


बजट आने वाला है। आद आदमी बढ़ती महंगाई से पहले ही हलकान है। ज़ाहिर है हर किसी की नज़र प्रणब के पिटारे पर लगी है। दादा के बक्से में आम लोगों के लिए क्या है...कोई कहता है कि दादा टैक्स की छूट को 2 लाख तक कर देंगे। तो कई कहता है कि निवेश की सीमा बढ़ा सकते हैं। हर किसी की अपनी-अपनी सोच है। लेकिन सोच के पीछे का सच दरअसल ये है कि ये इनकी ज़रूरत है और अपनी ज़रूरत के लिए आम आदमी इस बजट स उम्मीदें लगाए बैठा है। देश के प्रधानमंत्री ने वादा किया है कि विकास दर को इस साल 9 फीसदी तक पहुंचाएंगे। आगे क्या होगा ये तो पता नहीं लेकिन महंगाई दर अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। दाल रोटी से भी मोहताज हो रहे देश के लोगों ने नज़रें उठाकर सवाल पूछा तो उन्हे जवाब में कहा गया कि सब्र करो। देखिए ना...महंगाई भी कैसे-कैसे छलावा करती है। कागज़ों में महंगाई दर कम होती दिखाई पड़ी लेकिन बाज़ार में रोजमर्रा की चीज़ों के दाम और आम आदमी की जेब कुछ और ही कहानी कहती है। सुना है कि भारत की अर्थव्यवस्था की गणना दुनिया में पांचवें नंबर पर की जाती है। हम विकसित देशों की तुलना में खड़े होने लगे हैं। लेकिन ज़मीनी हक़ीकत फिर से हमारे सपनों के आगे अंधेरा कर देती है। गरीबी, बेरोजगारी, और भ्रष्टाचार हमारी ज़ड़ों को खोखला कर रहा है। लेकिन फिर भी हमारे सपने सातवें आसमान के घोड़े पर सवार हैं। प्रणब बाबू बजट के रूप में क्या तोहफा देंगे। रेल बजट में दीदी ने आम आदमी की जेब का ख्याल रखा। चालू डिब्बे में सफर करने वालों पर बोझ नहीं डाला। टिकटों के दाम नहीं बढ़ाए। ये और बाता है कि उनका बजट सिर्फ बंगाल के लिए ही था। लेकिन हम इस बात से ही खुश हैं कि हमारी जेब से ज्यादा पैसे नहीं निकलेंगे। महंगाई में कुछ पैसे तो बचेंगे। हमारे कुछ भाई ऐसे हैं जो पैसों से पैसा बनाना जानते हैं। शेयर बाज़ार के दांव-पेंच हमें समझ में नहीं आते लोकिन वो खिलाड़ी हैं। साल के इस दिन उनकी धड़कनें भी बढ़ी होंगी। दादा के पत्ता खोलने के बाद बैंकों के ब्याज दरों में भी उथल-पुथल हो सकती है। ज़ाहिर है ब्याज़ बढ़ेंगे तो कइयों के सपने बिखर जाएंगे। बंगले का सपना 2 बेडरूम वाल फ्लैट में बदल जाएगा और फ्लैट का सपना देखने वाले तो घर को ही सपना समझ कर संतोष कर लेंगे। पेट्रोल की कीमतें पहले ही आसमान पर हैं। डीजल के दाम रोककर सरकार तेल कंपनियों के दबाव में है। ज़ाहिर है उस तबके का दबाव सरकार बर्दाश्त नहीं कर सकती है। फिर चाहे कीमतों में आग ही क्यों ना लग जाए। तो मन मारने से अच्छा है कि पहले ही तैयार रहें और भगवान से प्रार्थना करें कि दादा का पिटार जब खुले तो मेरी लिखी सारी बातें सिर्फ कोरी कल्पना बनकर रह जाए। सच कहूं तो मैं भी यही चाहता हूं।
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