


सालों से अगर हमारे मस्तिष्क पटल पर अगर कोई भ्रांति ने डेरा जमा रखा हो तो ज़रूरी नहीं है को वो अटल सत्य है। वस्तुत: उस विषय विशेष से जुड़ी धारणा किसी परिपेक्ष में यथार्थ हो सकती है। मैंने बिहार नहीं देखा है। लेकिन बिहार पर कटाक्ष करने में मैं भी पीछे नहीं रहा। मैं भी से मेरा तात्पर्य कदाचित आपको भी समझ में आ गया होगा। जब मतभ्रांति टूटी तो मुझे नालंदा विश्वविद्यालय याद आया। मुझे वो वक्त भी याद आया जब सिर्फ आर्यावार्त ही नहीं अपितु समस्त संसार के विद्याप्रेमी बिहार की धूलि पाकर स्वयं को धन्य समझते थे। सार और संसार का ज्ञान केवल बिहार के पास था। राजनीति और कूटनीति यहीं की देन है। इसी राज्य ने चाण्क्य दिया तो इसी राज्य ने चंद्रगुप्त मौर्य भी दिया। इतिहास के पन्नों से शुरू इस यात्रा को मैं वर्तमान परिवेश में ले जाना चाहुंगा। 90 के दशक तक बिहार पर लालू यादव सत्ता शीर्ष रहे। राजनीति और साम्राज्यवाद का अनुपम मेल बिहार में देखने के मिल रहा था। लालू अवसरवादी थे लेकिन जनता के सामने अपनी छवि वो समाजसेवी की बनाए रखते थे। बिहार को विकास की बारहखड़ी भी नहीं पता थी। समयचक्र बदला...लोगों की जिज्ञासा बढ़ी और बदलाव की बयार ने सबकुछ बदल दिया। बिहार में शिक्षा की दर सबसे कम रही। बावजूद इसके देश की व्यवस्था बनाए रखने वाले साहब इसी प्रदेश से आते रहे। बिहार और बिहार के लोग आज भी उनपर गर्व करते हैं। लोकतंत्र का चौथा स्तंभ भी इसी प्रदेश ने मजबूत किया।
15 सालों के लालूराज ने बिहार की छवि कुछ यूं बदहाल की जिसका नतीजा बिहार के लोगों को पूरे देश में भुगतना पड़ा। प्रदेश को विकास और शिक्षा से दूर क्या रखा, पलायन दर बढ़ती रही। महाराष्ट्र में बिहार वासियों के साथ जो कुछ भी हुआ उसका एक कारण आप पलायन को मान सकते हैं। कूटनीति और राजनीति का जगतगुरू बना ये प्रदेश अब सांस लेने लगा है। विकास दर बढ़ चुकी है। शिक्षा दर बढ़ रही है। पूंजीवादी अब बिहार में मौका तलाशन लगे हैं। ज़ाहिर है आनेवाला वक्त बिहार के लिए एक नया सूरज लेकर आने वाला है। इस लेख को लिखने के लिए मुझे एक लेख ने प्रेरित किया है। कहीं पढ़ा था कि देश के अन्य राज्यों की तुलना में विभिन्न क्षेत्रों में पिछड़ा बिहार शराब की खपत के मामले में भी सबसे पीछे है और यहां प्रति सौ व्यक्ति इसकी खपत मात्र 45 लीटर है। देश की राजधानी दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में शराब की खपत क्रमश: 999 लीटर, 612 लीटर, 594 लीटर, 414 लीटर और 144 लीटर है। अगर विदेशों की बात करें तो दक्षिण अफ्रीका में 2122 लोगों पर शराब की एक दुकान है। इसी प्रकार ब्रिटेन में 303, अमेरिका में 265, आस्ट्रेलिया में 483, रुस में 432 तथा चीन में 195 लोगों पर एक दुकान मौजूद है। इस खबर को मैं बिहार के लिए एक नया सवेरा मानता हूं। बिल गेट्स का हालिया दौरा इस सेवरे में जान फूंकता है। मैं किसी पार्टी या व्यक्ति विशेष का नाम नहीं लूंगा न ही मैं किसी राजनीतिक पार्टी से संबंध रखता हूं। लेकिन बिहार का वर्तमान चेहरा मुझे सोचने पर मजबूर करता है कि मैं अपनी राय बदलूं। हर अंधकार के बार सूरज उगता है और बिहार का सूर्योदय हो चुका है। बिहार के लोग बदलाव के पक्ष में हैं और अब बिहार में एक नया युग आएगा।



