जत नहीं करुंगा। फैसला मुझको करना है। आपकी तरफ से &lt;strong&gt;एक करोड़ गुडलक&lt;/strong&gt; करवाओ। वो जो जगह करवाया है उसमें इनवॉल्व नहीं हो रहा हूं। वो अहमदाबाद वाले बुकी का। &lt;br /&gt;                     ये है बातचीत एजाज लकड़ावाला और मुंबई के उस बिल्डर के बीच। एजाज ने बतौर प्रोटेक्शन मनी 1 करोड़ रुपए मांगे हैं। जिसे उसने नया नाम दिया है..&lt;strong&gt;गुडलक&lt;/strong&gt;। पैसा नहीं मिला को इस बिल्डर का भगवान ही मालिक है। अंजाम शायद हमसब जानते हैं। &lt;br /&gt;                  मुंबई अंडरवर्ल्ड में इस समय कई लोग सक्रिय हैं। गैंगवार की खबरें भले कम हो गई हों लेकिन इनका आतंक कभी भी कम नहीं हुआ। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;एजाज लकड़वाला&lt;/strong&gt; वो नाम है जो कभी छोटा राजन के साथ काम करता था। फिलहाल कनाडा में हैं और वहीं से अपना गैंग ऑपरेट करता है। एजाज पर 2003 में बैंकॉक में अपने ही बॉस छोटा राजन पर हमला करवाने का आरोप है। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रवी पुजारी&lt;/strong&gt;--छोटा राजन का पुराना साथी। बैंगलोर से अपना गिरोह चलाता है। दक्षिण कर्नाटक और मुंबई में भी रवी पुजारी गिरोह सक्रिय है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;हेमंत पुजारी&lt;/strong&gt;- कभी राजन के साथ काम करता था। अब मुंबई के पश्चिमी उपनगरों के होटल व्यवसायी और बिल्डरों से एक्स्टॉर्शन वसूलने का काम करता है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;भारत नेपाली और संतोष शेट्टी&lt;/strong&gt;- छोटा राजन के दो खारस गुर्गे। क्रिमिनल लायर शहीद आज़मी और नेपाल के बिदजनेसमैन जमील शाह की हत्या के बाद ये राजन के करीबी बन गए। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;यूसूफ बचकाना और राजन रामानुजम एलियास कालिया राजन&lt;/strong&gt;--फिलहाल राजन के यो दोनों गुर्गे जेल मे हैं लेकिन राजन के बेहद करीबी हैं। जेल में भी इनके लिए खास सुविधाएं देने का काम राजन का है। जेल के अंदर से ही राजन के बाकी गुर्गों की मदद का काम करते हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;डीके राव&lt;/strong&gt;: छोटा राजन का खास गुर्गा। आर्थर रोड के अंडा सेल में सड़ता रहा। जेल से फिलहाल बाहर है। जेल क अंदर से ही वो राजन के लिए नेटवर्किंग का काम करता रहा। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;फरीद तानाशाह&lt;/strong&gt;: राजन का भरोसेमंद साथी। कभी इंटेलिजेंस के साथ था आजकल राजन के साथ मिलकर अंडरवर्ल्ड में सक्रिय है। &lt;br /&gt;                           मुंबई अंडरवर्ल्ड के ये कुछ खास चेहरे हैं। दाउद के बाद इन सबका नंबर आता है। फिलहाल ये तमाम गैंगस्टर मुंबई में सेंध लगा रहे हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2008 में एक्सटॉर्शन के 240 मामले दर्ज किए गए। 2009 में ये आकंड़ा 296 तक पहुंच गया। 2008 में 162 अपराधियों को इसी मामले में गिरफ्तार किया गया जबकि 2009 में ये आंकड़ा 196 तक पहुंच गया। &lt;br /&gt;                दाउद इब्राहिम, छोटा शकील, चोटा राजन, अरुण गवली मुंबई में फिलहाल ज्यादा सक्रिय हैं। इनके अलावा गुनाह की इस दुनिया में कई और छोटे-मोटे नाम भी लगातार जुड़ रहे हैं। लेकिन मुंबई पुलिस है कि हाथ पर हाथ धरे बैठी है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-4820225112300677125?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/4820225112300677125/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/03/blog-post_04.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/4820225112300677125'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/4820225112300677125'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/03/blog-post_04.html' title='भाई बोल रहा हूं...'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S5COxNsm48I/AAAAAAAAANc/0Z2Expkexeg/s72-c/Chota_Rajan.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-98126503659564453</id><published>2010-03-03T18:15:00.000-08:00</published><updated>2010-03-03T18:36:34.740-08:00</updated><title type='text'>दांव पर ज़िंदगी...</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S48cqRZK9JI/AAAAAAAAANE/nS4hCMMz5Xs/s1600-h/Bullet_Proof_Jacket.jpg"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 175px; height: 320px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S48cqRZK9JI/AAAAAAAAANE/nS4hCMMz5Xs/s320/Bullet_Proof_Jacket.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5444601987063280786" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S48ckxaEH8I/AAAAAAAAAM8/Zj2HtWYFTpY/s1600-h/karkare.bmp"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 214px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S48ckxaEH8I/AAAAAAAAAM8/Zj2HtWYFTpY/s320/karkare.bmp" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5444601892577746882" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S48ce1fEfrI/AAAAAAAAAM0/-EURu1fGYlw/s1600-h/army+jacket.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 240px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S48ce1fEfrI/AAAAAAAAAM0/-EURu1fGYlw/s320/army+jacket.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5444601790593269426" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;मुंबई हमलों के दौरान मुंबई पुलिस के जांबांज अधिकारी हेमंत करकरे की मौत इसलिए हुई क्योंकि उनकी बुलेटप्रूफ जैकेट ने उन्हे धोखा दे दिया था। जिस कवच को पहनकर करकरे आतंकियों का सामना करने गए थे वो कवच लगभग नकली निकला। उसने करकरे का साथ नहीं दिया। और करकरे साहब को शहादत मिल गई। देश ने उन्हे सलाम किया। लेकिन उनके कवच की नाकामयाबी पर सवाल किसी ने नहीं उठाया। महाराष्ट्र विधानसभा में बुलेटप्रूफ जैकेट का मुद्दा जिस तरह से उठा उसी तरह कब्र में चला गया। करकरे की शहादत भी मुंबई भूल चुका है। वरना उनकी शहादत के ज़िम्मेदार अपनी किस्मत को कोस रहे होते। अधिकारी से लेकर सरकार तक हर किसी को जवाब देना पड़ता। लेकिन हम उस देश के नागरिक हैं जिसने महात्मा गांधी की शहादत को भी भुला दिया। तो फिर करकरे साहब क्या चीज हैं। लेकिन मेरा दिल रोता है। आवाज उठाना चाहता है उस शोर के खिलाफ जिसकी वजह से सच्चाई के सुर दब जाते हैं। करकरे की मौत के बाद देशभर में बुलेटप्रूफ जैकेटों को लेकर कोई हलचल शुरू हुई तो वो थी सियासी हलकों में। एक दूसरे पर उंगली उठी। लेकि हुआ कुछ भी नहीं। क्योंकि चोर-चोर मौसेरे भाई। तो फिर आरोप लगाएं किस पर ? क्या हुआ अगर एक अधिकारी बुलेटप्रूफ जैकेट होने के बाद भी मारा जाता है...क्या हुआ जो एक पत्नी का सुहाग मिट गया..तो क्या हुआ अगर इस देश ने अपना एक बहादुर लाल खो दिया...तो क्या हुआ अगर एक बेटे ने अपना पिता खो दिया.....जैकेटों की दलाली में जो पैसे आए उससे हमारा घर तो चल ही रहा है। ये लाइनें मैंने जिसके संदर्भ में लिखीं उसे आप भी समझ सकते हैं। लखनऊ में एक आलाअधिकारी ने बुलेटप्रूफ जैकेट का परीक्षण किया। साधारण राइफल से मारी गई गोली का मुकाबला भी वो जैकेट नहीं कर सकी जिसे उत्तरप्रदेश सरकार ने मान्यता दी थी। &lt;br /&gt;दबा-सहमा पुलिस अधिकारी ना तो कुछ कह पाया और ना ही कुछ कर पाया। लेकिन इतना समझ गया कि फिर कहीं किसी ददुआ से मुकाबला हुआ तो जान बचाने वाली बुलेटप्रूफ जैकेट से उम्मीद ना ही किया जाए। शून्य से 30 डिग्री से भी ज्यादा नीचे के तापमान पर 24 घंटे होकर हमारे लिए अपना घरबार छोड़कर गए देश के जवानों पर भ्रष्ट अधिकारी और नेताओं को रहम नहीं आता। पाप की कमाई से घर भरने वाले इस सिस्टम से जुड़े तार अपनों का खून चूसने के लिए तैयार हैं। इन जवानों के लिए हर साल ठंड से बचने के लिए नए कपड़े बनाए जाते हैं। नए जूते भी आते हैं। लेकिन कड़कती ठंड के सामने इन तमाम जीवनरक्षक चीजों का महत्व कम हो जाता है। सवाल इनकी गुणवत्ता पर फिर उठता है। मामला सेना के किसी अधिकारी या फिर मामले से जुड़े मंत्रालय तक आता है। और फिर ढाक के तीन पात...  हथियारों के मामले में भी सवाल उठता रहा है। बोफोर्स कांड इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है। रूस और चीन से हथियार खरीदने के हर मामले में पर्दे के पीछे कोई ना कोई कहानी जरूर रही है। बहरहाल अर्द्धसैनिक बलों के लिए खरीदे गए बुलेटप्रूफ जैकेटों को परखने में  &lt;br /&gt;पुराने तरीके अपनाए जाने से पूरी प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगने के बाद गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने बुलेटप्रूफ जैकेट की खरीददारी रद्द करने का आदेश दिया था। हाल ही में सीआरपीएफ के लिए 59 हजार बुलेटप्रूफ जैकेट खरीद के दौरान इसके चयन की जिम्मेदारी चंडीगढ़ स्थित डीआरडीओ की लैब स्पार्क रेंज को सौंपी गई थी। सूत्रों के मुताबिक, बुलेटप्रूफ जैकिट सप्लाई करने की होड़ में नौ कंपनियां शामिल हैं। 26/11 के मुंबई हमलों के दौरान एटीएस प्रमुख करकरे की बुलेटप्रूफ जैकेट पहनने के बावजूद आतंकवादी की गोली लगने से मौत के बाद चिदंबरम ने जैकेटों को दोबारा टेस्ट करने के आदेश दिए थे। लेकिन रक्षा सूत्रों का कहना है कि परीक्षण में वे ही तकनीकी अधिकारी शामिल हैं जिन्हें पहले दौर के परीक्षण में जिम्मेदारी दी गई थी। आरोप है कि कुछ खास कंपनियों के बुलेटप्रूफ जैकेट को बेहतर सिद्ध करने के लिए दूसरी कंपनियों के बुलेटप्रूफ जैकेट को पहले अत्यधिक तापमान दिखाने के बाद उस पर बुलेट चला कर टेस्ट किया जा रहा है। इस वजह से कुछ जैकेट कसौटी पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं। बुलेटप्रूफ जैकेट पहनने वाले जवानों का जीवन इसकी मजबूती पर टिका होता है। इसलिए इसके चुनाव में अधिकारियों को पूरी पारदर्शिता बरतनी चाहिए। सूत्रों का कहना है कि परीक्षण के दौरान सभी कंपनियों के प्रतिनिधियों और रक्षा विशेषज्ञों की मौजूदगी में ये परीक्षण होने चाहिए ताकि जवानों को श्रेष्ठ उपलब्ध बुलेटप्रूफ जैकेट मुहैया हो सके। देश के विभिन्न हिस्सों में आतंकवाद से लड़ रहे थलसेना के जवानों के लिए भी भारी संख्या में मौजूदा जैकेटों से मजबूत और हल्के बुलेटप्रूफ जैकेट खरीदने की प्रक्रिया शुरू होगी। यदि डीआरडीओ ने किसी घटिया बुलेटप्रूफ जैकेट को मंजूरी दे दी तो इसे भविष्य में भी ऑर्डर मिलते रहेंगे जिससे जवानों को जिंदगी खतरे में पड़ सकती है। यानि फिर किसी करकरे की ज़िंदगी दांव पर लग सकती है...&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-98126503659564453?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/98126503659564453/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/03/blog-post_03.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/98126503659564453'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/98126503659564453'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/03/blog-post_03.html' title='दांव पर ज़िंदगी...'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S48cqRZK9JI/AAAAAAAAANE/nS4hCMMz5Xs/s72-c/Bullet_Proof_Jacket.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-2055381229988714120</id><published>2010-03-03T00:33:00.000-08:00</published><updated>2010-03-03T00:53:14.825-08:00</updated><title type='text'>अब तारीख पर तारीख नहीं !</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S44jcmWUbwI/AAAAAAAAAMs/ca-yXtz01C0/s1600-h/court.jpg"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 226px; height: 320px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S44jcmWUbwI/AAAAAAAAAMs/ca-yXtz01C0/s320/court.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5444327973774978818" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S44jYhTjOiI/AAAAAAAAAMk/k3_meoPTNcI/s1600-h/29821.jpg"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 173px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S44jYhTjOiI/AAAAAAAAAMk/k3_meoPTNcI/s320/29821.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5444327903701711394" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S44jUJezi7I/AAAAAAAAAMc/FJH9FGV_tgE/s1600-h/12.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 259px; height: 320px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S44jUJezi7I/AAAAAAAAAMc/FJH9FGV_tgE/s320/12.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5444327828586990514" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;मोहन सिंह आज बड़ा खुश लगा रहा है। जिला कचहरी में चल रहा उसका बरसों पुराना केस आज वो जीत गया। अदालत में वकील साहब को उसने मिठाई खिलाई। वकील साहब के घर भी गया था। बड़े साहब उमाकांत को भी उसने मिठाई खिलाई। आखिरकार जमीन के कागजात लेकर वो अपने घर पर गया। लालजी की फोटो के आगे उसने कागज रखा और उन्ह प्रणाम किया। मोहन सिंह की मां और पत्नी आज बड़े खुश थे। मोहन सिंह की मां की आंखों से आंसू निकले। वो भी लालाजी की फोटो के आगे जाकर रोने लगी। उसके मुंह से निकला, अगर आप आज ज़िंदा होते तो इस जीत का मजा ही कुछ और होता। अब जाकर मेरी समझ में आया कि लालाली मोहन सिंह के पिता हैं। और जो केस मोहन 20 बरस की उम्र में जीता है उसकी शुरूआत तब हुई थी जब उसके पिताता यानि लालाजी 20 बरस के थे। 55 की उम्र में उनका निधन हो गया। तब मोहन की उम्र केवल 15 साल थी। लालजी की मौत के साथ ही उनके वकील उमाकांत भी रिटायर की उम्र तक पहुंच गए थे। इसलिए केस की ज़िम्मेदारी नई पीढ़ी की हाथ चली गई थी। अदालत में चक्कर पे चक्कर और तारीख पर तारीख लेने के बाद 30 साल का इंतजार ही था जिसकी बदौलत उन्हे 1 बीघा जमीन के केस में जीत मिली। उस एक बीघा जमीन के लिए लालाजी और मोहन सिंह ने 2 लाख रुपए से ज्यादा खर्च कर दिए। आज पचा चला कि उस जमीन की कीमत 50 हजार से भी ज्यादा नहीं है। ये भूमिका इसलिए दी ताकि अदालत से आपको रूबरू कर सकूं। इतना मैं भी जानता हूं कि अदालती प्रक्रिया के बारे में आपने भी बचपन से ही सुना होगा कि कोर्ट कचहरी के चक्कर में ना ही पड़ो तो अच्छा है। मैं भी ज्यादा नहीं कहुंगा क्योंकि जेल की दीवारें मुझे अच्छी नहीं लगतीं। बहरहाल अदालतों की कार्रवाई में पीढ़ियां ना बदलें इसलिए सरकार ने हाल ही में आनन-फानन में जजों की नियुक्ति की। लेकिन ढाक के तीन पात रहा सबकुछ। लेकिन एक बार ऊंट ने फिर करवट ली है। हायर जुडिशल सर्विसेज़ में जवाबदेही और मानक स्थापित करने के लिए प्रस्तावित नए कानून के तहत जजों को किसी मामले में बहस पूरी होने के बाद तीन महीने के अंदर अपना फैसला सुनाना होगा। कानून मंत्रालय के प्रस्तावित जुडिशल स्टैंडर्ड ऐंड अकाउंटेबिलिटी बिल 2010 का उद्देश्य न्यायिक सेवाओं में मानक स्थापित करना और ऐसी प्रणाली बनाना है जिससे सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों के खिलाफ दुर्व्यवहार और अयोज्ञता की शिकायतों को दूर किया जा सके। इस विधेयक में जजों की संपत्ति और दायित्वों की घोषणा का भी प्रावधान किया गया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बाद इस विधेयक को वर्तमान बजट सत्र के दौरान इसे संसद के समक्ष पेश किए जाने की संभावना है। प्रस्तावित कानून में कहा गया है कि बहस पूरी होने के तीन महीने की समय सीमा के अंदर जज को अपना फैसला देना होगा। विधेयक के मसौदे में कहा गया है कि उच्च न्यायिक सेवाओं के सदस्यों को अपने न्यायिक कार्य के दौरान निष्पक्ष रहना चाहिए या उनके द्वारा दिए गए निर्णय धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्म स्थान से प्रभावित नहीं होने चाहिए। विधेयक के अन्य दिशा निर्देशों में कहा गया है कि जज चुनाव नहीं लड़ सकते, वे किसी क्लब या संगठन के सदस्य नहीं हो सकते, बार कांउसिल के किसी सदस्य के साथ घनिष्ठता नहीं बढ़ा सकते, अपने संबंधियों के अलावा और किसी से उपहार या मेहमाननवाजी नहीं स्वीकार कर सकते और उन कंपनियों के मामलों की सुनवाई नहीं कर सकते जिनके शेयर उनके पास हैं। प्रस्तावित कानून में कहा गया है कि जज को अपने किसी निर्णय के संबंध में मीडिया को इंटरव्यू नहीं देना चाहिए। इसके अलावा जजों को राजनीतिक मसलों पर किसी सार्वजनिक बहस में भाग नहीं लेना चाहिए। जजों द्वारा न्यायिक मानकों को गिराने वाले किसी भी कदम के लिए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। जजों के विरूद्ध दुर्व्यवहार या भ्रष्टाचार की शिकायत को तीन जजों की जांच समिति के समक्ष पेश किया जाएगा। जांच समिति यदि जज के खिलाफ किसी शिकायत को वाजिब पाती है तो उसे न्यायिक निगरानी समिति के पास भेजा जाएगा। यह समिति मामले की जांच कर जांच रिपोर्ट को राष्ट्रपति के पास उक्त जज के खिलाफ कार्रवाई के लिए भेजेगी। राज्यसभा के सभापति के रूप में उप राष्ट्रपति न्यायिक निगरानी समिति की संभवत: अध्यक्षता करेंगे। इस समिति के अन्य सदस्यों में भारत के चीफ जस्टिस, सीजेआई द्वारा नामांकित हाई कोर्ट के एक चीफ जस्टिस और राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किए गए दो नामचीन कानून के जानकार शामिल होंगे। भारत के सभी 21 हाई कोर्ट्स में एक-एक जांच समिति का गठन किया जाएगा। विधेयक के मुताबिक जज के दुर्व्यवहार के अनुसार उसे चेतावनी, फटकार या प्रतिबंध की सजा दी जा सकती है। लेकिन यदि न्यायिक मानकों के उल्लंघन की प्रकृति गंभीर है तो उसके खिलाफ महाभियोग लगाया जा सकेगा। इस विधेयक के बाद अदालत में तारीखों के दान पर रोक लगेगा या नहीं इसके लिए हमें विधेयक के लागू होने तक का इंतजार करना पड़ेगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-2055381229988714120?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/2055381229988714120/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/03/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/2055381229988714120'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/2055381229988714120'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/03/blog-post.html' title='अब तारीख पर तारीख नहीं !'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S44jcmWUbwI/AAAAAAAAAMs/ca-yXtz01C0/s72-c/court.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-6176085146772499071</id><published>2010-02-27T22:05:00.000-08:00</published><updated>2010-03-01T21:01:18.349-08:00</updated><title type='text'>ना ईश्वर कहो ना अल्लाह...</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S4oMOZ83ywI/AAAAAAAAAMU/pOzZ9vPhEgw/s1600-h/Allah%2520sunset_jpg_jpg.jpg"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 189px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S4oMOZ83ywI/AAAAAAAAAMU/pOzZ9vPhEgw/s320/Allah%2520sunset_jpg_jpg.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5443176541254568706" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S4oMGQBsPMI/AAAAAAAAAMM/xcXbieJKEyE/s1600-h/LordRam"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 240px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S4oMGQBsPMI/AAAAAAAAAMM/xcXbieJKEyE/s320/LordRam" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5443176401151474882" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;चंदन काका के साइकिल रिक्शे पर स्कूल जाते थे। मास्टर जी कक्षा लेने से पहले प्रार्थना करवाते थे। मास्टर जी के अस्पष्ट शब्दों को हम अपने सुर में दोहराने की कोशिश करते थे। पंक्तियां कुछ ऐसी थीं...&lt;strong&gt;ईश्वर अल्लाह तेरो नाम, सबको सम्मति दे भगवान&lt;/strong&gt;  बचपन के मन ने मास्टर से जी इन पंक्तियों का मतलब पूछा तो उनका जवाब समझने के लिए मष्तिष्क के साथ जूझना पड़ा। लेकिन घर जाकर दादी मां से इसका अर्थ समझ में आया। दादी कभी स्कूल नहीं गई लेकिन इतना जरूर पढ़ा सकती थी कि हिंदू और मुसलमान दोनों की भगवान की बनाई हुई देन है। लेकिन जैसे ही दूसरे गांव का किसान अनाज के पैसे देने आया तो उसे चाय मिट्टी के बर्तन में दी गई। जबकि वही चाय हम कप में पी रहे थे। माजरा समझने के लिए मुझे सवाल पूछना ही था। जिस दादी ने कुछ देर पहले मुझे हिंदू-मुस्लिम एकता का ज्ञान दिया था थोड़ी ही देर में मैंने उसे ईश्वर की देन का अपमान करते हुए देखा। पता चला वो किसान मुसलमान है इसलिए उसे मिट्टी के बर्तन में चाय दी गई। उसकी गरीबी भी उसकी हालत की एक वजह थी। पिता जी मास्टर हैं। दूसरे बच्चों को पढ़ाते हैं। मेरी किताब में एक अध्याय फिर आया। मैंने पढ़ा भेदभाव नहीं करना चाहिए। मन में शंकाओं का कुतूहल उठा। पिताजी ने समझाया कि हम सब एक हैं इसलिए जात-पात के नाम पर भेदभाव नहीं करना चाहिए। मैंने इस पंक्ति को अपने मन में घर कर लिया। इस एकता की मिसाल बनाने के लिए मैं रामअधारे के बेटे के साथ खेलने गया। लेकिन घर आते ही पिताजी के हाथ में बेहये का डंडा मेरे इंतजार में था। मार तो पड़ी ही साथ में कड़कती ठंड में मुझे नहलाय़ा भी गया। जाहिर है आगे से मुझे रामअधारे के टोले के किसी भी बच्चे के साथ खेलने या बातचीत करने से मना कर दिया गया। तब मैंने इंसानी प्रवृत्ति का एक और उदाहरण देखा। मन ही मन सोच लिया कि जब मैं बड़ा होउंगा तब इन कुरीतियों के खिलाफ लड़ुंगा। क्योंकि अभी घर में बगावत करने पर सज़ा का हकदार हो जाउंगा इतनी समझ मुझमें थी। आज मैं बड़ा हो गया हूं। अच्छे-बुरे की समझ है। इंसान को चांद पर पहुंचे ज़माना हो चुका है। मंगल पर इंसानों की बस्ती बसने वाली है। इंसानों का क्लोन भी पुरानी बात हो गई है। लेकिन बचपन की कुछ बातें आज भी नहीं बदली हैं। धर्म और मजहब के नाम पर लड़ाई हो जातिवाद, इंसानों की बस्ती में ये आज भी उतने ही मजबूत हैं जितने कल थे। उदाहरण लीजिए मलेशिया का। लेखक मधुसूदन आनंद लिखते हैं अल्लाह या ईश्वर का शुक्र मनाइए कि आपका जन्म न तो मलयेशिया में हुआ और न ही आप वहाँ रहते हैं। अगर आप मुसलमान नहीं होते और गलती से भी अपने ईश्वर को अल्लाह के नाम से पुकारते तो आपकी खैर नहीं थी। कोई भी हिन्दू, सिख, ईसाई, जैन या अन्य गैरमुस्लिम आदमी किसी भी गैर इस्लामी संदर्भ और विमर्श में ईश्वर के लिए यदि अल्लाह शब्द लिखता या बोलता है तो उसे एक साल तक की सजा हो सकती है। मलयेशिया में 7 प्रतिशत आबादी भारतीय मूल के लोगों की है और वहाँ हिन्दू और सिख धर्मावलंबियों की अच्छी-खासी संख्या है। मलयेशिया में जो भाषाएँ बोली जाती हैं, उनमें चीनी, थाई और अँगरेजी भाषा के साथ-साथ पंजाबी का भी नाम आता है। बहुधर्मी और बहुभाषी समाज में भाषाएँ एक-दूसरे को प्रभावित करती हैं। जैसे हमारे यहाँ ईश्वर को रब, अल्लाह, ईश्वर, खुदा, राम, रहीम, गॉड आदि किसी भी नाम से पुकारा जा सकता है, वैसे ही पश्चिमी देशों में ही नहीं अरब देशों तक में चलन है। जो समाज अनीश्वरवादी रहे हैं, वहाँ भी इस तरह की कोई बंदिश नहीं है। लेकिन मलयेशिया में ईश्वर को या गॉड को या रब को अल्लाह कहने की मनाही है। मलयेशिया से ज्यादा मुसलमान पड़ोसी देश इंडोनेशिया में रहते हैं, लेकिन वहाँ किसी भी धर्म का आदमी अपने ईश्वर को अल्लाह के नाम से पुकार सकता है। और तो और मलयेशिया के बोर्नियो में रहने वाले ईसाई लोग अपने गॉड को अल्लाह के नाम से पुकार सकते हैं लेकिन मलयेशिया की मुख्यभूमि पर इसकी मनाही है। यही नहीं 'फतवा', 'इमाम', 'हाजी', 'शेख', 'मुफ्ती' और 'अल्लाह-ओ-अकबर' जैसे शब्द भी कोई गैर मुस्लिम लिख या बोल नहीं सकता। सब जानते हैं कि ईसाई और सिख धर्म में अल्लाह शब्द का ईश्वर के अर्थ में इस्तेमाल होता है। संत, कवियों और सूफियों ने यही सिखाया है कि ईश्वर एक है और उसे किसी भी नाम से पुकारा जा सकता है। गाँधीजी का तो भजन है : 'ईश्वर अल्लाह तेरे नाम, सबको सम्मति दे भगवान' इसलिए हम भारतीयों को जब यह पता चलता है कि मलयेशिया में हम ईश्वर को अल्लाह नहीं कह सकते तो हमें गहरा झटका लगता है। लेकिन मलयेशिया सरकार के अपने तर्क और कारण हैं। उसने इस तरह की बंदिशें इस डर से लगाई थीं ताकि दूसरे धर्मों के लोग और विशेषकर क्रिश्चियन लोग मुसलमानों का धर्म परिवर्तन न करा लें। अल्लाह और अन्य शब्दों को लेकर विवाद वर्षों पुराना है। 1980 के दशक में करीब दो दर्जन ऐसे शब्दों की सूची बनाकर सरकार ने हुक्मनामा जारी कर दिया था। है ईश्वर आखिरये कब तक चलता रहेगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-6176085146772499071?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/6176085146772499071/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/02/blog-post_27.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/6176085146772499071'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/6176085146772499071'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/02/blog-post_27.html' title='ना ईश्वर कहो ना अल्लाह...'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S4oMOZ83ywI/AAAAAAAAAMU/pOzZ9vPhEgw/s72-c/Allah%2520sunset_jpg_jpg.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-3649551475509781469</id><published>2010-02-25T21:07:00.000-08:00</published><updated>2010-02-25T22:55:23.612-08:00</updated><title type='text'>देखो होली आई रे...</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S4dqZIr794I/AAAAAAAAALs/0dxSINZonso/s1600-h/holi.jpg"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 240px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S4dqZIr794I/AAAAAAAAALs/0dxSINZonso/s320/holi.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5442435654761576322" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S4dqQy_h1qI/AAAAAAAAALk/3tReya8Br4U/s1600-h/foxkeh_holi.jpg"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 319px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S4dqQy_h1qI/AAAAAAAAALk/3tReya8Br4U/s320/foxkeh_holi.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5442435511499216546" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S4dqJzILQbI/AAAAAAAAALc/DLMDV4uJdb0/s1600-h/holi1.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 274px; height: 320px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S4dqJzILQbI/AAAAAAAAALc/DLMDV4uJdb0/s320/holi1.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5442435391276401074" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;चारों ओर रंग ही रंग हैं। जहां जाओ रंग भरे गुब्बारे आपका इंतजार कर रहे हैं। आप आगे बढ़े नहीं कि एक गुब्बारा हवाओं के साथ मुकाबला करता हुआ आप पर हमला कर देगा। आपके कपड़ों पर गुब्बारा अपना सारा गुबार निकाल देगा। गुब्बारे की रफ्तार लंका जाते समय हनुमान की रफ्तार से कम नहीं होगी। आपके कपड़ों का रंग खून से लथपथ सिपाही की तरह होगा और हालत भीगी हुई बिल्ली की तरह। अब होली रंगो से होती है, लेकिन होली के भी कई रंग हैं। मसलन आप गोरखपुर के किसी गांव में जाइए। दोपहर के 1 बजे के पहले पहुंचे तो स्वागत कीचड़ से होगा और देर से गए तो गंदे रंगों से साथ आपका शाही स्वागत हो सकता है। शहर की ओर आते हैं। दिल्ली या मुंबई में, होली के दो हफ्ते पहले से ही माहौल बना लिया जाता है। फटे-पिचके गुब्बारे दुकानों के कोनों से बाहर की सज्जा बन जाते हैं। फिर कुछ ही देर में गली के बदमाश लेकिन मां की नज़रों में लाल के हाथों में चले आते हैं। मां के काले-काले और गोरे-गोरे लाल उन गुब्बारों का सही इस्तेमाल राहगीरों पर करते हैं। उनका कलर कॉंबिनेशन भी गजब का होता। सफेद रंग की शर्ट पहने लोगों पर लाल रंग से भरे गुब्बारे से हमला किया जाता है। किसी ने हरे रंग के कपड़े पहने हैं तो उस पर नीले रंग का गुब्बारा फोड़ दिया जाता है। गलती से जवानी की दहलीज पर कदम रखती कोई कन्या रास्ते से गुजरी तो उस पर गुब्बारों का ऐसा हमला होता है जैसे किसानों के खेत में टिड्डियों ने हमला बोल दिया हो। लड़की की हालत हमले के बाद किसान जैसी हो जाती है। पलट कर इन शरारती लेकिन मां के प्यारे-प्य़ारे बच्चों को देखने की कोशिश करेंगे तो ये ऐसे अदृश्य होंगे जैसे हवा में ऑक्सीजन। रास्ता लेकर बनारस की ओर भी चलते हैं। य़हां होली का रंग कुछ खास होता है। पंचायत वाली पेड़ के नीचे 4-5 मोटे-मोटे लोग बाल्टी में हरे रंग का खुशबू भरा शरबत बनाते नज़र आएंगे। इस शरबत में दूध की भी एक खास भूमिका होती है। भोले बाबा की नगरी में ये अनोखा शरबत पीजिए और चले जाइए एक अनोखी दुनिया में जहां संसारिक और भौतिक चीजों से मोह भंग हो जाता है। प्रसाद की ताकत आपको सूर्यकिरणों की प्रबलता के साथ नज़र आने लगेगा। बनारस से मन ऊब चुका हो तो वृंदावन आ जाइए। कान्हा की नगरी में गोपियों की होली सबसे मजेदार होती है। बरसाने की लठ्ठमार होली आपने सुनी है। अब इसके रंग का जायका लीजिए। कुछ सुंदर तो कुछ प्राकृतिक रूप से असुंदर महिलाएं ताकत लगाकर या फिर प्यार से बरसाने के पुरुषों पर लाठी से प्रहार करती हैं। कोशिश रहती है कि ना लगे लेकिन अगर किसी पुरुष का चेहरा पहचान लिया जाए मसलन इसी ने किसी समय राह चलते छेड़खानी की थी तो लाठी का निशाना चूक सकता है। फिर होली और खून का रंग एक में मिल जाता है। होली नजदीक आते ही बरसाना में फूलों की होली भी खेली जाती है। अब भला फूलों से मार कौन नहीं खाना चाहता है। लेकिन धूल भरी होली से बचना हर कोई चाहता है। बरसानो में इसे फाग कहा जाता है। इस होली में आसमान धूल से भर जाता है। चारों ओर प्राकृतिक सुंदरता का रंग धूलमय हो जाता है। होली हमारे अगुवा भी खेलते हैं। अगुवा से मेरा मतलब है हमारे वो भाई जो कुछ दिनों पहले हमारे आगे हाथ जोड़कर आए थे। लेकिन हमारे हाथ जोड़ने पर भी हमारे पास नहीं आते। आम भाषा में इन्हे नेता शब्द से संबोधित किया जाता है। हां आपस में ये होली जरूर खेलते हैं। होली के रंगों में इनकी नीतियों का भी मिलन होता है। साथ ही एक दूसरे पर गुलाल लगाकर पांच साल बाद की मित्रता को घनिष्ठ करने की कवायद की जाती है। फिर चाहे दिल मिलें या मिलें, विचार मिलें या ना मिलें, गले जरूर मिलेंगे। इसे दिखावा कहकर इनके नाटक का अपमान हम नहीं करेंगे। लेकिन एक होली इससे भी खास है। ये होली आप देख तो नहीं सकते लेकिन इसके बारे में जान जरूर सकते हैं। कश्मीर घाटी में भी होली खेली जाती है। खाकी रंग पहने, कंधे पर BSF का तमगा लगाए हमारे जवान घाटियों और हिमालय़ की चोटियों पर होली खेलते हैं। यहां लाल रंग ज्यादा प्रचलित है। गुब्बारों की जगह गोलियां चलाई जाती हैं। होली में दिवाली का रंग भी दिखता है। चाहे इस पार से या उस पार से, तोप से निकले गोले धमाका करते हैं। इस होली में जब भी बर्फ पर लाल चादर बिछती है, कहीं ना कहीं मातम ज़रूर होता है फिर चाहे इस पार हो या उस पार हो। लेकिन यहां हम ये नहीं कहतेस, &lt;strong&gt;बुरा ना मानो होली है....&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-3649551475509781469?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/3649551475509781469/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/02/blog-post_25.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/3649551475509781469'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/3649551475509781469'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/02/blog-post_25.html' title='देखो होली आई रे...'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S4dqZIr794I/AAAAAAAAALs/0dxSINZonso/s72-c/holi.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-9175710336495304331</id><published>2010-02-25T19:13:00.000-08:00</published><updated>2010-02-25T22:48:31.019-08:00</updated><title type='text'>'लेक्चर मत दो'</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S4duUZMe0pI/AAAAAAAAAME/jMMfpP8MEk0/s1600-h/20060418-india-pakistan-border.jpg"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 288px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S4duUZMe0pI/AAAAAAAAAME/jMMfpP8MEk0/s320/20060418-india-pakistan-border.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5442439971340210834" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S4duKMfZm6I/AAAAAAAAAL8/S2av-t36D3s/s1600-h/Shahid-Malik301.jpg"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 200px; height: 148px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S4duKMfZm6I/AAAAAAAAAL8/S2av-t36D3s/s200/Shahid-Malik301.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5442439796131208098" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S4duB78OgGI/AAAAAAAAAL0/Cpu1qhx-WUw/s1600-h/pakistan-india-2.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 209px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S4duB78OgGI/AAAAAAAAAL0/Cpu1qhx-WUw/s320/pakistan-india-2.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5442439654249758818" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;पाकिस्तान क्या चाहता है ? भारत के साथ सारी दुनिया इस सवाल पर सर पटककर मर जाए लेकिन जवाब नहीं मिल सकता। आखिर ये जवाब इतना मुश्किल क्यों है ? जवाब भी हम जानते हैं। पाकिस्तान के हर बार बदले रंग को देखरक उसके मानसिक मिजाज का पता नहीं चल पा रहा है। कश्मीर को लेकर उसकी मांग को हम जानते हैं। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को लेकर दिया गया उसका बयान भी हम सुन चुके हैं। विदेश सचिव निरुपमा राव से बात करने आए पाकिस्तान के विदेश सचिव सलमान बशीर ने कहा कि आतंकवाद क्या होता है, हमें पता है इसलिए इस पर हमें लेक्चर न दिया जाए। उन्होंने कहा कि वार्ता को 26/11 अटैक से जोड़ना मुनासिब नहीं होगा। भारत को विवाद के मुख्य मुद्दे जम्मू-कश्मीर पर बात करनी चाहिए ताकि दक्षिण एशिया में शांति बहाल हो सके। पाकिस्तान को आतंकवाद की धुरी बताकर भारत बदनाम करता रहा है जबकि सचाई यह है कि पूरे इलाके में आतंकवादी समूह हैं और इनके स्लीपर सेल हैं। बशीर ने भारतीय वार्ताकारों को यह मेसेज भी देने की कोशिश की कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह दक्षिण एशिया में अमन का माहौल चाहते हैं, उनके अजेंडा को विदेश मंत्रालय के अधिकारी आगे बढ़ाएं। बशीर ने कहा कि हम आतंकवाद पर भारत के साथ सहयोग को तैयार हैं। हम चाहेंगे कि दोनों देश खुफिया जानकारियों का आदान प्रदान करें। उन्होंने दावा किया कि मैं खुद इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायुक्त को आतंकवादी घटनाओं की गोपनीय जानकारियां देता रहा हूं। लेकिन क्या उन्होंने डेविड हेडली के बारे में भारत को जानकारी दी है, बशीर ने कहा कि गुरुवार को हुई वार्ता में पहली बार भारत की ओर से हेडली के बारे में पूछा गया है। मिस्टर हेडली अमेरिकी नागरिक हैं और मैं उनके बारे में मीडिया से ही जानता हूं। निरुपमा राव ने बशीर से कहा कि भारत ने पाकिस्तान से बातचीत के लिए गंभीर और सार्थक कदम उठाए हैं लेकिन आतंकवादी हरकतों से ये सब निरर्थक साबित हुए। वास्तव में 2004 से 2007 के दौरान जो भी विश्वास बहाल हुआ था, मुंबई हमले ने उसे खत्म कर दिया। हाल में पुणे में जो हमला हुआ, उसने एक बार फिर हमें याद दिलाया कि हमारे लोग अब भी आतंकवादी हमलों के शिकार हो रहे हैं। निरुपमा ने बशीर से कहा कि आतंकवाद से कोई बात नहीं बनती। पाकिस्तान की यह ड्यूटी बनती है कि वह अपनी धरती से आतंकवादी गुटों का सफाया करे और मुंबई हमले के दोषियों को सजा दे। पाकिस्तान में अब भी लश्कर और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठन सक्रिय हैं। वहां से भारत में हिंसा फैलाने की बातें होती हैं। पाकिस्तान इस पर रोक लगाए। बशीर को ध्यान दिलाया गया कि इन नेताओं ने हाल ही में किस तरह हिंसा भड़काने की बातें की हैं, इस पर बशीर ने कहा कि ऐसे सार्वजनिक भाषणों पर रोक लगाने का कानून हमारे यहां नहीं है। निरुपमा ने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत आतंकवाद से मुक्त माहौल में ही हो सकती है। यदि पिछली वार्ताओं को आगे बढ़ाने की बात की जाती है तो जरूरी है कि आतंकवाद पर लगाम लगाने की कोशिश की जाए। इन बयानों कितना सच है और कितना झूठ ये बताने का ज़रूरत शायद नहीं है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-9175710336495304331?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/9175710336495304331/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/02/blog-post_6774.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/9175710336495304331'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/9175710336495304331'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/02/blog-post_6774.html' title='&apos;लेक्चर मत दो&apos;'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S4duUZMe0pI/AAAAAAAAAME/jMMfpP8MEk0/s72-c/20060418-india-pakistan-border.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-5254955695163679494</id><published>2010-02-23T01:08:00.000-08:00</published><updated>2010-02-23T01:36:44.254-08:00</updated><title type='text'>दीदी की रेल...पास या फेल ?</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S4Ohia9wWaI/AAAAAAAAALM/KQ9SHwq7z4k/s1600-h/Mamata%2520Banerjee.jpg"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 226px; height: 320px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S4Ohia9wWaI/AAAAAAAAALM/KQ9SHwq7z4k/s320/Mamata%2520Banerjee.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5441370387519658402" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S4OhcyMNJpI/AAAAAAAAALE/q4r-I1bXw2Q/s1600-h/mumbai-train.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 253px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S4OhcyMNJpI/AAAAAAAAALE/q4r-I1bXw2Q/s320/mumbai-train.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5441370290675066514" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S4OhWRqLC_I/AAAAAAAAAK8/mrcm6EIN64o/s1600-h/train.gif"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 312px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S4OhWRqLC_I/AAAAAAAAAK8/mrcm6EIN64o/s320/train.gif" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5441370178863172594" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;24 फरवरी जैसे-जैसे नजदीक आ रही है वैसे-वैसे दिल की धड़कने तेज हो रही हैं। सांसें अटकी हैं। डर लग रहा है कहीं नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पटना जाने वाली उसी ट्रेन की सेकेंड क्लास टिकट खरीदने के लिए जेब से ज्यादा पैसे तो खर्च नहीं करने पड़ेंगे। मामा के घर कानपुर जाने से पहले 10 बार सोचने की नौबत तो नहीं आएगी। बड़े चाचा गोरखपुर में रहते हैं। कहीं उनके बुलावे पर बहाना तो नहीं बनाना पड़ेगा। जी हां रेल बजट आने वाला है। एक साल से घर का बजट आर्थिक मंदी ने बिगाड़ा है। घर के कुछ बर्तन संभाल के इकठ्ठा किए तो महंगाई ने उसे तितर-बितर कर दिया। शहर में रहने वालों को गांव के अनाज का सहारा था। लेकिन डर है कि कहीं रेलवे का बजट बिगड़ गया तो गांव जाने का हालत भी नहीं रहेगी। लालू यादव का रेलवे बजट लंदन के मैनेजमेंट वालों को भी भाया। लेकिन ममता बनर्जी का पिछला रेल बज़ट कुछ खास नहीं रहा भले ही &lt;br /&gt;पिछले साल जुलाई में रेल मंत्री की अपनी दूसरी पारी के पहले बजट में ममता ने यात्री किराये और माल भाड़े में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं की थी। रेलवे के साथ दुखद यह है कि इससे पिछले साल रेल मंत्री लालू प्रसाद ने भी चुनावी साल की वजह से किरायों में बढ़ोतरी नहीं की थी। इसका नतीजा यह हुआ कि पिछले 2 साल से रेलवे के किराये बढ़ोतरी से हासिल होने वाले अडिशनल रेवेन्यू में किसी तरह का इजाफा नहीं हो पाया है। पिछले 2 साल में रेलवे से माल की आवाजाही और पैसेंजर्स ट्रैफिक में काफी बढ़ोतरी हुई है, पर 9 परसेंट की ऊंची महंगाई दर की वजह से इस अतिरिक्त मुनाफे का कुछ खास असर नहीं दिख पाया है। दिलचस्प ये है कि लालू प्रसाद या ममता बनर्जी को किसी ने आम आदमी पर 'मेहरबानी' दिखाने, धड़ल्ले से नई योजनाएं शुरू करने, अपने-अपने चुनावी क्षेत्रों में नई ट्रेनों की संख्या या फ्रीक्वेंसी बढ़ाने से जुड़े कदम उठाने से किसी ने रोका भी नहीं। ऐसे हालत में जाहिर है कि इस बार जब रेल बजट पेश किया जाएगा तो रेल मंत्री को कई तरह की चुनौतियों से दो-चार होना होगा। &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;पैसेंजर किराया और माल भाड़ा &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;रेलवे रोजाना 20 लाख टन माल और 1 करोड़ 80 लाख पैसेंजर्स ढोता है। रेलवे के रेवेन्यू का 70 परसेंट हिस्सा माल भाड़े और बाकी 30 परसेंट पैसेंजर्स किराये से आता है। 2009-10 के लिए पैसेंजर किराये से होने वाली आमदनी 25 हजार करोड़ रुपये रहने के आसार हैं, जो 2008-09 में 22 हजार 330 करोड़ रुपये थी। पर मौजूदा चलन को देखते हुए ममता बनर्जी शायद ही पैसेंजर्स किराये में कोई बढ़ोतरी करें। ऐसे में रेलवे का रेवेन्यू बढ़ाने के लिए रेल मंत्री के पास माले भाड़े में थोड़ी बढ़ोतरी करनी होगी। साल 2007-08 में रेलवे ने 794.21 मिलियन टन माल ढोया। उसके अगले साल यानी 2008-09 में इसमें करीब 7 परसेंट की बढ़ोतरी हुई और यह 850 मिलियन टन हो गया। कारोबारी साल 2009-10 में इसके 882 मिलियन टन का टारगेट रखा गया है। 2009-10 के लिए माल भाड़े से होने वाली आमदनी का लक्ष्य 59 हजार 59 करोड़ रुपये रखा गया है, जो 2008-09 में 54 हजार 293 करोड़ रुपये था। पिछले साल (2009-10) इकॉनमी के मंदी की गिरफ्त में होने की वजह से माल भाड़े में बढ़ोतरी नहीं की गई। पर इस बार हालात सुधरे हैं और माल भाड़े में बढ़ोतरी की जानी चाहिए। रेलवे के जरिये लौह अयस्क, कोयले और सीमेंट की आवाजाही बड़े पैमाने पर होती है। इनके लिए भाड़ा बढ़ाकर रेल मंत्री रेलवे का बटुआ कुछ भर सकती हैं। पर खाने के सामान, फर्टिलाइजर जैसी चीजों की बड़े पैमाने पर आवाजाही होने के बावजूद इनके भाड़े में बढ़ोतरी करना शायद ममता के लिए मुश्किल हो, क्योंकि वह अपने वोट बैंक को नाराज नहीं करना चाहेंगी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;रेलवे ट्रैक पर दबाव &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;ट्रैक रेलवे ट्रांसपोर्टेशन की रीढ़ हैं। लिहाजा इनकी मेंटिनेंस बेहद जरूरी है। कोई भी ट्रैक 700-800 ग्रॉस मिलियन टन (जीएमटी) ढुलाई के बाद मरम्मत मांगता है। पर ऐसा हो नहीं पा रहा है। जाहिर है इस बार रेल बजट में में नई ट्रेनों का ऐलान होगा और ट्रैक्स पर बोझ और बढ़ेगा। इसे डील करने की चुनौती ममता के सामने होगी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;प्राइवेट इनवेस्टमेंट पर निर्भरता &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;अब तक खांटी राजनीति करती रहीं और बिजनस सेंटिमेंट से काफी दूर रहीं ममता बनर्जी को लगता है यह समझ में आ गया है कि रेलवे के लिए फंड का इंतजाम पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिये किया जा सकता है। ऐसा माना जा रहा है कि इसी वजह से ममता ने कुछ बिजनस-फ्रेंडली चेहरों को अपने इर्दगिर्द रखना शुरू कर दिया है। इन्हीं में से एक अहम चेहरे हैं - फिक्की के सेक्रेटरी जनरल अमित मित्रा। रेलवे बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया है कि साल 2020 तक रेलवे में करीब 14 लाख करोड़ रुपये के निवेश की दरकार होगी और रेलवे इसका करीब 64 परसेंट हिस्सा खुद जुटाएगा, जिसमें पीपीपी की बड़ी भूमिका होगी। पर बड़ी दिक्कत यह है कि लालफीताशाही की दिक्कतों को देखते हुए कॉरपोरेट सेक्टर अच्छी दिलचस्पी रेलवे में नहीं दिख रही। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लोडिंग की समस्या &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;रेलवे ने 11वीं योजना के अंत तक (31 मार्च 2012 तक) 1150 मिलियन टन फ्रेड वॉल्यूम का लक्ष्य रखा है। फ्रेड में 7 परसेंट की बढ़ोतरी को देखने हुए वैगन की कमी की चुनौती रेलवे के सामने होगी।  &lt;br /&gt; तो देखिए भैया 24 तारीख को क्या होता। मीठा खाएंगे या दांत चबाएंगे अब ये दीदी पर निर्भर है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-5254955695163679494?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/5254955695163679494/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/02/blog-post_7523.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/5254955695163679494'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/5254955695163679494'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/02/blog-post_7523.html' title='दीदी की रेल...पास या फेल ?'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S4Ohia9wWaI/AAAAAAAAALM/KQ9SHwq7z4k/s72-c/Mamata%2520Banerjee.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-4047327429285279095</id><published>2010-02-23T00:36:00.000-08:00</published><updated>2010-02-23T01:05:02.322-08:00</updated><title type='text'>क्या बातचीत से मानेंगे ?</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S4OaMs-A9WI/AAAAAAAAAK0/d66Oaph3M98/s1600-h/Naxal-india.jpg"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 213px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S4OaMs-A9WI/AAAAAAAAAK0/d66Oaph3M98/s320/Naxal-india.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5441362317814068578" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S4OaG0Y90PI/AAAAAAAAAKs/1WlIWGakNJQ/s1600-h/p-chidambaram.jpg"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 250px; height: 275px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S4OaG0Y90PI/AAAAAAAAAKs/1WlIWGakNJQ/s320/p-chidambaram.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5441362216726941938" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S4OaAj_atbI/AAAAAAAAAKk/qXTM7yvYlV0/s1600-h/1214327234725_maoistwomen.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 286px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S4OaAj_atbI/AAAAAAAAAKk/qXTM7yvYlV0/s320/1214327234725_maoistwomen.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5441362109245601202" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;भारत आतंकवाद से प्रभावित है। आतंकवाद देश की सबसे बड़ी समस्या है। रक्षा बजट भी काफी बढ़ा है। देश के विकास में होने वाला खर्च रक्षा के मुकाबले खर्च होने वाली रकम से काफी कम है। विदेशी आतंकवाद से जख्मी भारत को मरहम तो मिल रहा लेकिन माओवाद का दर्द ज़रूर मिला है। पहले से ही घायल ही चिड़िया को जख्मों को कुरेदने की हालत हो गई है हमारी। बिहार, जारखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल को माओवादियों ने 'लाल' रंग से रंग दिया है। माओवादियों ने हजारों लोगों को बघर कर दिया। लेकिन गलती सिर्फ हाथ में बंदूक लेकर कानून तोड़ने वाले माओवादियों की ही नहीं है। आखिर इनके हाथ में बंदूक दी किसने। 'लाल'कुर्सी पर बैठे कछ सफेदपोश आकाओं की मेहरबानी है कि वो हाथ जो कभी खेतों में हल चलाते थे वो हाथों में बंदूक लेकर अपने ही निर्दोष भाईयों का खून बहाते हैं। मिदनापुर के खेतों का रंग हरा से लाल हो गया है। हाल ही में बंगाल के एक गांव में नक्सली हमले की खबर आई। पता चला कि हमले को अंजाम देने वाले 15 साल के कुछ बच्चे थे। जिनके हाथों में किताबें होनी चाहिए थीं वो हाथों में हथियार लेकर अपने साथियों की हत्या कर रहे थे। बच्चो बूढ़े और महिलाएं सभी हाथों में हथियार लेकर घूम रहे हैं। एक सच ये भी है कि नक्सलियों को मारने के बहाने प्रशासनिक कार्रवाई में कई निर्दोषों को सजा मिली। जुल्म इतने हुए कि हल छोड़कर हाथों ने हथियार थाम ही लिए। उन्हे मजबूर किया गया। शिक्षा का अभाव और जुल्म की टूटती सीमा पार करने के बाद शायद अंजाम यही होना था। पहले स्थित ऐसी बन गई कि रास्ता नहीं बचा और उसके बाद उनका अंत ही रास्ता बन गया। नक्सली भी खेल को समझ गए और फिर लड़ाई आर-पार की शुरू हो गई। लडाई का नतीजा हम रोज देख रहे हैं। खबर है कि नक्सलियों ने सीज़फायर का ऐलान किया है। गृहमंत्री ने कई बार नक्सलियों को हथियार रखकर बात करने का प्रस्ताव दिया है। वहीं माओवादियों की ओर से की गई संघर्ष विराम की सशर्त पेशकश पर सरकार ने कहा है कि कोई पूर्व शर्त स्वीकार नहीं करेगी और माओवादियों से कहा कि वे सामने आएं तथा बयान जारी कर हिंसा त्यागने की बात कहें। अब जब बात करने की नौबत आई है तो सरकार ने किसी भी शर्त को जंगलों में छोड़ आने की शर्त रख दी है। जिसने बंदूक उठाने पर मजबूर किया आज वो शर्त ना रखने की शर्त रख रहे हैं। अब शर्त भी सुनिए। माओवादियों ने संघर्ष विराम के लिए सरकार के सामने शर्त रखी है कि वह 72 दिन के लिए उनके खिलाफ अभियान बंद करे और बातचीत में मध्यस्थों को शामिल करे। आखिर बुरा क्या है अगर नक्सली इन 72 दिनों तक अपने हथियारों का मुंह बंद रखें। कमसेकम इन 72 दिनों तक किसी बेकसूर का खून तो नहीं बहेगा। ऑपरेशन ग्रीन हंट जबसे चलाया गया है तबसे नक्सली वारदातों में बढ़ोत्तरी हुई है। हम ये भी नहीं कहते कि नक्सलियों पर कार्रवाई ना हो। खून बहाने वाला हर शख्स अपराधी है। और उसे सज़ा मिलनी चाहिए। गृहमंत्री ने कहा है कि वो सीपीआई (माओवादी) की ओर से एक साधारण और संक्षिप्त सा बयान चाहते हैं जिसमें वो ये कहें कि हम हिंसा छोड़ देंगे और हम बातचीत के लिए तैयार हैं।' चिदंबरम ने कहा है कि वो चाहते हैं कि ये बयान गृह मंत्रालय के नंबर - 01।-23093155 पर फैक्स कर दिया जाए। चिदंबरम जी ने नक्सलियों को रास्ता तो दे दिया है। लेकिन रास्ते रोड़े उन्होने खत्म नहीं किए हैं। ज़रूरत है कि नक्सलियों को शिक्षा दी जाए। उन्हे समाज की मुख्यदारा के साथ जोड़ा जाए। क्योंकि भारत का संविधान हर नागरिक को समान जीवन जीने का अधिकार देता है। और इस अधिकार पर उनका भी हक है। अब इंतजार है नक्सलियों के अगले कदम का। साथ ही सवाल है कि क्या भारत ऑपरेशन ग्रीन हंट को कुछ दिन के लिए रोकेगा। और इंतजार करेगा नक्सलियों के सामने आने का। ताकि नक्सलपीड़ित इलाकों में ज़िंदगी को भय ना हो।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-4047327429285279095?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/4047327429285279095/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/02/blog-post_23.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/4047327429285279095'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/4047327429285279095'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/02/blog-post_23.html' title='क्या बातचीत से मानेंगे ?'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S4OaMs-A9WI/AAAAAAAAAK0/d66Oaph3M98/s72-c/Naxal-india.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-4636626981544413949</id><published>2010-02-18T23:59:00.000-08:00</published><updated>2010-02-19T00:28:09.307-08:00</updated><title type='text'>ई है भोजपुरिया IPL</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S35LjB__jWI/AAAAAAAAAKc/2xxyBpquq4U/s1600-h/amitabh_bachchan.jpg"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 151px; height: 200px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S35LjB__jWI/AAAAAAAAAKc/2xxyBpquq4U/s200/amitabh_bachchan.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5439868465114484066" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S35LdYer2EI/AAAAAAAAAKU/Ianwswg4Q94/s1600-h/ipl.jpg"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 135px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S35LdYer2EI/AAAAAAAAAKU/Ianwswg4Q94/s320/ipl.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5439868368069580866" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S35LXjuxQGI/AAAAAAAAAKM/E18QGYToGPI/s1600-h/MANOJ.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 256px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S35LXjuxQGI/AAAAAAAAAKM/E18QGYToGPI/s320/MANOJ.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5439868268010618978" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;शाहरुख खान, शिल्पा शेट्टी और प्रीति जिंटा के बाद अब मशहूर भोजपुरी कलाकार मनोज तिवारी भी इंडियन प्रीमियर लीग से नाता जोड़ने की कवायद में हैं और इस सुपरहिट ट्वेंटी20 क्रिकेट लीग में भोजपुरिया इलेवन उतारने के सिलसिले में वह जल्दी ही आईपीएल कमिश्नर ललित मोदी से मिलेंगे। तिवारी ने हैदराबाद से से बातचीत में कहा, मेरा मानना है कि इतने बड़े टूर्नामेंट में एक टीम भोजपुरिया क्षेत्र की भी होनी चाहिए, जहां क्रिकेट इतना लोकप्रिय है और देखा जाए तो भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी भी उस इलाके से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कहा- हम 7 मार्च को दो टीमों के लिए लगने वाली बोली में ही हिस्सा लेना चाहते थे लेकिन लगता है कि देर हो गई। वैसे हम ललित मोदी से मिलेंगे और देखते हैं कि क्या हो सकता है। उनसे मिलने के बाद ही आगे की रणनीति तय की जाएगी। तिवारी ने कहा कि वह सुपरस्टार अमिताभ बच्चन को भी अपनी टीम से जोड़ना चाहते हैं। उन्होंने कहा- मेरा प्रयास होगा कि अमिताभ बच्चन जी भी इस प्रोजेक्ट से जुड़े क्योंकि भोजपुरी से उनका भी खासा लगाव है। अमिताभ ने दो भोजपुरी फिल्मों और गंगोत्री में तिवारी के साथ काम किया है। तिवारी ने कहा,हम टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को भोजपुरिया इलेवन का ब्रैंड ऐंबैसडर बनाना चाहते हैं। गौरतलब है कि रांची के रहने वाले धोनी आईपीएल में चेन्नै सुपर किंग्स के कप्तान हैं। तिवारी ने यह भी कहा कि वह टीम में अनिवार्य 4 विदेशी खिलाड़ी भी भारतीय मूल के रखने के पक्षधर हैं। उन्होंने कहा- हमने इस प्रोजेक्ट पर विस्तार से चर्चा की है। हमारी टीम में भी आईपीएल के नियमों के तहत विदेशी खिलाड़ी होंगे लेकिन वे भारतीय मूल के ही होंगे। विदेशों में जा बसे उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों से संपर्क करके उन्हीं में से प्रतिभावान क्रिकेटरों की खोज की जाएगी। टीम खरीदने पर होने वाले भारी खर्च के बारे में उन्होंने कहा कि पैसा कोई मसला नहीं है। उन्होंने कहा- हमारा मकसद भोजपुरी क्षेत्र और भाषा का प्रचार करना है। मैने अपनी हर फिल्म के पारिश्रमिक से दो लाख रुपये भोजपुरी इलाके में खेल और खिलाड़ियों पर खर्च करने का फैसला किया है। ये पैसा क्रिकेट पर ही नहीं बल्कि बाकी खेलों पर भी खर्च किया जाएगा। गौरतलब है कि आईपीएल की चकाचौंध से सिने सितारों के आकर्षित होने का यह नया मामला नहीं है। सुपरस्टार शाहरुख कोलकाता नाइट राइडर्स के मालिक हैं जबकि शिल्पा शेट्टी राजस्थान रायल्स और प्रीति जिंटा किंग्स इलेवन पंजाब की सह मालिक हैं। अक्षय कुमार दिल्ली डेयरडेविल्स के ब्रांड दूत रह चुके हैं तो कटरीना कैफ रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की। दक्षिण भारत के कई सितारे चेन्नै सुपर किंग्स के प्रचार का हिस्सा रहे हैं। &lt;br /&gt; &lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-4636626981544413949?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/4636626981544413949/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/02/ipl.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/4636626981544413949'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/4636626981544413949'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/02/ipl.html' title='ई है भोजपुरिया IPL'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S35LjB__jWI/AAAAAAAAAKc/2xxyBpquq4U/s72-c/amitabh_bachchan.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-7344930874452878038</id><published>2010-02-18T23:44:00.000-08:00</published><updated>2010-02-18T23:47:19.473-08:00</updated><title type='text'>ये इंडिया है...</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S35B_jrZE9I/AAAAAAAAAKE/wzQgelv0khg/s1600-h/shepherd_judge.jpg"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 256px; height: 320px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S35B_jrZE9I/AAAAAAAAAKE/wzQgelv0khg/s320/shepherd_judge.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5439857960074941394" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S35B7FMHjfI/AAAAAAAAAJ8/j6j4wWBbBNE/s1600-h/mecca.jpg"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 300px; height: 316px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S35B7FMHjfI/AAAAAAAAAJ8/j6j4wWBbBNE/s320/mecca.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5439857883171229170" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S35B1SzRDpI/AAAAAAAAAJ0/jAt3BeO0-JM/s1600-h/Hindu%2520Gods%2520%26%2520Goddesses%2520-%2520Vinayagar%252003.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 277px; height: 320px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S35B1SzRDpI/AAAAAAAAAJ0/jAt3BeO0-JM/s320/Hindu%2520Gods%2520%26%2520Goddesses%2520-%2520Vinayagar%252003.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5439857783745875602" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;हिंदुस्तान आस्था प्रधान देश है। गीता यहीं लिखी गई है। गीता में लिखा है कि फल की चिंता किए बिना कर्म करो। लेकिन भारतीयों ने इस उपदेश को अपनी सहूलियत के हिसाब से बदल लिया है। कर्म को छोड़कर सारा ध्यान धर्म और आस्था पर है। खबर सुनिए उत्तरपूर्व भारत के शिलांग के एक स्कूल ने दिल्ली के एक पब्लिशर के खिलाफ जीसस क्राइस्ट की 'अभद्र' तस्वीर छापने के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई है। आरोप में कहा गया है कि पब्लिशर ने अपनी राइटिंग टेक्स्ट बुक में जीसस को एक हाथ में सिगरेट और दूसरे हाथ में बियर कैन लिए दिखाया है। सेंट जोसेफ गर्ल्स हायर सेकंडरी स्कूल के अधिकारियों ने स्काईलाइन पब्लिकेशन पर यह आरोप लगाया है। इस पब्लिकेशन की राइटिंग टेक्स्ट बुक्स पहली से चौथी क्लास के बच्चों को दी जाती हैं। पुलिस ने ऐसी 30 टेक्स्ट बुक्स जब्त कर ली हैं। स्कूल अधिकारियों ने बच्चों से बाकी टेक्स्ट बुक्स लौटाने को कहा है। स्कूल ने फौरन बच्चों से राइटिंग बुक्स लौटाने को कहा। पहली क्लास के लिए बनाई गई राइटिंग बुक में आई (I)अक्षर के लिए IDOL शब्द का इस्तेमाल किया गया है। IDOL के साथ में जीसस की एक तस्वीर छापी गई है। इसी तस्वीर को लेकर स्कूल अधिकारी नाराज हैं। ऐसी ही तस्वीर दूसरी, तीसरी और चौथी क्लास की राइटिंग बुक्स में भी हैं। &lt;br /&gt;                   ये मामला कितना गंभीर है और गंभीर है भी या नहीं इसका फैसला आप करिए। अब आस्था का एक दूसरा उदाहरण देखि कुछ अरसे पहले 'उदयीमान भारतीय समाज में शिक्षक' शीर्षक वाली किताब ने उत्तर प्रदेश के मुस्लिमों और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। इस किताब में कथित तौर पर पैगंबर मोहम्मद की तस्वीर छपी थी। गौरतलब है कि इस्लाम धर्म में पैगंबर की तस्वीर छापना या मूर्ति बनाने की इजाजत बिल्कुल नहीं है। यह तस्वीर किताब के पेज संख्या 403 पर मौजूद 'मानव उत्थान के लिए विभिन्न धर्मों का योगदान' नाम के चैप्टर के तहत छपी। किताब के लेखक युवराज दत्त हैं, जो लखीमपुर खीरी पोस्ट ग्रैजुएट कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर हैं। दत्त ने इस बाबत पूछे जाने पर बताया कि पैगंबर मोहम्मद की ढेर सारी तस्वीरें इंटरनेट पर मौजूद हैं और किताब में छपी तस्वीर वहीं से डाउनलोड की गई है। उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा निदेशक मिया जान ने भी कहा कि 'ये किताब कभी भी पाठ्यपुस्तक के तौर पर नहीं पेश की गई। और तो और जिला प्रशासन ने इस किताब के प्रकाशन और बिक्री पर प्रतिबंध लगा रखा है। ये तो हुआ दूसरा उदाहरण। घटनाएं गिनते जाएं तो दिन बीत जाए। खबर दिल्ली से पढ़िए। दिल्ली में इंटरनैशल ब्रैंड के आइसक्रीम आउटलेट हागेन डाज़ का पहला स्वाद ही दिल्लीवासियों का जायका बिगाड़ गया। पिछले दिनों हागेन डाज़ का राजधानी में पहला आउटलेट साउथ दिल्ली के एक मॉल में खुला लेकिन उसके प्रमोशन के लिए लगाए गए बैनरों से लोग काफी आहत हुए। बैनर पर लिखा था , एंट्री सिर्फ इंटरनैशनल पासपोर्ट धारकों और इंटरनैशनल ट्रैवलर्स को मिलेगी। इस मसले पर काफी तीखी प्रतिक्रिया आने के बाद भारत में इस ब्रैंड का मालिकाना हक रखने वाली कंपनी जनरल मिल्स इंडिया को माफी मांगनी पड़ी।  &lt;br /&gt;कंपनी ने कहा कि ' हमारे रेस्तरां में किसी के भी आने पर रोक नहीं है। हागेज डाज़ के प्रॉडक्ट और रेस्तरां भारत में हर कंज़्यूमर के लिए उपलब्ध है और रहेगा। रेस्तरां के दरवाजे सबके लिए खुले हैं और किसी भी आधार पर किसी को भी प्रतिबिंधित करने का कोई सवाल ही नहीं है।' उन्होंने कहा कि जिन पोस्टरों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं वे मॉल में हागेन डाज़ खुलने की सूचना देने के लिए लगाए गए थे। इसमें लिखे मेसेज का उद्देश्य यह बताना था कि आप इंटरनैशनल ब्रैंड की आइसक्रीम का मज़ा यहीं पर ले सकते हैं। मसलन - फ्रांस जाए बिना फ्रेंच रिवेरिया का स्वाद लिया जा सकता है। दुर्भाग्य से पोस्टर में लिखे ' इंटरनैशनल पासपोर्ट रखने वाले ' मेसेज को लेकर गलतफहमी फैल गई , जबकि हमारा ऐसा कोई इरादा नहीं था। हमारे मेसेज का गलत संदेश जाने से भारतीय होने के नाते कई लोगों की भावनाएं आहत हुई होंगी और इसके लिए हम माफी मांगते हैं।   आस्था कितनी आसानी से व्यथित हो जाती है इसका उदाहरण देखने को मिला सात समंदर पार अमेरिका में जहां फॉक्स न्यूज पर इसके ऐंकर ग्लेन बैक ने कहा कि गंगा का नाम ही भद्दा सा है और सुनने में बीमारी सा लगता है। उन्होंने यह बात अपने शो 'द वन थिंग' में कही है। इस पर अमेरिका, इंग्लैंड और अन्य देशों के हिन्दू संगठनों ने फॉक्स चैनल से माफी मांगने को कहा। अमेरिका में ही फास्ट फूड चेन कंपनी 'बर्गर किंग' ने स्पेन में प्रदर्शित धार्मिक आस्था पर चोट करने वाले विज्ञापन के लिए हिन्दुओं से माफी मांगी। &lt;br /&gt;बर्गर किंग ने इस विज्ञापन में लक्ष्मी जी को मांस से बने सैंडविच और अन्य खाद्य पदार्थो पर बैठे दिखाया था जिसके नीचे लिखा था स्नैक दैट इज़ सैक्रेड यानी कि पवित्र नाश्ता है। &lt;br /&gt;गौरतलब है कि अमेरिका की ही एक शराब कंपनी ने बीयर की बोतल पर गणेश की तस्वीर छाप दी थी। दुनियाभर में हिन्दुओं के विरोध के चलते शराब कंपनी ने भी माफी मांगी और बीयर की बोतल से गणेश का चित्र हटा दिया।  मैंने आपको कुछ उदाहरण दिए। लेकिन इससे कहीं ज्यादा आपने अपने आस-पास देखा होगा। तो भइया आखिर में आप भी वहीं कहेंगे जो हम कहते हैं। ये इंडिया है....&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-7344930874452878038?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/7344930874452878038/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/02/blog-post_6248.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/7344930874452878038'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/7344930874452878038'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/02/blog-post_6248.html' title='ये इंडिया है...'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S35B_jrZE9I/AAAAAAAAAKE/wzQgelv0khg/s72-c/shepherd_judge.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-1150756452785551455</id><published>2010-02-18T23:02:00.000-08:00</published><updated>2010-02-18T23:23:06.636-08:00</updated><title type='text'>जनानियों ! घाट पर साबुन मत लगाना</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S348Il8NGKI/AAAAAAAAAJs/jJGT26pBqMk/s1600-h/DSC_0294.jpg"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 200px; height: 136px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S348Il8NGKI/AAAAAAAAAJs/jJGT26pBqMk/s200/DSC_0294.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5439851518231386274" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S347_4gM32I/AAAAAAAAAJk/x-T1d9Ji1sM/s1600-h/DSC_0292.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 213px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S347_4gM32I/AAAAAAAAAJk/x-T1d9Ji1sM/s320/DSC_0292.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5439851368595382114" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S3475HMwSCI/AAAAAAAAAJc/zwRflGp1Xqg/s1600-h/DSC_0300.jpg"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 400px; height: 266px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S3475HMwSCI/AAAAAAAAAJc/zwRflGp1Xqg/s400/DSC_0300.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5439851252281264162" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;कोलायत की दीवारों पर कुछ इबारतें बिखरी पड़ी थीं,अजीब-ओ-गरीब विज्ञापनों की शक्ल में। एक दास्तान है, जो राजस्थान के बीकानेर से करीब 40 किलोमीटर इस जगह पर पसरी हुई है। इस दास्तान का नाम है श्रीकोलायत। यह एक छोटा सा कस्बा है, जहां कपिल मुनी का आश्रम हुआ करता था। अब यहां एक तीर्थ स्थल है। अजीब बात है कि हरियाणा के कैथल जिले में भी एक जगह है जहां कपिल मुनी का आश्रम हुआ करता था। अब वहां एक तीर्थ है। और इस जगह का नाम है - कलायत। कैसे ये दोनों जगहें एक जैसी बनीं, यह तो अभी मैं नहीं जान पाया, लेकिन श्रीकोलायत के उस तीर्थ पर बड़े क्रिएटिव विज्ञापन नजर आए। विवेक आसरी ने इन जगहों का मुआयना किया। संसार में रचनात्मकता का सबसे बड़ा उदाहरण यहा मिलेगा आपको। सृजन के बाद मनुष्य कितना दूरगामी हुआ,इसका पता हम अपने चारों ओर देखकर लगा सकते हैं। आवश्यकता आविष्कार की जननी बन गई और सब कुछ यहां तक पहुंच गया। महिलाओं ने भी घर के आंगन से कदम बाहर बढ़ाए और आसमान पर अपना नाम लिख दिया। मन नहीं भरा तो चांद पर भी कदम जमा दिए। ईश्वर की इस दुनिया में एक विचित्र स्वभाव है। इसे जलन या फिर द्वेष नाम भी दे सकते हैं। ईश्वर ने नर और नारी को बनाया। नरों ने आगे निकलने की दौड़ में सदा आगे रहने के लिए नारियों को बंधनों में बांध दिया। उदाहरण आपने भी कई देखे होंगे। धीरे-धीरे रिश्ता भेदभाव तक पहुंच गया। कलायत घाट इसका सबसे बेहतर उदाहरण है। इस घाट पर महिलाओं को नहाने की इजाजत नहीं है लेकिन पुरुष यहां भांग भी पिएं तो कोई बात नहीं। कभी आप जाएं तो इस घाट की शोभा देख सकते हैं। बस देखिए किसी से ये सवाल ना पूछ बैठिएगा कि आखिर आपको जन्म देने वाली महिलाओं को इस घाट पर आने से क्यों रोका गया है। नतीजा कुछ भी हो सकता है। क्योंकि भारत में आस्था कभी-कभी अंधविश्वास बन जाती है। और अंधा कुछ भी कर सकता है...&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-1150756452785551455?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/1150756452785551455/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/02/blog-post_9347.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/1150756452785551455'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/1150756452785551455'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/02/blog-post_9347.html' title='जनानियों ! घाट पर साबुन मत लगाना'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S348Il8NGKI/AAAAAAAAAJs/jJGT26pBqMk/s72-c/DSC_0294.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-2458345635249624243</id><published>2010-02-18T20:45:00.000-08:00</published><updated>2010-02-18T20:58:46.272-08:00</updated><title type='text'>एक और QUIT !</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S34afWhYDnI/AAAAAAAAAJM/DfjPoMtxn68/s1600-h/suicide.jpg"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 319px; height: 320px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S34afWhYDnI/AAAAAAAAAJM/DfjPoMtxn68/s320/suicide.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5439814525833973362" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;Work hard Until Scceed ! दीवार पर लिखे ये वो शब्द हैं जो इशारा करते हैं कि बीटेक की छात्रा प्रगति सिंह के दिमाग में क्या चल रहा था। प्रगति मेहनत को करना चाहती थी लेकिन उम्मीदों का बढ़ता बोझ उसके रास्ते में रुकावट बन रहा था। गाज़ियाबाद के इस प्राइवेट हॉस्टल में अपनी रूम पार्टनर के साथ रहने वाली प्रगति ने इसी वजह से मौत को गले लगा लिया। प्रगति ग्रेटर नोएडा के विश्वेश्वर्य संस्थान से बीटेक कर रही थी। प्रगति गाज़ियाबाद के राजनगर इलाके के इसी हॉस्टल में रहती थी। पिछले कई दिनों से प्रगति बेहद परेशान थी। पुलिस को प्रगति के कमरे से एक सुसाइड नोट मिला है। मरने से पहले प्रगति ने अपने मन की बात कागज़ पर उतार दिए। प्रगति ने लिखा है..'हम पढ़ाई की वजह से डिप्रेशन में हूं। हम बीकॉम करना चाहते थे लेकिन हमारा परिवार चाहता था कि हम बीटेक करें। पढ़ाई को लेकर हम बहुत चिंतित हैं। जब कोई अपना काम पूरा मन लगा के करता है तो लोग उसे हमेशा गलत और बुरा क्यों कहते हैं। जब घर में भी हम अपना मन लगाके पढ़ना चाहते थे तो आप कहते थे कि हम अपने आप में ही रहते थे और घमंडी हैं। हम हमेशा दूसरों के लिए और अपने परिवार के लिए ही सोचते थे। अब हम हॉस्टल में आ गए हैं तो सोचते हैं कि अगर हम अच्छा नहीं करेंगे तो आप क्या सोचेंगे। हम हॉस्टल में अपना सारा ध्यान खो बैठे हैं। लेकिन हम उन लोगों की बात ना सुनकर केवल अपने मन की बात सुनते हैं।'   सुसाइड नोट के बाद प्रगति की मौत की वजह का खुलासा हो गया। लेकिन परिवार की उम्मीदें पूरी करने के लिए प्रगति ने अपने सपनों को भुलाने की बहुत कोशिश की।  दिल और दिमाग की लड़ाई में प्रगति हार गई और खुद को मौत के हवाले कर दिया। आमिर खान की हालिय़ा फिल्म 3 ईडियट में भी पढाई के तनाव की वजह से होने वाली मौत को दिखाया गया है। देश भर में भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं।  पढ़ाई का तनाव बढ़ते सुसाइड के मामलो की एक वजह बन गया है। ऐसे में ज़रूरत है कि मां-बाप अपने बच्चों की भावनाएं समझें। क्योंकि माता-पिता का सपोर्ट बच्चों के भावी भविष्य के लिए नींव का पत्थर साबित होता है। मैंने फिल्म देखी। विधू विनोद चोपड़ा ने एक अच्छी लेकिन ऐसी कहानी को चुना जो हमारे-आपके बेहद करीब है। एक लड़का जिसकी उम्मीदें टूट जाती हैं और वो ज़िंदगी से हार जाता है। ज़िंदगी असल ज़िंदगी में भी हारी है। मुंबई में पिछले दिनों कई वारदातें एक साथ हुईं। देश के सभी ब़ड़ों शहरों में ये हादसे आम हो गए हैं। शायद वजह हम जानते हैं। पैदा होते ही बच्चे को डॉक्टर और ईंजीनियर बनने के लिए मजबूर कर दिया जाता है। इससे पहले वो खुद को समझे उसके दिमाग ये भूत घर चुका है कि नंबर उसके 100 ही आने चाहिए वरना उसकी ज़िंदगी बेकार है। कागज़ों पर नंबर 100 बनाने के लिए वो ज़िंदगी के अहम दिन तनाव में बिता देता है। इसे देखकर क्या ये नहीं लगता कि बच्चों की मौत के लिए ज़िम्मेदार उनके मां-बाप ही हैं। मैं ये भी नहीं कहता कि बच्चों पर पढ़ने का दबाव ना हो। लेकिन पढ़ाई को बोझ बनाने के बजाए माता-पिता बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं ना कि उनपर दबाव बनाकर उनकी जान के दुश्मन बन जाएं। &lt;br /&gt;ज़िंदगी एक रेस है लेकिन इसे जीतने के लिए सिर्फ आंख बंद करके दौड़ने की ज़रूरत नहीं है। क्योंकि ये रेस थोड़ी अलग है। इसलिए दौड़ने के लिए रास्ता सही चुनें।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-2458345635249624243?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/2458345635249624243/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/02/quit.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/2458345635249624243'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/2458345635249624243'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/02/quit.html' title='एक और QUIT !'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S34afWhYDnI/AAAAAAAAAJM/DfjPoMtxn68/s72-c/suicide.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-8961511748997112906</id><published>2010-02-18T00:25:00.000-08:00</published><updated>2010-02-18T22:59:40.724-08:00</updated><title type='text'>ऐश्वर्या को टीबी?</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S3z9tsoYMqI/AAAAAAAAAJE/w79jVplSoDg/s1600-h/Paa_Amitabh_Bachchan.jpg"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 235px; height: 320px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S3z9tsoYMqI/AAAAAAAAAJE/w79jVplSoDg/s320/Paa_Amitabh_Bachchan.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5439501411473175202" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S3z9n8JVyDI/AAAAAAAAAI8/GkZXcKRNYws/s1600-h/reiki_small_child.jpg"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 172px; height: 200px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S3z9n8JVyDI/AAAAAAAAAI8/GkZXcKRNYws/s200/reiki_small_child.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5439501312558745650" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S3z9hpr5uEI/AAAAAAAAAI0/y-nf9sDFx0Y/s1600-h/AishwaryaRai.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 227px; height: 320px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S3z9hpr5uEI/AAAAAAAAAI0/y-nf9sDFx0Y/s320/AishwaryaRai.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5439501204524218434" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;बॉलीवुड का शहंशाह दादा बनना चाहता है। जया बच्चन पोते को गोद में खिलाने का ख्वाब दिन में भी देख रही हैं। अभिषेक को चाहिए कोई पापा कहने वाला। खुद ऐश्वर्या भी चाहती हैं उनके घर में कोई ऐसा हो जिसके कपडों पर गिरी सॉस वो साफ करें। जिसका टिफिन बॉक्स तैयार कर उसे स्कूल भेजें। जिसकी शिकायत आने पर स्कूल के प्रिंसिपल से मिलने जाएं। पूरे बच्चन परिवार को चाहिए एक नया मेहमान। लेकिन 'जलसा' और 'प्रतीक्षा' में बच्चे की कलकारी कब गूंजेंगी, इसका जवाब ऐश्वर्य़ा और अभिषेक देने से इनकार करते रहे हैं। &lt;br /&gt;                    अब इस खबर में एक नया ट्विस्ट आ गया है। पहले खबर थी कि ऐश्वर्या बीमार हैं। लेकिन ऐश्वर्या राय की बीमारी और मां न बन पाने की खबरों ने यू टर्न ले लिया है। बताया जा रहा है कि उन्हें पेट का टीबी है। इसके लिए ली जा रही दवाओं के कारण वो प्रेगनेंट नहीं हो पा रही हैं। बीमारी के दौरान प्रेग्नेंसी में खतरा बताया जा रहा है। इससे पहले सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर पति अभिषेक बच्चन ने भी उनकी बीमारी की बात कही थी, लेकिन बीमारी के संबंध में किसी तरह का खुलासा नहीं किया था। फैन्स को इतना ही बताया था कि ऐश धीरे-धीरे ठीक हो रही हैं और जल्द ही फिल्मों में वापसी करेंगी। अपनी बात मजबूत करने के लिए उसी क्रम में अपनी नानी के जन्मदिन पर ऐश्वर्या के भोपाल जने की बात भी कही थी। उसके बाद ऐश और अभिषेक भोपाल भी गए। 37 साल की ऐश्वर्या ने कुछ समय पहले खुद भी मां बनने की मंशा जाहिर की थी। लेकिन उन्होंने भी अपनी बीमारी की बात छिपाए रखी। ऐश की बीमारी से बच्चन परिवार की चिंता बढ़ गई है। माना जा रहा है कि इसी कारण से कुछ समय पहले अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग पर अमीरों को टीबी (द रिच मैन्स टीबी) के बारे में कुछ लिखा था। हालांकि उन्होंने भी कुछ स्पष्ट नहीं किया था, लेकिन उस ब्लॉग को ऐश्वर्या की खबर से जोड़ कर देखने से उनकी नाराजगी साफ उभर आती है। परिवार ने हालांकि सब कुछ वक्त पर छोड़ दिया है, लेकिन कब का सवाल अब भी बना हुआ है। ऐश्वर्या की उम्र ढलती जा रही है। समय जितना गुजरेगा, मां बनने में उतनी ही परेशानी आ सकती है। इसीलिए परिवार को जल्द से जल्द वारिस चाहिए। लेकिन ऐश कब ठीक होंगी और कब वो बच्चन परिवार को वारिस देंगी। इस जवाब का इंतजार हमसे ज्यादा बच्चन परिवार को है।  &lt;br /&gt; http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/5587538.cms&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लेकिन ऐश ने इन खबरों को महज़ अफवाह बताया है। ऐश ने इस खबर का खंडन कर दिया है। ऐश ने कहा कि ये महज़ अफवाह है मैं इन दिनों अब्डॉमिनल टीबी से ग्रस्त हूं और &lt;br /&gt;इसीलिए मैं मां नहीं बन सकती। खबर से तिलमिलाए अमिताभ बच्चन और अभिषेक का खंडन पहले ही आ गया था, लेकिन अब बच्चन बहू ने भी सामने आकर यह क्लियर किया है कि टीबी वाली बात सिरे से बेबुनियाद है। ऐश की शिकायत है कि उनसे बिना क्रॉस चेक किए बीमारी वाली बात लिख दी गई।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-8961511748997112906?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/8961511748997112906/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/02/blog-post_18.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/8961511748997112906'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/8961511748997112906'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/02/blog-post_18.html' title='ऐश्वर्या को टीबी?'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S3z9tsoYMqI/AAAAAAAAAJE/w79jVplSoDg/s72-c/Paa_Amitabh_Bachchan.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-3734817468329734120</id><published>2010-02-17T23:41:00.000-08:00</published><updated>2010-02-18T00:06:32.819-08:00</updated><title type='text'>सबसे आगे हिंदुस्तानी</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S3z0_vwe9gI/AAAAAAAAAIs/lfVBTuF0u6w/s1600-h/Indian_women_paintings_4.jpg"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 236px; height: 320px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S3z0_vwe9gI/AAAAAAAAAIs/lfVBTuF0u6w/s320/Indian_women_paintings_4.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5439491825945474562" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S3z042t2AdI/AAAAAAAAAIk/1jcHdNDlmnw/s1600-h/BEUTY.bmp"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 240px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S3z042t2AdI/AAAAAAAAAIk/1jcHdNDlmnw/s320/BEUTY.bmp" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5439491707554365906" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;दुनिया भर में सबसे ज्यादा खूबसूरती है भारतीयों में। ये हम नहीं कह रहे क्य़ोंकि हम भारतीय हैं। बल्कि ये कहने लगी है सारी दुनिया। भारत महज खूबसूरती की मिसाल बन चुके ताजमहल का ही देश नहीं है, यहां के बाशिंदे भी दुनिया के सबसे  &lt;br /&gt;खूबसूरत लोगों में से एक हैं। जी हां, अभी हाल में ब्रिटेन में हुए एक ऑन लाइन पोल में हम हिंदुस्तानियों को टॉप टेन में आठवां नंबर मिला है। ये पोलिंग कराई थी www.OnePoll.com जिसमें अमेरिकनों को पहला नंबर मिला है। जाहिर है हॉलिवुड के हैंडसम जॉर्ज क्लूनी और ऐक्ट्रेस ऐंजिलीना जोली की नुमाइंदगी के बाद अमेरिका को फर्स्ट आना ही था। दूसरे नंबर पर आई ब्राजील की ब्यूटी। स्पेन हॉलिवुड में अपना नाम रोशन करने वाली पनेलपी क्रूज को देख खुशी से फूला नहीं समाता। स्पेन की इसी सुंदरता को 5 हजार ब्रिटेन वासियों ने तीसरे नंबर पर जगह दी। ऑस्ट्रेलिया का नाम आते ही हमें याद आती है सुनहरे बालों और सूरज की रोशनी में तपकर तांबे से रंग वाले सी सर्फर्स की। इन्हें नजर में रखकर ऑस्ट्रेलिया को मिला चौथा स्थान। स्वीडन की खूबसूरती उसके निवासियों की लचीली और आकर्षक काया में है। खुद इंग्लैंड को उसके नागरिकों ने सातवां स्थान दिया। अब आया नंबर बॉलिवुड ब्यूटीज वाले देश भारत का। ऐश्वर्या राय बच्चन, करीना कपूर और कैटरीना कैफ, शाहरुख, रितिक, आमिर और सलमान सरीखे सितारे भारत ही नहीं दुनिया भर के जवां दिलों पर राज करते हैं। इसलिए आठवें रैंक पर रहा अपना इंडिया। हैरानी की बात है कि हमेशा से खूबसूरती का कददान और नफासत पसंद रहा फ्रांस नौवें नंबर पर रहा। दसवें नंबर रहे कनाडाई। तो यकीन हुआ कि भारत की खूबसूरती का कोई जवाब नहीं। वहीं टॉप ट्वेंटी में पुर्तगाल, जापान और नीदरलैंड और जर्मनी को जगह मिली। इस ऑनलाइन पोल कराने वालों का कहना था कि अमेरिका खुद को सबसे सुंदर लोगों का देश मानता है। ब्रैड पिट, जेसिका अल्बा और जेनिफर एनिस्टन जैसे लाजवाब चेहरे मोहरे वाले लोगों ने अमेरिका की ऐसी इमेज बनाई है। लेकिन हमें यह भी याद रखना है कि अमेरिका में 30 करोड़ से ज्यादा लोग रहते हैं। इसलिए ज्यादा खूबसूरत लोग हमारे सामने आते हैं। लेकिन असल में देखा जाए तो स्वीडन, इटली, फ्रांस और ब्राजील जैसे देश ज्यादा स्वाभाविक सुंदरता में धनी हैं। भारत को अच्छे नंबर मिले हैं खूबसूरती के मामले में। इसलिए खुद को किसी से कम ना समझें।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-3734817468329734120?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/3734817468329734120/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/02/blog-post_8967.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/3734817468329734120'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/3734817468329734120'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/02/blog-post_8967.html' title='सबसे आगे हिंदुस्तानी'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S3z0_vwe9gI/AAAAAAAAAIs/lfVBTuF0u6w/s72-c/Indian_women_paintings_4.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-2096969494021640211</id><published>2010-02-17T23:27:00.000-08:00</published><updated>2010-02-17T23:39:54.209-08:00</updated><title type='text'>क्या किया प्रोफेसर साहब ?</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S3zuld3JoUI/AAAAAAAAAIc/LmxtfuymPCc/s1600-h/NewAgeIslamAMU1ImageCollege.jpg"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 300px; height: 275px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S3zuld3JoUI/AAAAAAAAAIc/LmxtfuymPCc/s320/NewAgeIslamAMU1ImageCollege.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5439484777395233090" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी यानि एएमयू में रिटायरमेंट की कगार पर पहुंच चुके एक प्रोफेसर को यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट ने सस्पेंड कर दिया है। प्रफेसर को यूनिवर्सिटी कैंपस में उनके आवास में एक रिक्शा चालक के साथ सेक्स करते हुए कैमरे में रेकॉर्ड कर लिया गया था। इन कैमरों को कुछ छात्रों ने उनके आवास में लगाया था। छात्रों ने इस विडियो फिल्म को यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट के पास भेज दिया था, जिसके बाद प्रफेसर को सस्पेंड कर दिया गया। डॉ. श्रीनिवास रामचंद्र सिरास नाम के ये प्रफेसर यूनिवर्सिटी के मॉडर्न इंडियन लैंग्वेज विभाग के अध्यक्ष और रीडर हैं। प्रोफेसर सिरास ने कहा है कि वह यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट के इस फैसले का विरोध नहीं करेंगे और अपनी मर्जी से यूनिवर्सिटी की नौकरी छोड़ देंगे। प्रोफेसर सिरास के इस फैसले से एएमयू प्रशासन ने राहत की सांस ली है। एएमयू प्रशासन इस 'शर्मनाक एपिसोड' को खत्म करना चाहता है। लेकिन अगर सिरास ने यूनिवर्सिटी के इस फैसले को चैलेंज किया होता तो यूनिवर्सिटी कैंपस में गे राइट का मुद्दा उभर सकता था, जिसपर खासी बहस-मुबाहिसे की गुंजाइश हो सकती थी। चूंकि प्रोफेसर का कृत्य कहीं से भी कानून का उल्लंघन नहीं था। सहमति के साथ गे सेक्स खुद कोई अपराध नहीं है। एएमयू के जन संपर्क अधिकारी राहत अबरार ने कहा कि सिरास को रिक्शा चालक के साथ सेक्स करते हुए कैमरे पर पकड़ा गया था। इस तरह की गतिविधि को कोई भी सम्मानित संस्थान नज़रअंदाज नहीं कर सकता। यही वजह है कि 9 फरवरी को वीसी प्रोफेसर पी.के. अब्दुल अजीज के आदेश से प्रोफेसर सिरास को सस्पेंड कर दिया गया। डॉ. सिरास एएमयू कैंपस की मेडिकल कॉलोनी में दिए गए घर में रहते थे। 8 फरवरी को प्रोफेसर सिरास जमालपुर इलाके के एक नौजवान रिक्शा चालक के साथ घर पर ही थे। चूंकि घर का दरवाज़ा खुला था, इसलिए लोकल टीवी चैनल के दो रिपोर्टर घर में घुस आए और उन्होंने सब कुछ कैमरे पर रेकॉर्ड कर लिया। विडियो क्लिपिंग को एएमयू प्रबंधन के पास भेज दिया गया। एएमयू यूनिवर्सिटी कैंपस में इस घटना को लेकर खासी चर्चा है। इस सबके बीच सिरास चुपचाप कैंपस छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं। प्रोफेसर साहब का कहना है 'उन्हें जो कहना है, कहने दो। मैं कोई सफाई नहीं दूंगा।' उन्होंने कहा, अगर आपको कोई गाली देता है तो यह जरूरी नहीं कि आप भी उन्हें गाली दें।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-2096969494021640211?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/2096969494021640211/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/02/blog-post_792.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/2096969494021640211'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/2096969494021640211'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/02/blog-post_792.html' title='क्या किया प्रोफेसर साहब ?'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S3zuld3JoUI/AAAAAAAAAIc/LmxtfuymPCc/s72-c/NewAgeIslamAMU1ImageCollege.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-4751607151090829119</id><published>2010-02-17T23:05:00.000-08:00</published><updated>2010-02-17T23:26:39.448-08:00</updated><title type='text'>ओम जय जगदीश...</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S3zrpcT-YYI/AAAAAAAAAIU/qMrCO1sYca8/s1600-h/vishnu_468x672.jpg"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 223px; height: 320px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S3zrpcT-YYI/AAAAAAAAAIU/qMrCO1sYca8/s320/vishnu_468x672.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5439481547163853186" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;बचपन से भगवान की आरती हम गाते रहे। लेकिन कभी ये नहीं सोचा कि जिस आरती को गाकर हम अपने ईष्ट को मनाते हैं उसे लिखा कब गया। हिंदी मीडिया साइट पर मुझे ये जानकारी मिली। &lt;br /&gt;सौजन्य-- http://hindimedia.in/index.php?option=com_content&amp;task=view&amp;id=1255&amp;Itemid=54&lt;br /&gt;इस देश के घर-घर और मंदिरों में जिसके शब्द बरसों से गूंज रहे हैं, दुनिया के किसी भी कोने में बसे किसी भी सनातनी हिंदू परिवार में ऐसा व्यक्ति खोजना मुश्किल है जिसके ह्रदय-पटल पर बचपन के संस्कारों में उसके लिखे शब्दों की छाप न पड़ी हो। उनके शब्द उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत के हर घर और मंदिर मे पूरी श्रध्दा और भक्ति के साथ गाए जाते हैं। बच्चे से लेकर युवाओं को और कुछ याद रहे या न रहे इसके बोल इतने सहज, सरल और भावपूर्ण है कि एक दो बार सुनने मात्र से इसकी हर एक पंक्ति दिल और दिमाग में रच-बस जाती है। हम बात कर रहे हैं देश और दुनियाभर के करोड़ों हिन्दुओं के रग-रग में बसी ओम जय जगदीश की आरती की। हजारों साल पूर्व हुए हमारे ज्ञात-अज्ञात ऋषियों ने परमात्मा की प्रार्थना के लिए जो भी श्लोक और भक्ति गीत रचे, ओम जय जगदीश की आरती की भक्ति रस धारा ने उन सभी को अपने अंदर समाहित सा कर लिया है। यह एक आरती संस्कृत के हजारों श्लोकों, स्तोत्रों और मंत्रों का निचोड़ है। लेकिन इस अमर भक्ति-गीत और आरती के रचयिता पं. श्रध्दाराम शर्मा के बारे में कोई नहीं जानता और न किसी ने उनके बारे में जानने की कोशिश की। हमारे हजारों पाठकों ने हमारा ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि हम ओम जय जगदीश की आरती के लेखक के बारे में कुछ बताएं। प्रस्तुत है इस अमर रचनाकार का जीवन परिचय। ओम जय जगदीश की आरती जैसे भावपूर्ण गीत के रचयिता थे पं. श्रध्दाराम शर्मा। प. श्रध्दाराम शर्मा का जन्म 1837 में पंजाब के लुधियाना के पास फुल्लौर में हुआ था। उनके पिता जयदयालु खुद एक अच्छे ज्योतिषी थे। उन्होंने अपने बेटे का भविष्य पढ़ लिया था और भविष्यवाणी की थी कि यह एक अद्भुत बालक होगा। बालक श्रध्दाराम को बचपन से ही धार्मिक संस्कार तो विरासत में ही मिले थे। उन्होंने बचपन में सात साल की उम्र तक गुरुमुखी में पढाई की। दस साल की उम्र में संस्कृत, हिन्दी, पर्शियन, ज्योतिष, और संस्कृत की पढाई शुरु की और कुछ ही वर्षो में वे इन सभी विषयों के निष्णात हो गए। पं. श्रध्दाराम ने पंजाबी (गुरूमुखी) में 'सिखों दे राज दी विथिया' और 'पंजाबी बातचीत' जैसी किताबें लिखकर मानो क्रांति ही कर दी। अपनी पहली ही किताब 'सिखों दे राज दी विथिया' से वे पंजाबी साहित्य के पितृपुरुष के रूप में प्रतिष्ठित हो गए। इस पुस्तक मे सिख धर्म की स्थापना और इसकी नीतियों के बारे में बहुत सारगर्भित रूप से बताया गया था। पुस्तक में तीन अध्याय है। इसके अंतिम अध्याय में पंजाब की संकृति, लोक परंपराओं, लोक संगीत आदि के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई थी। अंग्रेज सरकार ने तब होने वाली आईसीएस (जिसका भारतीय नाम अब आईएएस हो गया है) परीक्षा के कोर्स में इस पुस्तक को शामिल किया था। 1870 में उन्होंने ओम जय जगदीश की आरती की रचना की। प. श्रध्दाराम की विद्वता, भारतीय धार्मिक विषयों पर उनकी वैज्ञानिक दृष्टि के लोग कायल हो गए थे। जगह-जगह पर उनको धार्मिक विषयों पर व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया जाता था और तब हजारों की संख्या में लोग उनको सुनने आते थे। वे लोगों के बीच जब भी जाते अपनी लिखी ओम जय जगदीश की आरती गाकर सुनाते। उनकी आरती सुनकर तो मानो लोग बेसुध से हो जाते थे। आरती के बोल लोगों की जुबान पर ऐसे चढ़े कि आज कई पीढियाँ गुजर जाने के बाद भी उनके शब्दों का जादू कायम है। उन्होंने धार्मिक कथाओं और आख्यानों का उध्दरण देते हुए अंग्रेजी हुकुमत के खिलाफ जनजागरण का ऐसा वातावरण तैयार कर दिया कि अंग्रेजी सरकार की नींद उड़ गई। वे महाभारत का उल्लेख करते हुए ब्रिटिश सरकार को उखाड़ फेंकने का संदेश देते थे और लोगों में क्रांतिकारी विचार पैदा करते थे। 1865 में ब्रिटिश सरकार ने उनको फुल्लौरी से निष्कासित कर दिया और आसपास के गाँवों तक में उनके प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई। जबकि उनकी लिखी किताबें स्कूलों में पढ़ाई जाती रही। पं. श्रध्दाराम खुद ज्योतिष के अच्छे ज्ञाता थे और अमृतसर से लेकर लाहौर तक उनके चाहने वाले थे इसलिए इस निष्कासन का उन पर कोई असर नहीं हुआ, बल्कि उनकी लोकप्रियता और बढ गई। लोग उनकी बातें सुनने को और उनसे मिलने को उत्सुक रहने लगे। इसी दौरान उन्होंने हिन्दी में ज्योतिष पर कई किताबें भी लिखी। लेकिन एक इसाई पादरी फादर न्यूटन जो पं. श्रध्दाराम के क्रांतिकारी विचारों से बेहद प्रभावित थे, के हस्तक्षेप पर अंग्रेज सरकार को थोड़े ही दिनों में उनके निष्कासन का आदेश वापस लेना पड़ा। पं. श्रध्दाराम ने पादरी के कहने पर बाईबिल के कुछ अंशों का गुरुमुखी में अनुवाद किया था। पं. श्रध्दाराम ने अपने व्याख्यानों से लोगों में अंग्रेज सरकार के खिलाफ क्रांति की मशाल ही नहीं जलाई बल्कि साक्षरता के लिए भी ज़बर्दस्त काम किया।  आज जिस पंजाब में सबसे ज्यादा कन्याओं की भ्रूण हत्याएं होती है इसका एहसास उन्होंने बहुत पहले कर लिया था। 1877 में भाग्यवती नामक एक उपन्यास प्रकाशित हुआ (जिसे हिन्दी का पहला उपन्यास माना जाता है), इस उपन्यास की पहली समीक्षा अप्रैल 1887 में हिन्दी की मासिक पत्रिका प्रदीप में प्रकाशित हुई थी। इसे पंजाब सहित देश के कई राज्यो के स्कूलों में कई सालों तक पढाया जाता रहा। इस उपन्यास में उन्होंने काशी के एक पंडित उमादत्त की बेटी भगवती के किरदार के माध्यम से बाल विवाह पर ज़बर्दस्त चोट की। इसी  इस उपन्यास में उन्होंने भारतीय स्त्री की दशा और उसके अधिकारों को लेकर क्रांतिकारी विचार प्रस्तुत किए। पं. श्रध्दाराम के जीवन और उनके द्वारा लिखी गई पुस्तकों पर गुरू नानक विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के डीन और विभागाध्य्क्ष श्री डॉ. हरमिंदर सिंह ने ज़बर्दस्त शोध कर तीन संस्करणों में श्रध्दाराम ग्रंथावली का प्रकाशन भी किया है। उनका मानना है कि पं. श्रध्दाराम का यह उपन्यास हिन्दी साहित्य का पहला उपन्यास है। लेकिन यह मात्र हिन्दी का ही पहला उपन्यास नहीं था बल्कि कई मायनों में यह पहला था। उनके उपन्यास की नायिका भाग्यवती पहली बेटी पैदा होने पर समाज के लोगों द्वार मजाक उडा़ए जाने पर अपने पति को कहती है कि किसी लड़के और लड़की में कोई फर्क नहीं है। उन्होने इस उपन्यास के जरिए बाल विवाह जैसी कुप्रथा पर ज़बर्दस्त चोट की। उन्होंने तब लड़कियों को पढाने की वकालात की जब लड़कियों को घर से बाहर तक नहीं निकलने दिया जाता था, परंपराओं, कुप्रथाओं और रुढियों पर चोट करते रहने के बावजूद वे लोगों के बीच लोकप्रिय बने रहे। जबकि वह ऐक ऐसा दौर था जब कोई व्यक्ति अंधविश्वासों और धार्मिक रुढियों के खिलाफ कुछ बोलता था तो पूरा समाज उसके खिलाफ हो जाता था। निश्चय ही उनके अंदर अपनी बात को कहने का साहस और उसे लोगों तक पहुँचाने की जबर्दस्त क्षमता थी। हिन्दी के जाने माने लेखक और साहित्यकार पं. रामचंद्र शुक्ल ने पं. श्रध्दाराम शर्मा और भारतेंदु हरिश्चंद्र को हिन्दी के पहले दो लेखकों में माना है। पं.श्रध्दाराम शर्मा हिन्दी के ही नहीं बल्कि पंजाबी के भी श्रेष्ठ साहित्यकारों में थे, लेकिन उनका मानना था कि हिन्दी के माध्यम इस देश के ज्यादा से ज्यादा लोगों तक अपनी बात पहुँचाई जा सकती है। पं. श्रध्दाराम का निधन 24 जून 1881 को लाहौर में हुआ।  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;और आखिर में वो आरती जिसकी बात हम यहां कर रहे हैं.....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ओम जय जगदीश, स्वामी जय जगदीश हरे&lt;br /&gt;भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे &lt;br /&gt;जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का&lt;br /&gt;सुख-सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मात पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी&lt;br /&gt;तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतर्यामी&lt;br /&gt;पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता&lt;br /&gt;मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति&lt;br /&gt;किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दीनबंधु दुःखहर्ता, तुम रक्षक मेरे. &lt;br /&gt;करुणा हस्त बढ़ाओ, द्वार पडा तेरे &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा &lt;br /&gt;श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ओम जय जगदीश, स्वामी जय जगदीश हरे&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-4751607151090829119?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/4751607151090829119/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/02/blog-post_17.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/4751607151090829119'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/4751607151090829119'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/02/blog-post_17.html' title='ओम जय जगदीश...'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S3zrpcT-YYI/AAAAAAAAAIU/qMrCO1sYca8/s72-c/vishnu_468x672.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-5867123683383376719</id><published>2010-02-16T23:44:00.000-08:00</published><updated>2010-02-16T23:54:34.693-08:00</updated><title type='text'>क्या हुआ आमिर को ?  ऑल इज नॉट वेल</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S3ugsIse2AI/AAAAAAAAAIM/Yk8TDAVhcdU/s1600-h/javed_akhtar-7-650x700-2008-12-10.jpg"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 297px; height: 320px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S3ugsIse2AI/AAAAAAAAAIM/Yk8TDAVhcdU/s320/javed_akhtar-7-650x700-2008-12-10.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5439117655088748546" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S3ugl9z309I/AAAAAAAAAIE/GoIc6bdFcN0/s1600-h/amir_khan_ghajini2.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 214px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S3ugl9z309I/AAAAAAAAAIE/GoIc6bdFcN0/s320/amir_khan_ghajini2.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5439117549087740882" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ऑल इज नॉट वेल....ये सिर्फ आमिर ने नहीं कहा, बल्कि अब ये सारा ज़माना कहने लगा है। हां ये ज़रूर है कि हमने ये आमिर से ही सीखा है। लेकिन गजनी अपनी ही बात भूल गया। क्यों गोल-गोल घुमाएं। चलिए मुद्दे पर आते हैं। लगता है कि बॉलिवुड के 'खान' आजकल कॉन्ट्रॉवर्सीज का खूब हिस्सा बन रहे है। मसलन ट्विटर पर महेश भट्ट का मैसेज।  इसके अलावा किंग खान के बाद अब परफेक्शनिस्ट खान यानी आमिर खान अपने एक बयान के कारण विवादों से घिर गए हैं। इस बार खबर बी टाउन के दो हस्तियों के आपसी टकराहट की है। खबर के मुताबिक अब पंगा हुआ है आमिर और &lt;br /&gt;बी टाउन के जाने माने गीतकार-राइटर जावेद अख्तर के बीच। कॉपीराइट कानून में प्रस्तावित संशोधन पर फिल्म जगत के कुछ वर्गों की ओर से आलोचना का सामना कर रही सरकार ने, मुद्दों की समीक्षा के लिए विशेषज्ञों की एक कमिटी गठित की थी। इसमें फिल्म ऐक्टर आमिर खान भी शामिल थे। मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने फिल्म ऐक्टर आमिर खान, प्रड्यूसर मुकेश भट्ट, गीतकार जावेद अख्तर, पटकथा लेखक अंजुम, डायरेक्टर विशाल भारद्वाज सहित 10 विशेषज्ञों की एक कमिटी बनाई थी। हुआ हूं कि कपिल सिब्बल के साथ हुई बैठक में आमिर और जावेद अख्तर के बीच जमकर तू तू- मैं मैं हुई। अपने को सुपीरियर मानने वाले आमिर खान ने मंगलवार देर शाम अपना इस्तीफा एचआरडी मिनिस्ट्री को फैक्स कर दिया है। इस्तीफे में उन्होंने साफ जिक्र किया है कि वह इस तरह कड़वाहट भरे माहौल में उनके लिए काम करना संभव नहीं होगा। इसकी पुष्टि बॉलिवुड़ के अघोषित प्रवक्ता के रूप में विख्यात महेश भट्ट के ट्वीट से भी होती है। भट्ट साहब ने ट्विटर पर लिखा है कि यश चोपड़ा ने उन्हें फोन करके बताया है कि आमिर खान कपिल सिब्बल द्वारा कॉपीराइट मुद्दे को सुलझाने के लिए बनाई गई कमिटी से रिजाइन कर दिया है। अब हम आपको बताते है कि उस बैठक के दौरान ऐसा क्या हुआ कि आमिर का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने इस्तीफा देकर अपनी भड़ास निकाली। इस बैठक में लेखकों की अगुवाई कर रहे थे जावेद अख्तर और प्रड्यूसर्स की ओर से मौजूद थे आमिर खान। कपिल सिब्बल की एचआरडी मिनिस्ट्री की ओर से आयोजित फिल्म प्रड्यूसर्स, गीतकार और लेखकों की मीटिंग में आमिर का कहना था की एक गाना हिट होता है क्योंकि उसे एक बड़े स्टार पर फिल्माया जाता है। पर आमिर के इस बयान पर गीतकार जावेद अख्तर ने जवाब देते हुए कहा, 'आमिर आपका पहला हिट गाना था पापा कहते हैं क्या उस गाने ने आपको स्टार बनाया या फिर आपकी वजह से वो गाना इतना हिट हुआ। फिल्म की कमाई में लेखकों और गीतकारों की हिस्सेदारी के मुद्दे पर आयोजित इस बैठक में आमिर, अपनी बात पर अड़े रहे और उन्होंने कहा कि किसी गाने को हिट कराने में सबसे ज्यादा योगदान उस स्टार का होता है जिस पर वह गाना फिल्माया जाता है। आमिर खान के इस बयान पर अब जावेद अख्तर सीधे आमिर खान पर व्यक्तिगत हमला कर दिया। जावेद ने कहा 'आपका सबसे ज्यादा योगदान और कुछ नहीं बल्कि बस दखलअंदाजी होता है। हम लोग हर दम के लिए आपके शुक्रगुजार रहेंगे अगर आप इस तरह का योगदान अपने ही पास रखें। आप अगर योगदान ना करें तो हम ज्यादा अच्छा काम करते हैं न कि आपकी दखलंदाजी से काम अच्छा होता है।'पर आमिर भी कहां चुप बैठने वालों मे से हैं। उन्होंने जावेद अख्तर की बात का जवाब देते हुए कहा कि मुझे तो लगता है कि किसी फिल्म में किसी गीतकार से ज्यादा योगदान फिल्म की कहानी लिखने वाले का होता है। बस आमिर का यह कहना था कि जावेद अख्तर ने उनकी दुखती रग ही दबा दी। उन्होंने कहा कि तब तो चेतन भगत के लिए बहुत अच्छा है। गौरतलब है कि आमिर की थ्री इडियट्स को लेकर लेखक चेतन भगत ने स्टोरी क्रेडिट की मांग की थी। तो भइया ये है चोरी की कहानी। कौन चोर और कौन शाह ये भी बताने की ज़रूरत नहीं है। आप तो सबकुछ जानते हैं....&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-5867123683383376719?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/5867123683383376719/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/02/blog-post_16.html#comment-form' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/5867123683383376719'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/5867123683383376719'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/02/blog-post_16.html' title='क्या हुआ आमिर को ?  ऑल इज नॉट वेल'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S3ugsIse2AI/AAAAAAAAAIM/Yk8TDAVhcdU/s72-c/javed_akhtar-7-650x700-2008-12-10.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-2867942676053810620</id><published>2010-02-01T02:17:00.000-08:00</published><updated>2010-02-01T02:25:14.692-08:00</updated><title type='text'>एक बंगला बने न्यारा...</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S2ar-lWePTI/AAAAAAAAAH8/2E7LR39DE5w/s1600-h/Property1.jpg"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 240px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S2ar-lWePTI/AAAAAAAAAH8/2E7LR39DE5w/s320/Property1.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5433219092135689522" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S2ar3wI7AlI/AAAAAAAAAH0/udXae-9HNCM/s1600-h/metro.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 313px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S2ar3wI7AlI/AAAAAAAAAH0/udXae-9HNCM/s320/metro.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5433218974772560466" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;साल 2010 आ चुका है। अगर आप बीते साल में मकान खरीदने के बारे में सिर्फ सोचते ही रह गए, तो इस साल आपका रिजॉल्यूशन मकान खरीदना ही होना चाहिए। नए साल में प्रॉपर्टी बाजार के हाल क्या रहेंगे, कौन-सी नई-पुरानी जगहें हॉट रहेंगी, टैक्स और हाउसिंग लोन आपका साथ देंगे या नहीं?  तो जनाब मेट्रो और रीयल एस्टेट सेक्टर का पुराना रिश्ता गवाह है कि मेट्रो प्रॉपर्टी की कीमतों में उछाल का बड़ा कारण रही है। मेट्रो लाइन शुरू होने की बात तो दूर, इसकी सुगबुगाहट होते ही हलचल शुरू हो जाती है। साल की शुरुआत ही मेट्रो की नई लाइन से हुई है। कई और लाइनें भी इसी साल शुरू होनी हैं। इन सभी इलाकों में रियल एस्टेट की गतिविधियां तेज होने से इनकार नहीं किया जा सकता। मेट्रो के एनसीआर में पांव पसारते ही रियल एस्टेट की कदम-ताल और तेज हो सकती है। आनंद विहार लाइन शुरू होने और वैशाली तक मेट्रो पहुंचने से इंदिरापुरम रिवाइव कर सकता है। फरीदाबाद और गुड़गांव के करीब मेट्रो पहुंचने से वहां भी रियल एस्टेट मार्केट सुधरेगा। दरअसल, सारा खेल कनेक्टिविटी का ही है। चाहे दिल्ली के आसपास गाजियाबाद और गुड़गांव जैसे इलाके हों या जयपुर और हरिद्वार जैसे सुदूर स्थित शहर, जहां भी कम समय में पहुंचा जा सकता है, वहां डिवेलपर्स बेहद जल्दी पहुंच जाते हैं। एनसीआर के ज्यादातर इलाकों में यही हो रहा है। मेट्रो आने से इन जगहों की कनेक्टिविटी और बेहतर होती है, लिहाजा प्रॉपर्टी की कीमतें भी बढ़ने लगती हैं। चार जून 2008 को दिलशाद गार्डन लाइन की शुरुआत और उससे पहले काम की शुरुआत के समयांतर में आसपास के इलाकों की रेजिडेंशल प्रॉपर्टी की कीमतें करीब 25 फीसदी तक बढ़ीं, तो 31 दिसंबर 2005 को बाराखंभा-द्वारका लाइन शुरू होने के बाद द्वारका में रियल एस्टेट की किस्मत ही पलट गई। द्वारका के एक प्रॉपर्टी डीलर हर्ष चौधरी बताते हैं, 'यह लाइन शुरू होने के तीन महीने के अंदर ही 25 लाख वाले फ्लैट की कीमत बढ़कर 30 लाख रुपये हो गई थी। अब तो यह 50 लाख में ही मिल सकता है। कभी सिर्फ 25-30 पर्सेंट आबादी वाले पूर्वी दिल्ली के शास्त्री पार्क में भी ऐसा ही हुआ। यहां डीएमआरसी का आईटी पार्क बनने के बाद इस इलाके में कॉरपोरेट ऑफिसों की मांग में जबर्दस्त इजाफा हुआ। चार-पांच साल पहले तक यह क्षेत्र काफी 'डाउन मार्केट' समझा जाता था। प्रॉपर्टी सस्ती होने के बावजूद बड़ी कंपनियां यहां आने से कतराती थीं, लेकिन आज छह एकड़ जगह में बने इस आईटी पार्क में करीब 80 फीसदी हिस्सा एक ही एमएनसी ने ले लिया है। सबसे ताजा मामला है, आनंद विहार-वैशाली लाइन का। वैशाली आने की सिर्फ घोषणा होते ही सेक्टर 4 के आसपास के इलाके में प्रॉपर्टी की कीमतों में रातों-रात बढ़ोतरी दिखाई दी। पिछले साल सितंबर में इस लाइन को बढ़ाकर इंदिरापुरम तक ले जाने की घोषणा हुई, जो वसुंधरा से गुजरेगी। उन्हीं दिनों जीडीए के ड्रॉ से इंदिरापुरम में मकान हासिल करने वाली कमला शर्मा को एक लाख रुपये के उस फ्लैट की कीमत हाथों-हाथ दोगुनी ऑफर हो गई थी। 29 जनवरी से मेट्रो ने गुड़गांव में लगभग 7.5 किमी के हिस्से में ट्रायल शुरू कर दिया। इसके बाद अभी आनंद विहार और जल्दी ही वैशाली से सीधे गुड़गांव मेट्रो से ही जाना संभव होगा। जाहिर है, इसका असर भी गुड़गांव और साउथ दिल्ली के रियल एस्टेट मार्केट पर दिखाई देगा। मेट्रो के पहुंचने से अन्य किसी इलाके के मुकाबले गुड़गांव में ग्रोथ की ज्यादा संभावनाएं हैं। वहां अभी भी काफी जगह उपलब्ध है और यह एयरपोर्ट से सीधे जुड़ा है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-2867942676053810620?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/2867942676053810620/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/02/blog-post.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/2867942676053810620'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/2867942676053810620'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/02/blog-post.html' title='एक बंगला बने न्यारा...'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S2ar-lWePTI/AAAAAAAAAH8/2E7LR39DE5w/s72-c/Property1.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-5248598119225658622</id><published>2010-01-31T19:13:00.000-08:00</published><updated>2010-01-31T19:33:40.377-08:00</updated><title type='text'>भारत के 'तालिबान'</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S2ZLiQjHvGI/AAAAAAAAAHs/4z2yOjjlmhU/s1600-h/panchayat.jpg"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 204px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S2ZLiQjHvGI/AAAAAAAAAHs/4z2yOjjlmhU/s320/panchayat.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5433113052398992482" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S2ZLXyYChII/AAAAAAAAAHk/sR51YX92UuA/s1600-h/afghanistan-taliban-2-2.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 208px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S2ZLXyYChII/AAAAAAAAAHk/sR51YX92UuA/s320/afghanistan-taliban-2-2.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5433112872500757634" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;अफगानिस्तान और पाकिस्तान की बुनियाद में तालिबान पहले ही सेंध लगा चुका है। तालिबान नाफरमानी करने वालों को ऐसी सज़ा देता है जिसे देखकर रूह कांप उठे। तालिबान के लिए सज़ा देने की कोई वज़ह ज़रूरी नहीं है। उसे बस अपनी मनमर्ज़ी करनी है। तालिबान का अपना कनून है। भारत शुक्र मनाता है कि उसकी धरती पर तालिबान ने कदम अभी तक नहीं रखा है। लेकिन ऐसा नहीं है। तालिबान हमारे देश में भी है। हमारे बीच है और हमारे कानून की धज्जियां डंके की कोट पर उड़ाता है। ज्यादादूर नहीं देश की राजधानी के पास हरियाणा में समान गोत्र में शादी करने वाले जोड़ों पर पंचायतों का तुगलकी फरमान थमने का नाम नहीं ले रहा है। पंचायतों के रूप में उभरे इस तालिबान के फरमान के खिलाफ जाने की हिम्मत सरकार के पास भी नहीं है। पंचायती तालिबान का ताजा शिकार बने हैं रोहतक के खेड़ी गांव के सतीश और कविता। दोनों की शादी ढाई साल पहले हुई थी और उनका 10 महीने का एक बेटा भी है, लेकिन पंचायत ता तुगलकी फरमान सुनिए। पंचायत ने दोनों को भाई-बहन की तरह रहने का आदेश सुनाया है। रोहतक में खेड़ी गांव के आजाद सिंह के बेटे सतीश बेरवाल की शादी झज्जर जिले के भागी गांव के राजवीर की पुत्री कविता के साथ हुई थी। कविता का गोत्र बैनीवाल है और खेड़ी गांव में बैनीवाल और बेरवाल का भाईचारा माना जाता है। ग्रामीणों को जब कुछ दिन पहले कविता के गोत्र की जानकारी मिली तो रास नहीं आया और स्थिति तनावपूर्ण होने पर शनिवार को पंचायत हुई। पंचायत ने इस मामले में अंतिम फैसले के लिए 21 सदस्यीय कमेटी गठित की। कमेटी ने पति-पत्नी का रिश्ता तत्काल प्रभाव से तोड़ दिया और उन्हें पंचायत में भाई-बहन के रूप में मान्यता दी। सतीश और कविता ने एक दूसरे को भाई-बहन भी कहा। इसके साथ ही पंचायत ने सतीश को उसके परिवार की पैतृक चल-अचल संपत्ति से बेदखल करते हुए गांव निकाले का फतवा भी सुना दिया। पंचायत ने सतीश और कविता के 10 महीने के पुत्र रौनक की परवरिश के लिए आजाद सिंह को 28 फरवरी तक तीन लाख रुपये देने का फैसला भी सुनाया। पंचायत के फैसले को स्वीकार करते हुए कविता के परिजन उसे अपने साथ ले गए। इससे पहले उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में पंचायत के फरमान पर एक प्रेमी जोड़े की पिटाई की गई और युवती से जबरन युवक को राखी बंधवाकर दोनों को गांव से बाहर निकाल दिया गया। &lt;br /&gt;पंचायत ने पहले गांववालों से प्रेमी जोड़े की पिटाई करवाई और युवक से कहा कि वह युवती को पंचायत के सामने बहन कहे। फिर युवती से जबरदस्ती युवक को राखी बंधवाई। इसके बाद दोनों को गांव से निकल जाने का फरमान सुनाया। पंचायतों के प्यार पर ऐतराज़ है। प्यार के दुश्मन सिर्फ फिल्मों में नहीं हैं। असल ज़िंदगी में भी प्यार के पहरेदार मौजूद हैं। जिन्हे प्रमकरने वालों से नफरत है। सरकारें भी इम पंचायतों के आगे कमज़ोर हैं। भारत चांद पर घर बसाने की सोच रहा है। 21वीं सदी में हम दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बनने की राह पर है। लेकिन कुछ ऐसी ताकते हैं जो भारत को अंदर से खोखला कर रही हैं। और पंचायतें इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। देश का कानून मानो इनके लिए बना ही नहीं है। केवल अपना कानून मानती है पंचायत। सर्वसिक्षा अभियान का मंत्र यहां काम नहीं करता। नाफरमानी के लिए काफी सख्त सज़ा का प्रावधान है। इसलिए ज़रूरत है देश केअंदर पनप रहे इस तालिबान को खत्म करने की।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-5248598119225658622?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/5248598119225658622/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/01/blog-post_31.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/5248598119225658622'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/5248598119225658622'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/01/blog-post_31.html' title='भारत के &apos;तालिबान&apos;'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S2ZLiQjHvGI/AAAAAAAAAHs/4z2yOjjlmhU/s72-c/panchayat.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-7517244533299047281</id><published>2010-01-15T22:31:00.000-08:00</published><updated>2010-01-15T22:44:25.225-08:00</updated><title type='text'>जेल में मौज ?</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S1FgQYN-A0I/AAAAAAAAAHc/QmRtat8ukwM/s1600-h/jail.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 300px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S1FgQYN-A0I/AAAAAAAAAHc/QmRtat8ukwM/s320/jail.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5427224860453372738" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S1Ff7_-DFEI/AAAAAAAAAHU/YaLPfyNojt8/s1600-h/a-pub-inside-the-central-jail-only-in-chennai.jpg"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 320px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S1Ff7_-DFEI/AAAAAAAAAHU/YaLPfyNojt8/s320/a-pub-inside-the-central-jail-only-in-chennai.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5427224510346761282" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;कैदियों को मिल सकती है पत्नी से सेक्स की इजाजत....&lt;br /&gt;जैसे ही ये खबर पढ़ी तो ख्याल आया कि सरकार क्या जेल को जेल नहीं बनाना चाहती। जेल जाने वाले खूंखार मुजरिमों को सज़ा फिर क्यों दी जाती है। और अगर सज़ा दी जाती है तो फिर उन्हे इतनी आज़ादी.. क्या उचित है? बहरहाल एचआईवी पॉजिटिव कैदियों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर बंबई हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से इस बात की संभावना की पड़ताल करने को कहा है कि क्या कैदियों को जेल में एकांत में अपनी पत्नी के साथ यौन संबंध बनाने की इजाजत दी जा सकती है। एचआईवी पॉजिटिव कैदियों को इलाज सुविधा मुहैया कराने के संबंध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस पी. बी. मजूमदार और जस्टिस आर.जी. केतकर ने राज्य सरकार से 2 से 3 साल से जेल में बंद कैदियों को यह सुविधा मुहैया कराने की संभावना तलाशने को कहा जिसके तहत उन्हें हर महीने कुछ समय के लिए बिल्कुल एकांत में अपनी पत्नी से मिलने की इजाजत दी जाए। जजों ने सरकार से मुद्दे की पड़ताल करने को कहा क्योंकि उनका मानना है कि एचआईवी पॉजिटिव मामले असुरक्षित या अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने की वजह से भी हो रहे हैं। जस्टिस मजूमदार ने कहा, 'कैदी की शारीरिक जरूरतें हो सकती हैं। इस बात को देखें कि क्या एक कैदी को अपनी पत्नी के साथ एक या दो दिन बिताने के लिए अलग स्थान दिया जा सकता है। यानि अपराधी को जेल और घर के बीच फर्क अब नज़र नहीं आएगा। समाज का कानून तोड़ने के बाद किसी को जेल भेजा जाता है। ताकि वो सज़ा पाकर सुधरने की कोशिश करे। ये बात और है कि भारतीयों जेलों में सुधरने वाले कैदियों की संख्या ना के बराबर है। अलबत्ता जेलों से अपराधी तराशकर बाहर की दुनिया में ज़रूर भेजे जाते हैं। अब सरकार के इस कदम के बाद उनकी सज़ा शायद सज़ा ना रह पाए। उनके मन से कानून का बचा-खुचा डर भी खत्म हो जाए। समाज की व्यवस्था को बनाए रखने के लिए ही संविधान में सज़ा का प्रावधान बनाया गया। अब अपराधियों के सरोकार ये दलील भी देंगे कि क्या अपराधी इंसान नहीं हैं ? बेशक वो इंसान हैं। लेकिन उन्होने ग़लती नहीं अपराध किया है। और इसीलिए उन्हे कानून से बतौर सजा के लिए जेल भेजा है। मैं उनकी बात नहीं कर रहा हूं जो मासूम हैं और बिना अपराध जेल भेज दिए जाते हैं। लेकिन उनके बारे में क्या..अपराध जिनकी फिदरत है। ऐसे इंसान सामाजिक व्यवस्था को बिगाड़ते हैं। अकारण ही दूसरों को नुकसान पहुंचाते हैं। तो क्या ऐसे लोगों से दरियादिली रखना उचित है ? जवाब सरकार भी खोज रही है और हम भी....&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-7517244533299047281?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/7517244533299047281/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/01/blog-post_5005.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/7517244533299047281'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/7517244533299047281'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/01/blog-post_5005.html' title='जेल में मौज ?'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S1FgQYN-A0I/AAAAAAAAAHc/QmRtat8ukwM/s72-c/jail.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3036151301447422075.post-5201900325343822695</id><published>2010-01-15T22:18:00.000-08:00</published><updated>2010-01-15T22:30:08.813-08:00</updated><title type='text'>'मंगल' पर बंगला बने न्यारा...</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S1Fc56ZLR0I/AAAAAAAAAHM/soV-VPgLzY4/s1600-h/planet1.gif"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 310px; height: 240px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S1Fc56ZLR0I/AAAAAAAAAHM/soV-VPgLzY4/s400/planet1.gif" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5427221175955310402" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S1FczRqGwbI/AAAAAAAAAHE/Wt1i3NMog3o/s1600-h/mars_mission300_030602.jpg"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 300px; height: 180px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S1FczRqGwbI/AAAAAAAAAHE/Wt1i3NMog3o/s320/mars_mission300_030602.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5427221061941248434" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S1FctgYhCyI/AAAAAAAAAG8/t9Iw9zOaHk0/s1600-h/23humanin-mars_0108.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 310px; height: 240px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_9rqHz0pfMmk/S1FctgYhCyI/AAAAAAAAAG8/t9Iw9zOaHk0/s320/23humanin-mars_0108.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5427220962814790434" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;काफी समय पहले आपने स्टार ट्रैक सीरियल में स्टारशिप एंटरप्राइज को अंतरिक्ष के काले सन्नाटे में आगे बढ़ते हुए देखा होगा। आपने ये भी देखा होगा कि यह यान किस तरह पलक झपकते एक ग्रह से दूसरे ग्रह पर पहुंच जाता है। काश, अंतरिक्ष यात्रा इतनी आसान होती। अंतरिक्ष में इंसानों की लंबी उड़ानें अभी तक हमारे कल्पना लोक में हैं। लेकिन एक दिन ऐसा आएगा जब पृथ्वी अपनी बढ़ती आबादी की जरूरतों को अपने सीमित संसाधनों से पूरा नहीं कर पाएगी। तब मनुष्य को पृथ्वी से बाहर निकलने के बारे में सोचना पडे़गा। स्पेस एक्सपर्ट स्टीवन कट्स का कहना है कि अंतरिक्ष में दूसरी जगह डेरे जमाने की बात पहले मूर्खतापूर्ण लगती थी, लेकिन आज स्थितियां बदल गई हैं। पर सवाल है कि हम कब जाएंगे, कहां जाएंगे और हमारे वहां पहुंचने पर स्थितियां कैसी होंगी? हमारे सौर मंडल के ज्यादातक ग्रह गैस के बर्फीले पिंड हैं। इन ग्रहों पर बस्तियां बसाने की बात सोची नहीं जा सकती। चार ग्रह ऐसे हैं जो ठोस चट्टान हैं, जिनमें हमारी पृथ्वी भी शामिल है। सूरज के सबसे नजदीक है बुध। यह नन्हा सा पिंड है, लेकिन बेहद गर्म। जीवन यहां मुश्किल है। वहीं शुक्र का आकार लगभग पृथ्वी जितना ही है और अगर यहां पृथ्वी जैसा वातावरण बना दिया जाए तो बस्तियां बसाने की बात सोची जा सकती है। शुक्र के पक्ष में एक और बात यह है कि यहां का गुरुत्वाकर्षण लगभग पृथ्वी जितना ही है। ये बड़ी बात है, क्योंकि गुरुत्वाकर्षण ऐसी चीज है जो किसी दूसरे ग्रह पर पुनर्निर्मित नहीं की जा सकती। लेकिन शुक्र के नकारात्मक पक्ष भी हैं। ग्रह की सतह पर दबाव जितना ज्यादा है कि तत्काल जान जा सकती है। सतह के तापमान को पृथ्वीवासी झेल नहीं सकते। यहां जीने लायक वातावरण का निर्माण करना एक बहुत बड़ी वैज्ञानिक चुनौती होगी। चांद हमारे सबसे नजदीक है और बहुत जल्द हम वहां पहुंच जाएंगे। हमारे चंद्रयान और नासा ने वहां इतना पानी ढूंढ ही लिया है कि मनुष्य अपनी बस्तियां स्थापित कर सके। लेकिन चांद को कॉलोनाइज करने से पहले हमें ये भी सोचना होगा कि वहां का भूभाग अफ्रीकी महाद्वीप से बड़ा नहीं है, जबकि मंगल का आकार पृथ्वी के बराबर है। दूसरी बात यह है कि चंद्रमा पर जिंदगी बसर करना आनंददायक नहीं होगा। साइंस फिक्शन पर वर्णित प्रेशराइज्ड शहरों का निर्माण सैद्धांतिक तौर पर संभव तो है किंतु हमें चांद की ग्रेविटी का भी ध्यान रखना होगा। चांद की ग्रेविटी पृथ्वी का छठा हिस्सा है। यही वजह है कि चांद पर पहला कदम रखने वाले नील आर्मस्ट्रांग बार-बार उछलते हुए नजर आए थे। एक खराब बात यह भी है कि चांद पर रात और दिन का चक्र पूरा होने में चार हफ्ते लग सकते हैं। इसका मतलब यह है कि वहां पूरे 14 दिन रात चलेगी। अंतरिक्ष में बस्तियां बसाने की तमाम योजनाएं ऊर्जा के लिए सोलर पावर पर निर्भर रहेंगी। ऐसी स्थिति में चांद पर दो हफ्ते चलने वाली रात एक बड़ा सिरदर्द बन सकती है। फिर भी चंद्रमा के पक्ष में एक बात यह है कि वह हमारे सबसे नजदीक है और रिस्क फैक्टर भी अन्य जगहों की तुलना में कम है। लेकिन अंतरिक्ष यात्रियों के समक्ष ऑस्टियोपोरोसिस एक बड़ी समस्या होगी। डर यह है कि छह महीने तक स्पेसक्राफ्ट में रहने के बाद जब अंतरिक्ष यात्री मंगल पर कदम रखेगा तो कहीं उसके पांव की हड्डी न टूट जाए। मंगल जाने वाले यान में ग्रेविटी की नकल पैदा करना एक बड़ा तकनीकी चैलेंज होगा। संभव है धीरे-धीरे यह टेक्नॉलजी विकसित हो जाए, लेकिन शुरुआती अंतरिक्ष यात्रियों को शायद ये सुविधा न मिल पाए। मंगल जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों को ठीक वैसी ही दवाओं पर रखना पड़ेगा, जो अभी पृथ्वी पर बुजुर्गों को ऑस्टियोपोरोसिस के इलाज के लिए दी जाती हैं। मंगल एक बड़ा ग्रह है। वहां कोई उपयोगी खोजबीन और जांच-पड़ताल करने के लिए परमाणु ऊर्जा चालित वाहन की जरूरत पड़ेगी। मंगल पर रात-दिन का क्रम लगभग पृथ्वी जैसा है। वहां पेड़-पौधे उगाने के लिए ग्रीन हाउस निर्मित किए जा सकते हैं। पेड़-पौधे न सिर्फ भोजन उपलब्ध कराएंगे, बल्कि कार्बन डाइऑक्साइड को ऑक्सिजन में भी बदलेंगे। अभी तक की गई खोजबीन के आधार पर फिलहाल मंगल की सतह पर ज्यादा पानी नहीं है। हां, वहां की ध्रुवीय टोपियों के इर्दगिर्द पानी जरूर है। मंगल पर उतरने वाले अंतरिक्ष यात्री पानी के स्त्रोतों का पता लगा ही लेंगे। पानी हमें सिर्फ पीने या सिंचाई के लिए ही नहीं चाहिए। यह रॉकेट ईंधन के लिए भी महत्वपूर्ण होगा। यदि मंगल की सतह पर पानी मिलता है तो इससे वहां भविष्य में कॉलोनियां बनाने का अच्छा आधार मिल जाएगा। &lt;br /&gt;                यदि हम सचमुच अंतरिक्ष में वैकल्पिक बस्तियां बसाने के लिए कोई जगह तलाश रहे हैं तो वह मंगल ही है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-5201900325343822695?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/5201900325343822695/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/01/blog-post_15.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/5201900325343822695'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3036151301447422075/posts/default/5201900325343822695'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/01/blog-post_15.html' title='&apos;मंगल&apos; पर बंगला बने न्यारा...'/><author><name>ashu</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13848368007018030031</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' 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है,मगर उसे चलाने वाले कौन....उद्योगपति। मगर उनके भी हित कहीं और से सधते हैं। सही समझ रहे हैं आप लकदक खादी में सजे,चेहरे पर लालामी और माथे पर तमाम परेशानियों की वजह से कुछ सिलवटें लिए नेता ही तय करते हैं समय की रफ्तार। मगर नेता बनना इतना आसान तो नहीं। कोई फिक्स रास्ता नहीं,कोई फिक्स कोर्स नहीं और आगे बढ़ने का कोई श्योर शॉट जरिया नहीं। मगर कुछ बातें ऐसी हैं, जिनका आप तन, मन और धन अरे हां नेता बनने में धन की भी अहम भूमिका है। इसलिए इनका पालन करें तो आपको भारत का नहीं तो अपने भाग्य का समृद्ध विधाता बनने से कोई नहीं रोक सकता। तो इस बार जानिए नेता बनने के कुछ नुस्खे, जिनका इस्तेमाल खालिस नकल के बजाय कुछ अकल लगाकर किया जाए, तो आपको नेता बनने से कोई नहीं रोक सकता। आप कह सकते हैं कि यह बात सीधे तौर पर भी तो कही जा सकती थी, तो यह आपके लिए पहला सबक है कि नेता सीधे-सीधे कोई बात नहीं कहते। बेबाकी काम आती है, मगर बाद की स्टेज में। शुरुआत में लच्छेदार जुबान का ही भरोसा होता है। &lt;br /&gt;                         कोई पैदाइशी नेता नहीं होता। नेता बनने के लिए बहुत लगन से काम करना होता है। शतरंज की बिसात की तरह सिर्फ अपने नहीं, दूसरों के मोहरे पर भी नजर रखनी होती है। आप नेता बनना चाहते हैं, अच्छी बात है, मगर पूरी तैयारी के साथ सफर शुरू नहीं किया तो किसी छोटे-मोटे मोर्चे के उप-सह सचिव बनकर ही रह जाएंगे। तो सबसे पहले खुद से यह पूछें कि आप नेता क्यों बनना चाहते हैं? अगर जवाब है देश या समाज के लिए कुछ अच्छा करना है, वगैरह-वगैरह तो आप सोशल वर्क में जाइए, राजनीति को आपकी जरूरत नहीं है। आप नेता बनना चाहते हैं क्योंकि आपको लगता है कि आप बेहतर शासन कर सकते हैं और आपमें लोगों की जिंदगी में रोशनी भरने की काबिलियत है। अभी एक कसौटी और बाकी है। नेतागीरी में जीजान से जुटने से पहले यह भी जान लें कि आपको किस तरह की राजनीति करनी है। फायर ब्रैंड या शालीन दिखने वाली। सोशल वर्क वाली या जाति या क्षेत्र के इर्द-गिर्द घूमने वाली। इससे आगे का रोड मैप बनाने में आसानी होगी और पार्टी चुनने में भी। &lt;br /&gt;                             नेता कौन, वही जो लोगों के काम करा सके, उनकी बिगड़ी बात को बना सके। काम बनाने का एक ही तरीका है कि जिससे काम बनता हो, उसे आप जानते हैं। यह न्यूक्लियर रिऐक्शन की तरह लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। मसलन, आपके पड़ोस में भाटिया साहब हैं। उनके लड़के ने गाड़ी खरीदी है, मगर लाइसेंस नहीं बनवाया। भाटिया साहब ने राह चलते चिंता जताई, आपने कहा, अरे लड़के को कल ही ट्रांसपोर्ट ऑफिस भेज दीजिए। वहां बड़े बाबू हैं शर्मा जी। अपने बड़े भाई की तरह हैं। काम हो जाएगा। जब लड़का जाने लगा तो कहिए बेटा काम तो हो जाएगा, साथ में राधाकिशन बर्फी का डिब्बा लिए जाना, शर्मा जी को पसंद है। तो काम बन गया। शर्मा जी खुश कि अपने जानने वाले का काम कर दिया, वैसे भी दिन में हजारों सिफारिशी आते हैं। भाटिया साहब खुश कि जहां दो-चार हजार लगने थे, मिठाई के डिब्बे से काम चल गया और उनका लड़का खुश कि अंकल का नेटवर्क बहुत सही है। अगली बार आपको माता का जागरण या ब्लड डोनेशन कैंप करवाना है, तो भाटिया साहब का लड़का आपके काम आएगा, साथ में चार और लड़कों को लाएगा और आगे भी डीएल बनवाने के लिए आपके पास और दोस्तों के साथ हाजिर होता रहेगा। आपने देखा कि एक बड़े बाबू से जान-पहचान कितने काम की साबित हुई।  यही है नेतागीरी का पहला और सबसे महत्वपूर्ण सबक - ज्यादा से ज्यादा लोगों से जानपहचान यानी नेटवर्किंग। याद रखें दुनिया में हर रिश्ता काम का है, फिर चाहे वह फूलवाला या ऑटोवाला ही क्यों न हो। आजकल सबके पास मोबाइल फोन हैं। सबको काम पड़ता है, मगर पूछ उस आदमी की है, जो सही वक्त पर सही आदमी तक पहुंचने में आपकी मदद करे। कोई रात में बीमार है, आपके पास अस्पताल का भी नंबर है और ऐंबुलेंस वाले का भी। दो-चार घटनाओं के बाद ऐंबुलेंस सर्विस वाले भी आपको जानने लगेंगे, ड्राइवर भी और डॉक्टर भी। किसी की बिटिया का ब्याह है, तो आपको अच्छे हलवाई के बारे में जानकारी है। हलवाई भी खुश कि साहब ने काम दिलवाया, जानने वाले भी खुश कि रेट कम करवाया और आप, अजी आप व्यवहार कमा रहे हैं। नेटवर्किंग यानी आपके पास ज्यादा से ज्यादा लोगों के फोन नंबर हों, उनका नाम-धाम और काम पता हो और उनके साथ आपका अच्छा व्यवहार हो। यह दुनिया कारोबार की तरह है, जो आपके काम आ रहा है, उसे भी काम पड़ेगा। आप सिर्फ एक तार को दूसरे से जोड़ने का काम कर रहे हैं। नेटवर्किंग के लिए सबसे जरूरी चीज है बातें बनाने की कला। ट्रेन में बैठे हैं, तो चर्चा शुरू कर दी। चाचा दिल्ली जा रहे हैं क्या, हां जी, ओह अच्छा हम भी तो वहीं जा रहे हैं। अच्छा बिजनस है आपका, किस चीज का, ओह बहुत अच्छे प्लाई सप्लाई करते हैं। अरे भाई हमारे ऑफिस में दो नए ब्लॉक बनने हैं, बॉस कह रहे थे कि कहीं से ठीक रेट और कमिशन के साथ बात बने, तो आजमाएं। या फिर अरे बहन जी (भाभी जी नहीं) स्कूल में टीचर हैं आप, अच्छा बहुत अच्छे। जी मैं तो कंस्ट्रक्शन का काम देखता हूं। वगैरह-वगैरह।  &lt;br /&gt;                              इस मुलाकात के बाद तीज-त्योहार पर एसएमएस। कभी माता के जागरण में उन्हें आने का न्योता और फिर जब किसी के बच्चे का ऐडमिशन नहीं हो रहा, तो वही ट्रेन वाली बहन जी का लिंक काम आ सकता है। किसी को घर बनवाना है, तो भाई साहब की दुकान से कुछ सस्ती प्लाई मिल जाएगी। सोचिए मत, आप मतलबी नहीं हैं, आप तो लोगों के काम आ रहे हैं, खुदा के बंदे हैं। तो यह है नेटवर्क की महिमा। धीमे-धीमे आपके तार उलझते और लंबे होते जाएंगे, कोई बाबू, कोई अधिकारी, कोई सप्लायर, कोई प्रफेसर, सब आपस में जुड़े हैं क्योंकि उन्हें आप जोड़ रहे हैं। और उन्हें साथ रखने वाली चीज है आपका व्यक्तित्व और व्यवहार। सुख-दुख में साथ खड़े होने का एहसास और उनकी चीजों के प्रति प्रशंसा का भाव। &lt;br /&gt;                            सबक नंबर दो कह सकते हैं इसे। आपको पता होना चाहिए कि किस विचार की राजनीति करनी है। सेक्युलर दिखना है या हिंदूवादी। समाजवादी या फिर विकासवादी। अपनी जाति, पढ़ाई-लिखाई और विधानसभा के समीकरणों के हिसाब से रास्ता चुनें। जैसे शहरी इलाकों में विकास की राजनीति का जुमला आजकल चल रहा है। उसी तरह गांवों में जातियों की भागीदारी का फॉर्म्युला सुपरहिट है। तो एक बार आपने तय कर लिया कि किस कंपनी ओह सॉरी पार्टी की फ्रेंचाइजी लेकर शुरुआती दौर में काम करना है, उसके बाद रास्ता कुछ आसान हो जाता है। उस पार्टी में लोकल लेवल पर कितने गुट हैं, किसकी हैसियत कितनी है, किसके साथ आपको सहूलियत होगी, वगैरह देखने के बाद सक्रिय हों। चूंकि आप नेटवर्किंग वाले यानी काम के बंदे हैं, इसलिए हर पार्टी और हर नेता आपकी राह देख रहा है।  दूसरी बात, आपकी फैमिली को पता हो कि आपको नेतागीरी का चस्का लग चुका है और यह आसानी से जाने वाला नहीं। तो अब उनके लिए फ्यूचर में मलाई खाने और लालबत्ती का सुख पाने की खातिर त्याग का वक्त आ गया। मां-बाप, बीवी-बच्चों को समझा दें कि अब उनका जीवन इलाके, विधानसभा और देश के लिए है। रात के दो बजे कोई मदद के लिए आ जाए, तो जवाब बाद में दें, पैरों में चप्पल पहले पहन लें। &lt;br /&gt;                                   अरे हम किसी तख्तापलट की बात नहीं कर रहे, बस एक बेसिक मंतर सिखा रहे हैं। जिसके पास भीड़ है, वही हिट है, चाहे सिनेमा हो या फिर पॉलिटिक्स। आपने देखा होगा, मोहल्ले के भइया जी या इलाके के पार्षद या फिर विधायक जी को। उनकी एक आवाज पर सैकड़ों लौंडे-लफ्फाड़े जुट जाते हैं बाइक पर सवार होकर। मरने-मारने को तैयार दिखते। रैली है, प्रदर्शन है या फिर पार्क में कल्चरल प्रोग्राम, यही युवा काम आते हैं। तो आपको भी इन्हीं पर फोकस करना है। कैसे करना है, यह आप तय करें। सामने वाले पार्क में पार्षद जी से कहकर एक वॉलीबॉल कोर्ट बनवा सकते हैं। कल्चरल नाइट का रसीद-कट्टा बनवाकर लड़कों को 10 फीसदी कमिशन पर दे सकते हैं और फिर आगे की सीटों से लेकर डांसर लाने तक का इंतजाम साथ में कोई हरकत न हो, इसकी जिम्मेदारी उनकी। &lt;br /&gt;                             मोहल्ले के लड़के के साथ कोई बात हो जाए, इलाके की किसी महिला के साथ कोई ऊंची आवाज में बात कर ले या आपके एरिया में रेहड़ी लगाने वाले को कोई परेशान करे, इस फौज के साथ पिल जाइए। ध्यान रखिए लोग जिससे थोड़ा सा डरते भी हैं, उसकी थोड़ी ज्यादा इज्जत भी करते हैं। और बड़े नेताओं को भी ऐसे ही लोग चाहिए जो यूथ को और फिर उसके सहारे बूथ को मैनेज कर सकें। &lt;br /&gt;                              इसके साथ-साथ कुछ रिटायर्ड और ईमानदार मगर सम्मान के इच्छुक बुजुर्ग भी हों, जो पैसे का कामकाज संभालें। मंच पर शुरुआती भाषण में आपकी कोशिशों की तारीफ करें और फिर आखिरी में दस लोगों के बीच कहें कि अरे भाई फलाने जी तो बड़े भले आदमी हैं। ये पॉलिटिक्स के धंधे का ओपन सीक्रेट है। जिसके पास धनपशु नहीं, उसकी नेतागीरी ज्यादा दिन चल नहीं पाती। धनपशु यानी ऐसे लोग, जिनके पास पैसा है, मगर उसकी निकासी का सही रास्ता नहीं। उन्हें लोगों की मदद करनी है, मगर तभी जब लोग एहसानमंद दिखें, उनका जयकारा लगाएं। उन्हें मंच पर स्मृतिचिह्न चाहिए, लोगों के बीच पहचान चाहिए। आप उन्हें यह सब दिलाएंगे, बदले में कभी चंदा, कभी गाड़ी तो कभी दूसरा सहयोग पाएंगे। धनपशु भी संभावनाशील लोगों पर ही दांव लगाते हैं। तो आपके पास ऐसे आसामी होने चाहिए, जो गरीबों के विवाह से लेकर, अनाथालय में फलों के बांटने तक की सारी पूंजी जुटाएं। पूंजी उनकी-प्रयास आपका और बन गया काम। इस काम में खासी सावधानी बरतनी होती है क्योंकि अब धनपशुओं को लगता है कि जब हमारे पास पैसा हो, तो सब कुछ हम ही क्यों न करें। मगर आपके पास है मीठी बोली और शातिर दिमाग। तो ज्यादा डरने की भी जरूरत नहीं है। जंगल में मोर नाचा किसने देखा। मगर आपके घर के किचन की खिड़की की रेलिंग पर कौआ भी बैठ गया और मीडिया ने देख लिया तो समझो पूरी दुनिया ने देख लिया। मीडिया को सेट करना मेहनत का काम भी है और आसान भी। इलाके के पत्रकारों के साथ यारी गांठिए। ये पत्रकार सम्मान के अलावा खबरों के भूखे होते हैं। तो उन्हें खबरें भी दीजिए। तीज-त्योहार मिठाई भिजवाना न भूलें। जब पत्रकारों से याराना कायम हो जाएगा, तो आपके छोटे-बड़े कदम को या कहें कि आपकी प्रेस विज्ञप्तियों को पर्याप्त जगह मिलने लगेगी। ध्यान रखें आज जो छोटा पत्रकार है, कल संपादक भी हो सकता है। बहुत लीला है उस दुनिया में। तो सभी के साथ संपर्क में रहें। कोई टीवी वाला इलाके में आए, तो उसकी मदद करें। फौरन नंबरों का आदान-प्रदान और चाय-पानी के लिए पूछें। जैसे-जैसे आपकी नेतागीरी आगे बढ़ेगी, मीडिया के ये रिश्ते काम आएंगे। कहीं काम नहीं हो रहा और आपने कहा कि पेपरबाजी करवा दूंगा तो काम बन जाएगा। नहीं बने तो पेपरबाजी करवा दें, पत्रकार भी खुश और आपकी हनक भी बरकरार। हमेशा याद रखें, जिसने मीडिया को साध लिया, वही सिकंदर है। बचपन में सुनी कहानी को नए संदर्भों में याद करने का वक्त आ गया है। गणेश परिक्रमा यानी किसी नेता या अधिकारी के आगे-पीछे करना, मगर स्मार्ट तरीके से। पहले यह तय करना जरूरी है कि जिसे आप फौरी तौर पर अपना आराध्य मान बैठे हैं, उसका मिजाज कैसा है। उसी के हिसाब से कभी इलाके की मशहूर गुझिया लेकर पहुंचें, कभी गुलदस्ता लेकर। बच्चों के लिए भी कुछ ले जा सकते हैं। तब तक बड़े लोगों से समय निकालकर, वजह निकालकर मिलते रहें, जब तक आपकी ऐसी हैसियत न हो जाए कि लोग आपसे मिलने आएं। और ऐसा होने पर भी गणेश परिक्रमा का मंतर न भूलें। अब आराध्य ज्यादा शक्तिशाली और काबिल लोग हो जाएंगे, तरीका भी शायद कुछ बेहतर आजमाना पड़े। किस्सा कोताह यह कि आपको जब पता चल जाए कि मेरे मुकद्दर की चाबी फलाने जी के पास है, तो फलाने जी को जो पसंद हो, उसके बारीक ब्यौरों को आप घुट्टा मार कर पी जाएं और वैसे ही करें, जैसा उन्हें पसंद हो, मगर इस सावधानी के साथ कि उन्हें आपकी चापलूसी या अपनी सुविधा के लिए कहें तोउनके प्रति आपके श्रद्धाभाव पर शक न हो। यह गुरुमंत्र कान में फूंक लें। सब कुछ छूट जाए, विचारधारा, नेता जी या फिर रुपया-पइसा, मगर जनता का साथ न छूटे। जनता साथ है तो आप निर्दलीय भी चुनाव जीत सकते हैं, नई पार्टी बना सकते हैं, आंदोलन खड़ा कर सकते हैं, कुल मिलाकर यह कि इतिहास की धारा बदल सकते हैं। मगर जनता साथ छूटी तो राजनीति अमर चित्र कथा की तरफ सिर्फ किताबों में नजर आएगी। यह जनता शातिर भी है और भोली भी। इसलिए जब भी कोई किसी काम के लिए आए, तो न तो बोलें ही न। काम हो या न हो, ठोस आश्वासन जरूरी है। एक चुटकुला शायद इस समझने में आपकी मदद करे। जंगल में सभा हुई, सब जानवर बोले - शेर बहुत परेशान करता है। बंदर बोला, किसी को नेता बना लें, हमारी बात भी सुनी जाएगी। सब राजी हो गए मगर नेता बने कौन? फिर बंदर आया और बोला मैं ही लेता हूं यह कठिन जिम्मेदारी। कुछ दिनों बाद शेर बकरी के बच्चे को उठाकर भाग गया। बकरी पहुंची बंदर के पास। बंदर फौरन निकल पड़ा। पीछे-पीछे जंगल के बाकी जानवर। शेर एक मैदान में बैठा शिकार को तड़पा रहा था। बंदर यह देखकर एक डाल से दूसरी डाल पर कूदने लगा। कुछ देर बाद जानवरों ने पूछा, अरे कुछ करते क्यों नहीं। बंदर ने जवाब दिया, देखो मेरी भागदौड़ में तो कोई कमी नहीं। तो नेता का भी यही काम है, भागदौड़ करते, कोशिश करते दिखना। काम हो जाए, बहुत अच्छी बात है, नहीं भी हो तो फरियादी को लगा कि नेता जी ने तो पूरी कोशिश की। अच्छा नेता अपनी बात नहीं कहता, लोगों की बात कहता है, जैसे लोग सुनना चाहते हैं। जनता को लगे कि अरे यह तो हमारी सोच को आवाज दे रहा है। तो शीशे के सामने, गली-मोहल्ले पर, नगर-निगम की बैठक में यानी हर मुमकिन जगह बोलें और ऐसे बोलें गोया आप अमेरिकी प्रेजिडेंट बनने के बाद पहली स्पीच दे रहे हैं। ध्यान रखें कि बुझी आवाज और बुझे चेहरों को कोई याद नहीं रखता। जरूरत लच्छेदार बातों, भावुक अंदाजों और हाथ लहराने की खास अदाओं की है। अगर भाषा अच्छी नहीं तो कोई बात नहीं, किसी भी हिंदी साहित्य या राजनीति शास्त्र के स्टूडेंट को अपने संगठन के युवा मोर्चे का प्रभारी बनाएं और हर जरूरी मौके पर उससे भाषण लिखवाएं। आपकी स्पीच में अगर लोकल जबान, लोकल फैक्टर आ जाएं, तो कहने ही क्या। कानपुर में बोलें तो कहो गुरु के अंदाज में और नागपुर में बोलें तो भाषण में संतरे की खुशबू आए। दूसरी जरूरी चीज है आंकड़ों का सही इस्तेमाल। इस बारे में भाषणबाजी के जरिए समझाने के बजाय बस एक उदाहरण ही काफी रहेगा। मसलन, आपको कहना है कि आपके राज्य की मुख्यमंत्री बहुत ज्यादा हीरे-मोती के आभूषण पहनती हैं, जो आपके हिसाब से गलत है। दिखावा नहीं करना चाहिए। तो आप कहें कि भाइयों हमारे प्रदेश की सबसे बड़ी जनसेवक होने का दावा करने वाली मुख्यमंत्री जी जितने करोड़ रुपये जेवरों पर खर्च करती हैं, उनसे लाखों गरीब बहनों के मंगलसूत्र बन सकते हैं। भारत भावुक लोगों का देश है। झंडे और डंडे के लिए मरने-मिटने वाले लोग हैं यहां। यहां प्रतीकों की राजनीति बहुत हिट रहती है। फलाने जी ने झोपड़ी में रात गुजारी, ढिकाने जी ने बीच सड़क पर रुककर मूंगफली वाले से बात की, हर बात की जनता चर्चा करेगी। तो आप भी कुछ ऐसा करें, जिसका प्रतीकात्मक महत्व हो। इलाके के बच्चों को साथ लेकर 15 अगस्त की शाम या 16 अगस्त की सुबह सड़कों पर निकलें और कागज के तिरंगे जो धूल में लोट रहे हैं, उन्हें समेटना शुरू कर दें। फेंक दिए गए झंडे समेटने से पहले मीडिया को खबर करना न भूलें। सबक यह कि अच्छा काम करना है, मगर यह भी ध्यान रखना है कि आपके शोर मचाए बिना लोगों की उस नेकी पर नजर जाए। यह तो खूब सुना होगा कि दिल का रास्ता पेट से होकर जाता है। मगर पॉलिटिक्स की पाठशाला का अहम सबक है, अपने बॉस, अपने बड़े नेता से घरेलू संबंध कायम करना। इसके लिए जरूरी है कि उनकी पत्नी से भी आपके संबंध अच्छे हों। पहला रूल, नेता जी की पत्नी को भाभी जी नहीं, बहन जी कहें। नेता जी का आप पर यकीन बढ़ेगा, उनकी पत्नी आपके साथ ज्यादा सहज होंगी, बच्चे मामा जी कहकर फरमाइश कर सकेंगे। जब भी घर जाएं, बहिनजी की पसंद की चीज ले जाएं। जरूरी नहीं कि हर बार कुछ भारी-भरकम ही हो। मसलन, अरे दीदी गांव से आ रहा था, दद्दा ने जिद करके ताजा गुड़ दे दिया। मुझे लगा सर्दियों में आपको अच्छा लगेगा, तो थोड़ा सा ले आया। इतना कहकर चुपचाप झोला रख दें और बात बदल दें। अगर अंदर एंटर कर गए, तो नेता जी भी आपको सिर पर ज्यादा चढ़ाएंगे। मगर कुछ नेता घरघुस्सू लोगों को ज्यादा पसंद नहीं करते। तो उनके सामने आपको प्रकट करना है कि महिलाओं में और चूल्हे-चौके में आपको ज्यादा रुचि नहीं। जैसा मरीज-वैसा इलाज। राजनीति में आगे बढ़ने के लिए सिर्फ बड़ी लकीर खींचना ही जरूरी नहीं, पहले से मौजूद लकीरों को इरेजर की मदद से धुंधला करना भी जरूरी है। मगर महत्वाकांक्षा को हमेशा अंदर की जेब में रखें। जब आप ज्यादा आगे बढ़ते दिखेंगे, तो लोग लंगड़ी मारने की कोशिश भी करेंगे। इसलिए ऐसे नजर आएं गोया आप तो खुद कुछ चाहते ही नहीं हैं। कई बार बैलों की लड़ाई में बंदर मजे मारता है। मगर साथ ही यह भी याद रखें कि लड़ाई बैलों के बीच ही होती है। तो आगे बढ़ें, हैवीवेट बनें मगर ऐहतियात के साथ। आप इतने दिन से लोगों के बीच काम कर रहे हैं, उनकी मदद कर रहे हैं, तो अब मौका है यह देखने का कि आपका हिसाब-किताब कैसा है। किसी नेता की रैली या फिर आपका ही अपना कोई प्रोग्राम, उसमें कितने लोग मदद कर रहे हैं, कितने लोग चंदा कर रहे हैं, इसे गौर से देखें, फ्यूचर का प्लान तैयार करने में मदद मिलेगी। साथ ही जिन नेता जी के साथ आप लगे हैं, उन्हें भी अपने जनाधार का एहसास कराते रहें। एक बात और, अगर लगे कि आपके नेताजी की लुटिया ही नहीं, सारे बर्तन डूबने को हैं, तो उन्हें एकदम से छोड़ने के बजाय कुछ दिन इंतजार करें और इस बीच किसी दूसरे नेता के साथ यारी मजबूत करें। कब किसकी किस्मत का कनेक्शन कहां लग जाए, कहा नहीं जा सकता, इसलिए अपने आदर्श नेता का चुनाव करने में सावधानी बरतें और साथ रहें मगर फैवीक्विक की तरह नहीं। इसके अलावा दूसरी पार्टियों के नेताओं से भी बेहतर संबंध रखें। हमारे उनके साथ वैचारिक मतभेद हैं, आपस में कोई दुश्मनी नहीं या फिर मतभेद हैं, मनभेद नहीं जैसे जुमलों का इस्तेमाल करें। सत्ता आती-जाती है, मगर लोगों को एक दूसरे से काम हमेशा पड़ते हैं। तो यही संबंध काम आते हैं। जब भी कहीं कुछ गड़बड़ हो, आपके सक्रिय होने का समय आ गया। लोगों की खुशी में भले ही शरीक न हो पाएं, उनके गम में जरूर शरीक हों। फिर चाहे वह परिचित के लोग हों या अपरिचित। दुख के साथी ज्यादा दिनों तक याद रहते हैं। इसलिए आस-पड़ोस, मोहल्ला, विधानसभा, जहां भी आपको पता चले और जाने की गुंजाइश हो, जरूर पहुंचें। लोगों से मुलाकात होगी, आपके रिश्ते जुड़ेंगे और आगे काम आएंगे। इस मामले में गरीबों को पहली प्राथमिकता दें। एक कड़वा सच याद रखें - गरीब सबसे ज्यादा वोट डालते हैं और आपके एहसान को सबसे ज्यादा याद रखते हैं। इसी तरह कहीं ऐक्सिडेंट हो गया या कुछ और अनहोनी हो गई, फौरन सक्रिय हो जाएं। पीड़ितों को मुआवजा मिले, इसमें देरी होने पर सड़क जाम हो, प्रधानमंत्री को ज्ञापन दिया जाए और ऐसे ही तमाम जरूरी काम। इसी दौरान आप एक बार फिर से अपनी ताकत तौल सकते हैं। बीच में मौका देखकर मगर कुछ संभलकर सत्ता प्रतिष्ठान से भी भिड़ा जा सकता है, मगर हद से ज्यादा नहीं। करियर के शुरुआती दौर में खुद बहुत ज्यादा पैसा बनाने की जुगत में न रहें। सार्वजनिक जीवन में आज भी लोगों को ईमानदारी एक पूजने लायक मूल्य लगता है। आगे मौके आएंगे, जो देर से और आराम से खाएंगे, वही देर तक खाएंगे, इसलिए रुपयों-पैसों के मामले में सावधानी बरतें। चंदे का हिसाब साफ रखें। कहीं फर्जी सर्टिफिकेट या ऐफिडेविट के जरिए अपना काम करवाने से बचें। बड़ा नेता बनने पर ये छोटी-छोटी चूकें नासूर बन सकती हैं। हर नेता का अपनी स्टाइल होता है, आपका स्टाइल क्या है? खास तरह के कपड़े पहनें, खास ढंग से जुमलेबाजी करें या खास मौकों पर मसलन नवरात्र या रमजान में ज्यादा सक्रिय दिखें। साथ ही एक कैलेंडर साथ रखें। नहीं-नहीं, यह साल का कैलेंडर नहीं बल्कि खास आपका कैलेंडर है। इसमें काम के तमाम नंबरों के अलावा किस नेताजी का हैपी बर्थडे कब है, मैरिज ऐनिवर्सरी कब है, हज यात्री कब जा रहे हैं, कांवड़ कब आ रहे हैं, जैसे ब्यौरे रखें। नेता जी की मेमरी में स्थायी ठिकाना बनाने का हर मुमकिन मौका इस्तेमाल करें। इसके अलावा उनके इर्द-गिर्द हो रही राजनैतिक उठापटक पर भी नजर रखें। चुगली करने यानी काम की जानकारी लेने-देने में आसानी होगी। आपमें कुछ तो खास होगा। बोलते अच्छा हैं, सोचते अच्छा हैं या कुछ खास जानते हैं, तो उसे अपनी ताकत बनाएं। कोई समाजसेवी संस्था चलाएं, कोई एनजीओ खोलें, कहीं श्रमदान के जरिए पौधे लगवाएं, कुछ अच्छा दिखने वाला काम करें। अब अगर आपको लिखा-पढ़ी का शौक है, तो आरटीआई आपके काम आ सकती है। हर होने वाले और न होने वाले काम के लिए आरटीआई दाखिल करें। अधिकारियों को खौफ होगा, पत्रकार स्टोरी की फिराक में मिलेंगे और आप ज्यादा सक्रिय दिखेंगे। सरकारी सब्सिडी, सरकारी फंड, इन सब बोरिंग से ब्यौरों का तफसील से ध्यान रखें, तभी जनता आपका ध्यान रखेगी। इतना सब करने के बाद भी आप अगर सफल नेता न बन पाए तो? हो सकता है, मगर इतना तय है कि आप काम के और इसीलिए लोगों की निगाह में अच्छे आदमी जरूर बन जाएंगे। सदी की शुरुआत में आई एक चर्चित हिंदी फिल्म में नायक एक बुजुर्ग के यह पूछने पर कि क्या करते हो, बहुत फख्र के साथ कहता है, आई एम अ फिक्सर सर, आई फिक्स थिंग्स। बस आपको भी फिक्स करना है अपने सपने को सचाई से। जो चीजों को चलाए, चालू रखे, उसे नेता कहते हैं। चलते रहिए-चलाते रहिए, क्योंकि धूप से परेशान करोड़ों निगाहें आंखों पर हाथ टिकाए इस लोकतंत्र में एक मसीहा के आने का इंतजार कर रही हैं...कहीं वह आप तो नहीं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-4879770958965372671?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/4879770958965372671/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/2010/01/blog-post_1981.html#comment-form' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' 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/&gt;                           ये और ऐसे ही कई सवाल राजनैतिक गलियारों में घूम रहे हैं। एसपी में चल रहे 'यादवी संघर्ष' का आनंद ले रहे लोग ये ज़रूर जानना चाहते है कि आखिर अमर सिंह के पास वो कौन सा दांव है जिसने मुलायम को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया है। 'अमर विवाद' में मुलायम का रुख रोज बदल रहा है। उनकी भाषा और लहजे में हो रहे परिवर्तन को लोगों ने बारीकी से देखा है। राजनीति के चतुर खिलाड़ी मुलायम और अमर के बीच सीधा संवाद सोमवार को ही हुआ है। मुलायम के रुख में सोमवार को आए बदलाव की मुख्य वजह अमर सिंह का ब्लॉग पर लिखा गया वो लेख माना जा रहा है जिसमें अमर ने अपनी कथा आम लोगों को बताई थी। अमर ने उनके खिलाफ बोले मोहन सिंह को इसी ब्लॉग में ये याद दिलाया कि कब उन्होंने मोहन सिंह का इलाज कराया और कब उन्हें चुनाव के लिए बड़ी रकम दी। अमर ने बृजभूषण तिवारी के जरिए एसपी के सबसे सीनियर सदस्य जनेश्वर मिश्रा पर भी निशाना साधा। अमर उन्हें ये बताना नहीं भूले कि किस तरह उनके इलाज के लिए उन्होंने भोपाल में अंबानी का जहाज पहुंचाया था और डॉ. प्रताप रेड्डी से कहकर सारी व्यवस्थाएं की थीं। राजनैतिक क्षेत्रों में ये माना जा रहा है कि अमर ने मोहन सिंह और जनेश्वर मिश्रा के जरिए मुलायम तक संकेत पहुंचा दिया था। यही वजह थी कि मुलायम ने सवेरे-सवेरे अमर सिंह को फोन करके सैफई आने का न्योता दे दिया और रामगोपाल को घर के खनकते बर्तन याद आने लगे। बेनी प्रसाद वर्मा, राज बब्बर, आजम खान और कल्याण के बाद मुलायम ने उन सभी मुस्लिम नेताओं को भी यह संदेश दिया है जो अमर के एसपी से निष्कासन की मांग कर रहे थे। &lt;br /&gt;अमर के पास तुर्प का वो इक्का है जिससे मुलायम की राजनैतिक पारी अर्श से फर्श पर आ सकती है। इसलिए मुलायम फिलहाल अमर के साथ हैं लेकिन अमर फिलहाल मुलायम होने का नाम नहीं ले रहे।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3036151301447422075-4045943788062507100?l=ashu-hasrat.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://ashu-hasrat.blogspot.com/feeds/4045943788062507100/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' 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