

आज सुबह का अखबार सिर्फ आम आदमी की बजट से उम्मीदों से ही भरा नहीं था। ना ही इसमें सिर्फ प्रणब दा की गई गुहारों और घर बैठे खाली विश्लेषकों की राय से भरा था। अखबार के एक पन्ने में कुछ अलग ही खबर छपी थी। खबर भी ऐसी की जिसपर यकीन करना मुश्किल था, लेकिन ये सच था। दिल्ली की एक जानी-मानी हस्ती हैं कंवर सिंह तंवर। दिल्ली और आस-पास रहने वाले लोग इनको बखूबी जानते होंगे। विधानसभा और लोकसभा में ये बहुजन समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार रहे हैं। इन साहब के साहबज़ादे शादी की उम्र् तक पहुंच गए हैं। ज़ाहिर है इतनी बड़ी हस्ती के घर की शादी है तो कुछ खास ही होगी। तो जनाब तंवर साहब के साहबजादे का रिश्ता पूर्व विधायक सुखबीर सिंह जौनपुरिया की बेटी से तय हुई है। अब आप सोचेंगे कि मैं दूसरों के घरों के निजी मामलों पर कटाक्ष करता हूं। लेकिन कहानी शुरू ही यहीं से होती है। चलिए मैं आप से ये सवाल पूछता हूं कि आप अपनी बेटी की शादी में क्या तोहफा देते हैं। मैं तोहफा इसलिए कह रहा हूं क्योकि अगर मैं दहेज का नाम लूंगा तो आप मुझपर असमाजवादी और दहेज जैसी बुरी प्रथा को बढ़ावा देने का आरोप लगाएंगे। इससे अच्छा है कि मैं इसे तोहफे का ही नाम दूं। हां तो जनाब...आप अपनी बेटी और दामाद को तोहफे में क्या दे सकते हैं। गाड़ी...लाखों रुपए...बंगला...या फिर गहने। लेकिन एक पिता ऐसा भी है जिसने पितृप्रेम का एक नया इतिहास रच दिया है। जी हां सुना है पूर्व विधायक जौनपुरिया ने अपने होने वाले दामाद को तोहफे के रूप में उड़न खटोला यानि हेलिकॉप्टर दिया है। पिता के अरमान देखिए..सोचा होगा कि बेटी और दामाद सड़क पर गाड़ियों के भीड़ में कहीं परेशान नाहो जाएं। कहीं गाड़ी का एसी खराब हो गया तो दामाद जी को तकलीफ होगी। और गर कहीं दिल्ली से चंडीगढ़ जाना होगा तो घंटों गाड़ी चलाने की जेहमत ना उठानी पड़ी। सो जौनपुरिया साहब ने अपने दामाद को एक नया हेलिकॉप्टर तोहफे में दे दिया। मेरी भाषा से आपको लग रहा होगा कि मैं ईर्ष्या और द्वेश का शिकार हो रहा हूं। लेकिन ऐसा नहीं है। मैं तो पिता के प्रेम पर विश्वास करने की कोशिश कर रहा हूं। जौनपुरिया साहब ने चुनाव लड़ते समय अपनी संपत्ति का जो ब्यौरा दिया था उस पर नज़र डालें तो उनका ये तोहफा कुछ और ही कहानी कहता है। लेकिन जब काफी समय के लिए वो विधायक की कुर्सी पर विराजमान थे तो कत्तई ताज्जुब नहीं होता। सालों पहले बिहार में भी कुछ ऐसी ही मिसाल देखने को मिली थी। बिहार की कुर्सी पर लालू यादव विराजमान थे। सीएम साहब की बेटी की शादी थी। सुना है शहर की सभी दुकानों से फ्रिज, टीवी और कूलर एक एणे मार्ग पहुंच गए थे। बेटी की शादी में आए सभी मेहमानों को तोहफे दिए गए थे। लेकिन जौनपुरिया साहब ने बेटी के प्रेम में जो नया इतिहास रचा है उसे तो कोई टाटा-बिड़ला या अंबानी भी नहीं तोड़ पाएंगे। जौनपुरिया साहब ने अरबों रुपए का ये हलिकॉप्टर कितनी पसीना बहाकर खरीदा है इसकी जांच होगी या नहीं ये मैं नहीं जानता लेकिन इस शादी को मैं कभी भी नहीं भूल पाउंगा।
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