Thursday, October 13, 2016

केजरीवाल के लिए क्यों जरूरी है पंजाब ?"

जुम्मा-जुम्मा ४ सालों के अपने राजनीतिक इतिहास में देश की राजधानी दिल्ली में दो बार सरकार बना चुकी अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी पहली बार दिल्ली के बाहर किसी राज्य में विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमाने जा रही है।
    हालांकि इससे पहले 2014 में लोकसभा चुनाव में भी आम आदमी पार्टी ने हाथ आजमाया था लेकिन मोदी लहर में आप को ऐसी करारी शिकस्त मिली जिससे उबरने में उसे ना सिर्फ महीनों लग गए बल्कि आप के भीतर हार को लेकर हाहाकार मच गया था। 
  लेकिन 2015 में फिर से दिल्ली विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल का जादू चला और ऐतिहासिक बहुमत के साथ अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी 70 में से 67 विधायकों के साथ दिल्ली की सत्ता पर काबिज हुए।
     अरविंद केजरीवाल अब जनवरी 2017 में होने वाले पंजाब और गोवा विधानसभा में दांव आजमां रहे हैं। आप ने अब तक लगभग आधे उम्नीदवारों के नाम का ऐलान भी कर दिया है।
  
आखिर पंजाब चुनाव अरविंद केजरीवाल के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है ?
    जवाब की शुरूआत दिल्ली से की जा सकती है। दिल्ली में ऐतिहासिक बहुमत के बाद केजरीवाल सरकार लगातार केंद्र सरकार के साथ किसी ना किसी मुद्दों पर जूझती दिखाई दी। लेफ्टिनेंट गवर्नर नजीब जंग पर के साथ जंग करती दिखी। केजरीवाल लगातार आरोप लगाते रहे मोदी सरकार नजीब जंग के जरिए उन्हे काम नहीं करने दो रही। दिल्ली का मौजूदा दर्जा  यूनि़यन टेरिटरी का है। बावजूद इसके अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मौजूदा व्यवस्था को नकार कर एक पूर्ण राज्य की तरह चलाते दिखे। हालांकि दिल्ली की सभी पार्टियों ने चुनावों के दौरान दिल्ली के लिए पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग करते रहे। 
     जाहिर है दिल्ली की व्यवस्था में पुलिस केजरीवाल सरकार के अधीन नहीं है। चुनी हुई सरकार की सुनना तो दूर दिल्ली पुलिस चुनी हुई सरकार और उसके विधायकों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करती दिखने लगी। केजरीवाल के मंत्री से लेकर विधायक एक के बाद एक गिरफ्तार होने लगे। कुछ मामलों में कोर्ट ने पुलिस को गिरफ्तारियों पर लताड भी लगाई। केजरीवाल के भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम को तगडा लगा जब ACB को एक नोटिफिकेशन जारी करके केंद्र सरकार ने उसे अपने अधीन कर लिया। हाल ही में आए दिल्ली हाईकोर्ट के फैसला के बाद उपराज्यपाल ने केजरीवाल सरकार के पिछले सभी फैसलों की फाइलें मंगाई और उस पर जांच शुरू कर दी। इन तमाम विवादों को बीच दिल्ली में विकास की रफ्तार थम गई। अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री होते हुए भी अब दिल्ली के लिए बिना उपराज्यपाल की मंजूरी के बिना कोई फैसला नहीं ले सकते। 
   ऐसे में केजरीवाल अपने राजनीतिक मकसद को पूरा करने में जी जान से लगे हैं। लोकसभा चुनाव में आप ने पंजाब में आश्चर्यजनक तरीके से 4सीटें जीतीं। यहीं से शुरूआत हुई पंजाब विधानसभा चुनाव लडने की। पंजाब एक पूर्ण राज्य है और पुलिस समेत तमाम एजोंसियां चुनी हुई सरकार के निर्देशों पर ही काम करती हैं। यानि अगर आम आदमी पार्टी पंजाब चुनाव जीतती है तो ये पहला राज्य होगा जहां उसके पास अथाह शक्ति होगा लेकिन साथ ही किसी भी शासकीय नाकामी को छुपाने के लिए कोई भी बहाना नहीं होगा। ड्रग्स से जूझ रहे पंजाब को ड्रग्स मुक्त बनाने का वादा करने के बाद अरविंद केजरीवाल पर दबान होगा कार्रवाई करने का। साथ ही भ्रष्टाचार को केजरीवाल पंजाब से खत्म कर पाते हैं या नहीं सबकी नजर इस पर भी होगी। किसानो की खुदकुशी समेत ऐसे तमाम मुद्दे हैं जिसको सुलझाने का वादा अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी पंजाब में लगातार कर रही है। केजरीवाल दिल्ली में मोहल्ला क्लीनिक बनाने और सरकारी स्कूलों को ठीक करने का दावा कर रहे हैं लेकिन जमीन ना मिलने का हवाला भी देते हैं। उनकी हर महत्वपूर्ण योजना को लिए पंजाब में उनके पास संसाधन भी होंगे और शक्ति भी। कुल मिलाकर अगर अरविंद केजरीवाल अपने दिल्ली मॉडल को पंजाब में सफलतापूर्ण लागू कर पाते हैं तो ना सिर्फ पंजाब के अलावा दिल्ली में बल्कि  देश के दूसरे हिस्सों में भी अपनी सरकार का दम दिखा पाएंगे।

  आप के लिए पंजाब की जीत का दूसरा और बडा मायना बेहद राजनीतिक है। 
अगर आम आदमी पार्टी पंजाब में किला फतह कर पाती है तो वो देश की तीसरी पार्टी होगी जिसकी एक से ज्यादा राज्यों में सरकार होगी। साथ ही एक संदेश होगा कि कांग्रेस की जगह अगर कोई ले रहा है तो वो है अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी। दिल्ली विधानसभा चुनाव में आप ने ना सिर्फ बीजेपी बल्कि कांग्रेस का पूरा सफाया कर दिया था। कांग्रेस एक सीट जीतना तो दूर ज्यादातर सीटों पर जमानत खो बैठी। माना जाता है कि अल्पसंख्यक वोट और दलित गठजोड जो दिल्ली में कांग्रेस की ताकत बना रहा उसने बीजेपी को हराने के लिए आप का दामन थाम लिया ऐसे में पंजाब की जीत से केजरीवाल ये संदेश देने में कामयाब होंगे कि बीजेपी को सिर्फ आम आदमी पार्टी ही टक्कर दे सकती है। जाहिर है बीजेपी के खिलाफ एक बडे वोटबैंक को अरविंद केजरीवाल अपने खेमे में कर सकते हैं खासकर उन राज्यों में जहां कांग्रेस की सीधी टक्कर बीजेपी से है।

   आखिर अरविंद केजरीवाल की रणनीति क्या है ?
अरविंद केजरीवाल और उनकी राजनीति को लेकर किसी तरह की भविष्यवाणी करना संभव नहीं है। लेकिन उनकी राजनीति पर नजदीक से नजर रखने के कारण कुछ चीजें जरूर समझ सकता हूं। 
पंजाब के अलावा केजरीवाल गोवा में भी दांव आजमा रहे हैं। पंजाब में अगर केजरीवाल को जीत मिलती है और उसके साथ अगर गोवा में कुछ सीटों भी मिलती हैं तो उनके लिए ये ब्रेड पर मक्खन का काम करेगा। जाहिर दिल्ली में सिमटी ४ साल पुरानी पार्टी दूसरे राज्यों की विधानसभाओं में मौजूदगी दर्जे करेगी। 
ऐसे में मुझे जो समझ में आता है वो ये कि अरविंद केजरीवाल उन सभी राज्यों में चुनाव लडेंगे जहां मुकाबला सिर्फ बीजेपी और कांग्रेस के बीच है। पंजाब के बाद अरविंद केजरीवाल का पूरा ध्यान गुजरात में केंद्रित होगा। इस बीच आप के नेता मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ, झारखंड, कर्नाटक और हिमाचल में संगठन विस्तार का काम शुरू कर चुके हैं। 
   पंजाब की जीत इस लिए भी केजरीवाल के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उनका अगला निशाना गुजरात होगा। ऐसे में आप पंजाब में बडे बडे योजनाओं को लागू कर गुजरात में उसका बखान करने से पीछे नहीं रहेगी। गुजरात ना सिर्फ बीजेपी बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के लिए भी नाक की लडाई होगी। जाहिर है १५ साल राज्य करने के बाद नरेंद्र मोदी गुजरात में किसी नई पार्टी या यीं कहें कि अपने सबसे बडे धुर विरोधी को टिकने नहीं देंगे। हालांकि गुजरात में बीजेपी सरकार से नाराज पटेलों को लुभाने में केजरीवाल कामयाब रहे हैं जिनका वोट प्रतिशत अच्छा खासा है। लेकिन बावजूद इसके गुजरात में पैर जमाना केजरीवाल के लिए इतना आसान नहीं होगा। लेकिन पंजाब की जीत के बाद वो बीजेपी विरोधी वोट को अपने खेमे में लाने में कामयाब हो सकते हैं।
  
लेकिन अगर अरविंद केजरीवाल पंजाब में परचम फहराने से चूक जाते हैं तो ना सिर्फ आम आदमी पार्टी बल्कि अरविंद केजरीवाल के सभी सियासी अरमानों पर पानी फिर जाएगा। इतना ही नहीं केजरीवाल के ऊपर अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाने का संकट भी आ सकता है।

लेकिन पंजाब की लडाई इतनी आसान होगी?
हालिया सर्वे बताते हैं कि आम को पंजाब में बेहतर जन समर्थन है लेकिन कुछ सर्वे इससे इत्तेफाक नहीं ऱखते। अकाली सरकार, कांग्रेस और आप ने पंजाब में तिकोना मुकाबले का माहौल बना दिया है। आप को लिए मुश्किल साबित हो सकता है उसके अपने परिवार के भीतर का घमासान। छोटेपुर समेत कई नेताओं के पार्टी छोडने का असर भी नकारा नहीं जा सकता। साथ ही दिल्ली में सीडी और चिकनगुनिया के मामले पर घिरी सरकार को पंजाब में सफाई देनी पड सकती है। यानि पंजाब में अरविंद केजरीवाल की राह आसान नहीं है।

कुल मिलाकर ये तमाम बातें इशारा करते हैं कि आखिर अरविंद केजरीवाल के लिए पंजाब इतना महत्वपूर्ण क्यों है ।

7 comments:

  1. very well said Bro.real test for Ak but am sure they will pass will flying colors.

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  2. Is AK will support Mayawati...if it is gud choice.I think aap should have alliance with Mayawati

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  3. Is AK will support Mayawati...if it is gud choice.I think aap should have alliance with Mayawati

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