Thursday, February 24, 2011

ये बाबा बोलता है...




बाबा रामदेव आजकल सुर्खियों में हैं। कारण है काला धन... काला धन बाबा के पास है या नहीं ये या तो बाबा बखूबी जानते हैं या फिर वो लोग जो बाबा पर काला धन रखने का आरोप लगाते हैं। दुनिया भर में योग क्रांति लाने वाले बाबा रामदेव के सितारे फिलहाल गर्दिश में हैं। जब से बाबा को राजनीति की चस्का लगा है, आए दिन उनपर सियासी हमले हो रहे हैं। हाल ही में बाबा आसाम गए थे। योग शिबिर में योग का ज्ञान देते-देते ना जाने बाबा की ज़बान फिसली या फिर आदतन समझिए, बाबा ने भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ बोलना शुरू कर दिया। योगगुरू का ये ज्ञान स्थानीय कांग्रेस नेता को रास नहीं आया। नोताजी ने बाबा को सिर्फ योग पर ध्यान देने की नसीहत दे डाली। बस फिर क्या था ? बाबा नेताजी पर बरस पड़े और बाबा बनाम कांग्रेस में बयानबाज़ी का दौर शुरू हो गया। रामदेव ने साफ-साफ कह दिया कि अगर बाबा को छेड़ोगे तो बाबा छोड़ेगा नहीं। बाबा का बयान और क्रांतिकारी सोच की लपट दिल्ली तक पहुंच गई। विवादों और बयानों के साथ चोली-दामन का साथ निभाने वाले कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह ने बाबा रामदेव को चुनौती देते हुए कहा कि बाबा को अपनी संपत्ति का ब्यौरा भी देना चाहिए। बाबा ने आव देखा ना ताव..तुरंत गरम तवे पर हथौड़ा मारते हुए अपनी संपत्ति के सारे कागज़ लेकर खडे़ हो गए। खुलासे में पता चला कि बाबा रामदेव ट्रस्ट यानि पचंजलि योगपीठ के पास अरबों रुपए की संपत्ति है। बाबा ने सफाई में कहा कि ये पैसा उनके भक्तों ने उन्हे दान में दिया है। लेकिन कांग्रेस बाबा के इस सफाई से कहां मानने वाली थी। दिग्विजय सिंह ने फिर अपने तीखे तीर चलाते हुए कहा कि बाबा को चंदा या दान लेते वक्त इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कहीं उन्हे दान में दिया जाने वाला पैसा काला धन तो नहीं। योगगुरू को दिग्गी राजा का ये बयान बिलकुल भी रास नहीं आया। बाबा ने पूरी कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा कि कांग्रेस चाहे तो उनकी संपत्ति की जांच भी करवा सकती है। महज़ 12 साल में योग के गुर सिखाते-सिखाते बाबा रामदेव की ख्याति सात समंदर पार कर चुकी है। बाबा के भक्त देश ही नहीं दुनिया के हर कोने में हैं। बाबा की यही प्रसिद्घि राजनीतिक दलों के पेशानी पर बल लाने के लिए काफी है। बाबा ने पहले ही ऐलान कर दिया है कि वो देश में फैले भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए राजनीति में उतरेंगे और अगला लोकसभा चुनाव भी लड़ेंगे। ज़ाहिर है बाबा की ख्याति राजनीतिक गलियारों में चिंता की सबब बन चुकी है। ऐसे में बाबा का काले धन पर बोलना आग में घी का काम कर रहा है। ट्यूनिशिया से लेकर लीबिया तक सत्ता के खिलाफ फैले आक्रोश को दुनिया देख रही है। इजिप्त और ट्यूनिशिया में हुआ क्रांतिकारी बदलाव एक सटीक उदाहरण है। ज़ाहिर है हिंदुस्तान की सत्ता की कुर्सी पर विराजे लोगों के अंदर भी खौफ है। कहीं बाबा अपने भक्तों के साथ सड़क पर ना उतर जाए। फिलहाल बाबा राजनीति में उतरने के लिए धोती कस चुके हैं। देखना होगा कि आने वाला समय बाबा के लिेए अच्छा साबित होता है या नहीं.

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