Monday, February 28, 2011

कभी देखी है ऐसी शादी ?



आज सुबह का अखबार सिर्फ आम आदमी की बजट से उम्मीदों से ही भरा नहीं था। ना ही इसमें सिर्फ प्रणब दा की गई गुहारों और घर बैठे खाली विश्लेषकों की राय से भरा था। अखबार के एक पन्ने में कुछ अलग ही खबर छपी थी। खबर भी ऐसी की जिसपर यकीन करना मुश्किल था, लेकिन ये सच था। दिल्ली की एक जानी-मानी हस्ती हैं कंवर सिंह तंवर। दिल्ली और आस-पास रहने वाले लोग इनको बखूबी जानते होंगे। विधानसभा और लोकसभा में ये बहुजन समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार रहे हैं। इन साहब के साहबज़ादे शादी की उम्र् तक पहुंच गए हैं। ज़ाहिर है इतनी बड़ी हस्ती के घर की शादी है तो कुछ खास ही होगी। तो जनाब तंवर साहब के साहबजादे का रिश्ता पूर्व विधायक सुखबीर सिंह जौनपुरिया की बेटी से तय हुई है। अब आप सोचेंगे कि मैं दूसरों के घरों के निजी मामलों पर कटाक्ष करता हूं। लेकिन कहानी शुरू ही यहीं से होती है। चलिए मैं आप से ये सवाल पूछता हूं कि आप अपनी बेटी की शादी में क्या तोहफा देते हैं। मैं तोहफा इसलिए कह रहा हूं क्योकि अगर मैं दहेज का नाम लूंगा तो आप मुझपर असमाजवादी और दहेज जैसी बुरी प्रथा को बढ़ावा देने का आरोप लगाएंगे। इससे अच्छा है कि मैं इसे तोहफे का ही नाम दूं। हां तो जनाब...आप अपनी बेटी और दामाद को तोहफे में क्या दे सकते हैं। गाड़ी...लाखों रुपए...बंगला...या फिर गहने। लेकिन एक पिता ऐसा भी है जिसने पितृप्रेम का एक नया इतिहास रच दिया है। जी हां सुना है पूर्व विधायक जौनपुरिया ने अपने होने वाले दामाद को तोहफे के रूप में उड़न खटोला यानि हेलिकॉप्टर दिया है। पिता के अरमान देखिए..सोचा होगा कि बेटी और दामाद सड़क पर गाड़ियों के भीड़ में कहीं परेशान नाहो जाएं। कहीं गाड़ी का एसी खराब हो गया तो दामाद जी को तकलीफ होगी। और गर कहीं दिल्ली से चंडीगढ़ जाना होगा तो घंटों गाड़ी चलाने की जेहमत ना उठानी पड़ी। सो जौनपुरिया साहब ने अपने दामाद को एक नया हेलिकॉप्टर तोहफे में दे दिया। मेरी भाषा से आपको लग रहा होगा कि मैं ईर्ष्या और द्वेश का शिकार हो रहा हूं। लेकिन ऐसा नहीं है। मैं तो पिता के प्रेम पर विश्वास करने की कोशिश कर रहा हूं। जौनपुरिया साहब ने चुनाव लड़ते समय अपनी संपत्ति का जो ब्यौरा दिया था उस पर नज़र डालें तो उनका ये तोहफा कुछ और ही कहानी कहता है। लेकिन जब काफी समय के लिए वो विधायक की कुर्सी पर विराजमान थे तो कत्तई ताज्जुब नहीं होता। सालों पहले बिहार में भी कुछ ऐसी ही मिसाल देखने को मिली थी। बिहार की कुर्सी पर लालू यादव विराजमान थे। सीएम साहब की बेटी की शादी थी। सुना है शहर की सभी दुकानों से फ्रिज, टीवी और कूलर एक एणे मार्ग पहुंच गए थे। बेटी की शादी में आए सभी मेहमानों को तोहफे दिए गए थे। लेकिन जौनपुरिया साहब ने बेटी के प्रेम में जो नया इतिहास रचा है उसे तो कोई टाटा-बिड़ला या अंबानी भी नहीं तोड़ पाएंगे। जौनपुरिया साहब ने अरबों रुपए का ये हलिकॉप्टर कितनी पसीना बहाकर खरीदा है इसकी जांच होगी या नहीं ये मैं नहीं जानता लेकिन इस शादी को मैं कभी भी नहीं भूल पाउंगा।

Saturday, February 26, 2011

बिगड़ गया बजट...





बजट आने वाला है। आद आदमी बढ़ती महंगाई से पहले ही हलकान है। ज़ाहिर है हर किसी की नज़र प्रणब के पिटारे पर लगी है। दादा के बक्से में आम लोगों के लिए क्या है...कोई कहता है कि दादा टैक्स की छूट को 2 लाख तक कर देंगे। तो कई कहता है कि निवेश की सीमा बढ़ा सकते हैं। हर किसी की अपनी-अपनी सोच है। लेकिन सोच के पीछे का सच दरअसल ये है कि ये इनकी ज़रूरत है और अपनी ज़रूरत के लिए आम आदमी इस बजट स उम्मीदें लगाए बैठा है। देश के प्रधानमंत्री ने वादा किया है कि विकास दर को इस साल 9 फीसदी तक पहुंचाएंगे। आगे क्या होगा ये तो पता नहीं लेकिन महंगाई दर अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। दाल रोटी से भी मोहताज हो रहे देश के लोगों ने नज़रें उठाकर सवाल पूछा तो उन्हे जवाब में कहा गया कि सब्र करो। देखिए ना...महंगाई भी कैसे-कैसे छलावा करती है। कागज़ों में महंगाई दर कम होती दिखाई पड़ी लेकिन बाज़ार में रोजमर्रा की चीज़ों के दाम और आम आदमी की जेब कुछ और ही कहानी कहती है। सुना है कि भारत की अर्थव्यवस्था की गणना दुनिया में पांचवें नंबर पर की जाती है। हम विकसित देशों की तुलना में खड़े होने लगे हैं। लेकिन ज़मीनी हक़ीकत फिर से हमारे सपनों के आगे अंधेरा कर देती है। गरीबी, बेरोजगारी, और भ्रष्टाचार हमारी ज़ड़ों को खोखला कर रहा है। लेकिन फिर भी हमारे सपने सातवें आसमान के घोड़े पर सवार हैं। प्रणब बाबू बजट के रूप में क्या तोहफा देंगे। रेल बजट में दीदी ने आम आदमी की जेब का ख्याल रखा। चालू डिब्बे में सफर करने वालों पर बोझ नहीं डाला। टिकटों के दाम नहीं बढ़ाए। ये और बाता है कि उनका बजट सिर्फ बंगाल के लिए ही था। लेकिन हम इस बात से ही खुश हैं कि हमारी जेब से ज्यादा पैसे नहीं निकलेंगे। महंगाई में कुछ पैसे तो बचेंगे। हमारे कुछ भाई ऐसे हैं जो पैसों से पैसा बनाना जानते हैं। शेयर बाज़ार के दांव-पेंच हमें समझ में नहीं आते लोकिन वो खिलाड़ी हैं। साल के इस दिन उनकी धड़कनें भी बढ़ी होंगी। दादा के पत्ता खोलने के बाद बैंकों के ब्याज दरों में भी उथल-पुथल हो सकती है। ज़ाहिर है ब्याज़ बढ़ेंगे तो कइयों के सपने बिखर जाएंगे। बंगले का सपना 2 बेडरूम वाल फ्लैट में बदल जाएगा और फ्लैट का सपना देखने वाले तो घर को ही सपना समझ कर संतोष कर लेंगे। पेट्रोल की कीमतें पहले ही आसमान पर हैं। डीजल के दाम रोककर सरकार तेल कंपनियों के दबाव में है। ज़ाहिर है उस तबके का दबाव सरकार बर्दाश्त नहीं कर सकती है। फिर चाहे कीमतों में आग ही क्यों ना लग जाए। तो मन मारने से अच्छा है कि पहले ही तैयार रहें और भगवान से प्रार्थना करें कि दादा का पिटार जब खुले तो मेरी लिखी सारी बातें सिर्फ कोरी कल्पना बनकर रह जाए। सच कहूं तो मैं भी यही चाहता हूं।

Thursday, February 24, 2011

ये बाबा बोलता है...




बाबा रामदेव आजकल सुर्खियों में हैं। कारण है काला धन... काला धन बाबा के पास है या नहीं ये या तो बाबा बखूबी जानते हैं या फिर वो लोग जो बाबा पर काला धन रखने का आरोप लगाते हैं। दुनिया भर में योग क्रांति लाने वाले बाबा रामदेव के सितारे फिलहाल गर्दिश में हैं। जब से बाबा को राजनीति की चस्का लगा है, आए दिन उनपर सियासी हमले हो रहे हैं। हाल ही में बाबा आसाम गए थे। योग शिबिर में योग का ज्ञान देते-देते ना जाने बाबा की ज़बान फिसली या फिर आदतन समझिए, बाबा ने भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ बोलना शुरू कर दिया। योगगुरू का ये ज्ञान स्थानीय कांग्रेस नेता को रास नहीं आया। नोताजी ने बाबा को सिर्फ योग पर ध्यान देने की नसीहत दे डाली। बस फिर क्या था ? बाबा नेताजी पर बरस पड़े और बाबा बनाम कांग्रेस में बयानबाज़ी का दौर शुरू हो गया। रामदेव ने साफ-साफ कह दिया कि अगर बाबा को छेड़ोगे तो बाबा छोड़ेगा नहीं। बाबा का बयान और क्रांतिकारी सोच की लपट दिल्ली तक पहुंच गई। विवादों और बयानों के साथ चोली-दामन का साथ निभाने वाले कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह ने बाबा रामदेव को चुनौती देते हुए कहा कि बाबा को अपनी संपत्ति का ब्यौरा भी देना चाहिए। बाबा ने आव देखा ना ताव..तुरंत गरम तवे पर हथौड़ा मारते हुए अपनी संपत्ति के सारे कागज़ लेकर खडे़ हो गए। खुलासे में पता चला कि बाबा रामदेव ट्रस्ट यानि पचंजलि योगपीठ के पास अरबों रुपए की संपत्ति है। बाबा ने सफाई में कहा कि ये पैसा उनके भक्तों ने उन्हे दान में दिया है। लेकिन कांग्रेस बाबा के इस सफाई से कहां मानने वाली थी। दिग्विजय सिंह ने फिर अपने तीखे तीर चलाते हुए कहा कि बाबा को चंदा या दान लेते वक्त इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कहीं उन्हे दान में दिया जाने वाला पैसा काला धन तो नहीं। योगगुरू को दिग्गी राजा का ये बयान बिलकुल भी रास नहीं आया। बाबा ने पूरी कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा कि कांग्रेस चाहे तो उनकी संपत्ति की जांच भी करवा सकती है। महज़ 12 साल में योग के गुर सिखाते-सिखाते बाबा रामदेव की ख्याति सात समंदर पार कर चुकी है। बाबा के भक्त देश ही नहीं दुनिया के हर कोने में हैं। बाबा की यही प्रसिद्घि राजनीतिक दलों के पेशानी पर बल लाने के लिए काफी है। बाबा ने पहले ही ऐलान कर दिया है कि वो देश में फैले भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए राजनीति में उतरेंगे और अगला लोकसभा चुनाव भी लड़ेंगे। ज़ाहिर है बाबा की ख्याति राजनीतिक गलियारों में चिंता की सबब बन चुकी है। ऐसे में बाबा का काले धन पर बोलना आग में घी का काम कर रहा है। ट्यूनिशिया से लेकर लीबिया तक सत्ता के खिलाफ फैले आक्रोश को दुनिया देख रही है। इजिप्त और ट्यूनिशिया में हुआ क्रांतिकारी बदलाव एक सटीक उदाहरण है। ज़ाहिर है हिंदुस्तान की सत्ता की कुर्सी पर विराजे लोगों के अंदर भी खौफ है। कहीं बाबा अपने भक्तों के साथ सड़क पर ना उतर जाए। फिलहाल बाबा राजनीति में उतरने के लिए धोती कस चुके हैं। देखना होगा कि आने वाला समय बाबा के लिेए अच्छा साबित होता है या नहीं.