Thursday, March 4, 2010

भाई बोल रहा हूं...




मुंबई...सपनों का शहर... वो दुनिया जहां जाना हर किसी का सपना होता है। चाहत इतनी कि इसे मायानगरी कहते हैं। हर दिन यहां लाखों मुसाफिर आते हैं। कुछ को मंजिल मिलती है तो कुछ बेमंजिल हो जाते हैं। किसी की किस्मत चमकती है तो कोई ठोकरें खाता है। किसी के अरमान पूरे होते हैं तो कई हताश हो जाता है। जिसके सपने पूरे हुए वो बादशाह जिसका टूट गया वो फकीर। हार बर्दाश्त नहीं होती तो फकीर बादशाह बनने की कोशिश करता है। कोशिश के लिए कदम कहीं भी चल पड़ते हैं। उस रास्ते पर भी जिसकी मंजिल सलाखों के पीछे खत्म होती है, या फिर वहां जहां है सिर्फ अंधेरा। फिर पैदा होता है एक नया बादशाह। सपना..मुंबई पर राज करना। अपने सपनों के लिए कई लोगों को घर बर्बाद करना भी कबूल है। मुंबई अंडरवर्ल्ड में कुछ ऐसा ही होता है। वरना दाउद इब्राहिम आज खुद को बेताज बादशाह नहीं कहता। छोटा राजन और छोटा शकील का नाम भी नहीं होता। लेकिन इनका नाम है मतलब पर्दे के पीछे एक कहानी ऐसी जरूर है जो इन किरदारों को पैदा करने का काम करती है। बहरहाल अंडरवर्ल्ड का खात्मा करने के लिए मुंबई पुलिस जीतोड़ मेहनत कर रही है। लेकिन एक कहावत है...घर के भेदी लंका ढाए... मतलब समझाने की जरूरत नहीं है। खाकी के पीछे कई चेहरे इन बेताज बादशाहों के मोहरे का काम करते हैं। इन्हे वर्दीवाला गुंड़ा भी कहा जाता है। मुंबई पुलिस के कई अधिकारियों पर आरोप लग चुके हैं। मसलन सब इंस्पेक्टर दया नायक, अकेले 83 लोगों को मार गिराया...इन पर है अंडरवर्ल्ड से साठगांठ का आरोप। विजय सालस्कर जैसे कई एनकाउंटर स्पेशलिस्टों पर ऐसे आरोप हैं। अकेले विजय सालस्कर ने ही अंर नाइक, जग्गू शेट्टी, साधु शेट्टी, कुंदन सिंह रावत और जहूर माखंडा जेसे अपरादिय़ों को मौत की नींद सुला दी। खाकी पहनकर सरकारी तरीके से शूटआउट करने वाले अंडरवर्ल्ड के इन मोहरों के खिलाफ सबूत मिलते भी नहीं मिलते। और इन्ही की शय पर अंडरवर्ल्ड फल-फूल रहा है। माया डोलस के एनकाउंटर के बाद अंडरवर्ल्ड के हौसले पस्त भी हुए थे। लेकिन वक्त बीतने के साथ ही काली दुनिया के शैतान फिर जाग उठे हैं। पिछले साल से अंडरवर्ल्ड एक बार फिर मुंबई पर हावी होने लगा है। नई कहानी आपको बताते हैं।
मुंबई के कांदिवली में रहने वाले एक बिल्डर को हाल ही में अंडरवर्ल्ड का फोन आया है। फोन करने वाले अपना नाम एजाज लकड़ावाला बताया। अब इन दोनों के बीच क्या बातचीत हुई वो आपको बताते हैं..
एजाज- खैरियत भाईजान
फैजल शेख (नाम बदला हुआ)- बस अल्लाह का करम है
एजाज- एजाज भाई बोल रहा हूं
फैजल शेख (नाम बदला हुआ)- : एजाज भाई लकड़ावाले ? हां बोलो
एजाज- : रफीकभाई से मैसेज ले लेना और बात कर लेना। अपने वाले हो तो फोन करके बताया, नहीं तो दूसरी बात रहता है, बात अलग हो जाती है। जवाब दे देना।
फैजल शेख (नाम बदला हुआ)- : बराबर
एजाज- : आपकी इज्जत कर रहा हूं, किसीको बीच में डाला तो मैं किसीकी इज्जत नहीं करुंगा। फैसला मुझको करना है। आपकी तरफ से एक करोड़ गुडलक करवाओ। वो जो जगह करवाया है उसमें इनवॉल्व नहीं हो रहा हूं। वो अहमदाबाद वाले बुकी का।
ये है बातचीत एजाज लकड़ावाला और मुंबई के उस बिल्डर के बीच। एजाज ने बतौर प्रोटेक्शन मनी 1 करोड़ रुपए मांगे हैं। जिसे उसने नया नाम दिया है..गुडलक। पैसा नहीं मिला को इस बिल्डर का भगवान ही मालिक है। अंजाम शायद हमसब जानते हैं।
मुंबई अंडरवर्ल्ड में इस समय कई लोग सक्रिय हैं। गैंगवार की खबरें भले कम हो गई हों लेकिन इनका आतंक कभी भी कम नहीं हुआ।
एजाज लकड़वाला वो नाम है जो कभी छोटा राजन के साथ काम करता था। फिलहाल कनाडा में हैं और वहीं से अपना गैंग ऑपरेट करता है। एजाज पर 2003 में बैंकॉक में अपने ही बॉस छोटा राजन पर हमला करवाने का आरोप है।
रवी पुजारी--छोटा राजन का पुराना साथी। बैंगलोर से अपना गिरोह चलाता है। दक्षिण कर्नाटक और मुंबई में भी रवी पुजारी गिरोह सक्रिय है।

हेमंत पुजारी- कभी राजन के साथ काम करता था। अब मुंबई के पश्चिमी उपनगरों के होटल व्यवसायी और बिल्डरों से एक्स्टॉर्शन वसूलने का काम करता है।

भारत नेपाली और संतोष शेट्टी- छोटा राजन के दो खारस गुर्गे। क्रिमिनल लायर शहीद आज़मी और नेपाल के बिदजनेसमैन जमील शाह की हत्या के बाद ये राजन के करीबी बन गए।

यूसूफ बचकाना और राजन रामानुजम एलियास कालिया राजन--फिलहाल राजन के यो दोनों गुर्गे जेल मे हैं लेकिन राजन के बेहद करीबी हैं। जेल में भी इनके लिए खास सुविधाएं देने का काम राजन का है। जेल के अंदर से ही राजन के बाकी गुर्गों की मदद का काम करते हैं।

डीके राव: छोटा राजन का खास गुर्गा। आर्थर रोड के अंडा सेल में सड़ता रहा। जेल से फिलहाल बाहर है। जेल क अंदर से ही वो राजन के लिए नेटवर्किंग का काम करता रहा।

फरीद तानाशाह: राजन का भरोसेमंद साथी। कभी इंटेलिजेंस के साथ था आजकल राजन के साथ मिलकर अंडरवर्ल्ड में सक्रिय है।
मुंबई अंडरवर्ल्ड के ये कुछ खास चेहरे हैं। दाउद के बाद इन सबका नंबर आता है। फिलहाल ये तमाम गैंगस्टर मुंबई में सेंध लगा रहे हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2008 में एक्सटॉर्शन के 240 मामले दर्ज किए गए। 2009 में ये आकंड़ा 296 तक पहुंच गया। 2008 में 162 अपराधियों को इसी मामले में गिरफ्तार किया गया जबकि 2009 में ये आंकड़ा 196 तक पहुंच गया।
दाउद इब्राहिम, छोटा शकील, चोटा राजन, अरुण गवली मुंबई में फिलहाल ज्यादा सक्रिय हैं। इनके अलावा गुनाह की इस दुनिया में कई और छोटे-मोटे नाम भी लगातार जुड़ रहे हैं। लेकिन मुंबई पुलिस है कि हाथ पर हाथ धरे बैठी है।

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