


मुंबई....अंडरवर्ल्ड का सेंट्रल प्वाइंट है। ये शहर कई गैंगस्टरों को पैदा करता है। यहां किसी एक की सत्ता नहीं चलती। लेकिन शहर पर हक हर कोई जताता है। जिसके पास जितने आदमी उता ही शहर उसका। जिसके पास जितनी पुलिस उतनी ही पकड़ मजबूत....यही है मुंबई अंडरवर्ल्ड का सच। खबर आपने सुनी होगी। मुंबई की आर्थर रोड जेल में फिर गैंगवार हुई। जेल में बंद 93 में हुए धमाकों के आरोपी अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम पर जानलेवा हमला हुआ। कहा जा रहा है कि सलेम पर ये हमला दाऊद इब्राहिम के गुर्गे मुस्तफा मंजू उर्फ मुस्तफा दौसा ने करवाया है। दौसा भी इसी जेल में बंद है। दौसा और उसके आदमियों ने सलेम पर धारदार हथियार से हमला किया। जांच में पता चला कि हमला कैदियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली चम्मच से हुआ। आर्थररोड जेल प्रशासन के लिए इस तरह की खबर नहीं है। इससे पहले भी जेल में राजन के खास गर्गे डीके राव पर हमला हो चुका है। हमले के बाद राव को अंडासेल में भेज दिया गया। अंडासेल में रहकर भी राव ने अपने विरोधियों से बदला लिया। राव के लोगों ने दाउद के कई गुर्गों पर हमला करवाया। इन हमलों में एक खास तरह के हथियार का इस्तेमाल किया गया। जेल के कैदी एल्यमिनियम की जिस प्लेट में खाना खाते हैं उसी प्लेट के किनारे वाले हिस्से को जेल के अंदर पत्थरों पर घिसकर उसे नुकीला बनाते हैं। और इसी हथियार से जेल के अंदर होता है गैगवार। जेल के अधिकारियों को इस खास हथियार के बारे में पता है। 1995 के बाद से इस जेल में लगभग हर साल गैंगवार होते रहे। हर बार हमले का तरीका एक ही रहा। लेकिन अब तक प्रशासन ने कोई खास कदम नहीं उठाए।
मुंबई अच्छी तरह जानती है कि अंडरवर्ल्ड के तार मुंबई पुलिस से जुड़े हैं। जेल में दाउद के गुर्गों को हर वो चीज़ मुहैया है जो उन्हे बाहर मिल सकती है। अच्छा खाना, अच्छा बिस्तर, केबल टीवी और वो सबकछ जिसकी जरूरत उन्हे है। बदल में उन पुलिसवालों को दुबई से तनख्वाह मिलती है। सलेम किसी ज़माने में दाउद के साथ डी कंपनी चलाता था। मनमुटाव हुआ और दाउद का दामन सलेम ने छोड़ दिया। तब तक छोटा राजन उर्फ दीपक निकालजे
दाउद के साथ था। सलेम को दाउद के तमाम धंधों की जानकारी थी। सलेम का साथ छोड़ना दाउद को रास नहीं आया। कहा तो ये भी जाता है कि सलेम को गिरफ्तार करवाने के लिए दाउद ने भी काफी हाथपैर मारे थे। पुर्तगाल में दाउद का ड्रग्स का कारोबार है। जाहिर है पुर्तगाल सरकार और पुलिस में उसकी अच्छी पैठ है। इंटरपोल का नोटिस पहले ही सलेम के खिलाफ था। भारतीय इंटेलीजेंस ने जब सलेम के प्रत्यर्पण की बात पुर्तगाल सरकार से की तो दाउद ने भी सलेम की गिरफ्तारी के लिए प्रयास किए। सलेम मुंबई पुलिस के पास आ गया। लेकिन दाउद को अब ये डर है कि कहीं सलेम के सीने में दफन वो राज जो दाउद के कारोबार पर असर डाल सकता है, कहीं मुंबई पुलिस को पता चल जाए। पुलिस में दाउद के कई लोग हैं। इनकी मदद से दाउद सलेम को लगातार परेशान करवाता रहा। सलेम की जान को शरू से ही खतरा था। और इस बार तो उसपर बाकायदा हमला हो भी गया। यानि जेल के अंदर हो या बाहर अंडरवर्ल्ड हर जगह हावी है। भाई के लोग आपको देख रहे हैं....
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