Wednesday, March 3, 2010

दांव पर ज़िंदगी...




मुंबई हमलों के दौरान मुंबई पुलिस के जांबांज अधिकारी हेमंत करकरे की मौत इसलिए हुई क्योंकि उनकी बुलेटप्रूफ जैकेट ने उन्हे धोखा दे दिया था। जिस कवच को पहनकर करकरे आतंकियों का सामना करने गए थे वो कवच लगभग नकली निकला। उसने करकरे का साथ नहीं दिया। और करकरे साहब को शहादत मिल गई। देश ने उन्हे सलाम किया। लेकिन उनके कवच की नाकामयाबी पर सवाल किसी ने नहीं उठाया। महाराष्ट्र विधानसभा में बुलेटप्रूफ जैकेट का मुद्दा जिस तरह से उठा उसी तरह कब्र में चला गया। करकरे की शहादत भी मुंबई भूल चुका है। वरना उनकी शहादत के ज़िम्मेदार अपनी किस्मत को कोस रहे होते। अधिकारी से लेकर सरकार तक हर किसी को जवाब देना पड़ता। लेकिन हम उस देश के नागरिक हैं जिसने महात्मा गांधी की शहादत को भी भुला दिया। तो फिर करकरे साहब क्या चीज हैं। लेकिन मेरा दिल रोता है। आवाज उठाना चाहता है उस शोर के खिलाफ जिसकी वजह से सच्चाई के सुर दब जाते हैं। करकरे की मौत के बाद देशभर में बुलेटप्रूफ जैकेटों को लेकर कोई हलचल शुरू हुई तो वो थी सियासी हलकों में। एक दूसरे पर उंगली उठी। लेकि हुआ कुछ भी नहीं। क्योंकि चोर-चोर मौसेरे भाई। तो फिर आरोप लगाएं किस पर ? क्या हुआ अगर एक अधिकारी बुलेटप्रूफ जैकेट होने के बाद भी मारा जाता है...क्या हुआ जो एक पत्नी का सुहाग मिट गया..तो क्या हुआ अगर इस देश ने अपना एक बहादुर लाल खो दिया...तो क्या हुआ अगर एक बेटे ने अपना पिता खो दिया.....जैकेटों की दलाली में जो पैसे आए उससे हमारा घर तो चल ही रहा है। ये लाइनें मैंने जिसके संदर्भ में लिखीं उसे आप भी समझ सकते हैं। लखनऊ में एक आलाअधिकारी ने बुलेटप्रूफ जैकेट का परीक्षण किया। साधारण राइफल से मारी गई गोली का मुकाबला भी वो जैकेट नहीं कर सकी जिसे उत्तरप्रदेश सरकार ने मान्यता दी थी।
दबा-सहमा पुलिस अधिकारी ना तो कुछ कह पाया और ना ही कुछ कर पाया। लेकिन इतना समझ गया कि फिर कहीं किसी ददुआ से मुकाबला हुआ तो जान बचाने वाली बुलेटप्रूफ जैकेट से उम्मीद ना ही किया जाए। शून्य से 30 डिग्री से भी ज्यादा नीचे के तापमान पर 24 घंटे होकर हमारे लिए अपना घरबार छोड़कर गए देश के जवानों पर भ्रष्ट अधिकारी और नेताओं को रहम नहीं आता। पाप की कमाई से घर भरने वाले इस सिस्टम से जुड़े तार अपनों का खून चूसने के लिए तैयार हैं। इन जवानों के लिए हर साल ठंड से बचने के लिए नए कपड़े बनाए जाते हैं। नए जूते भी आते हैं। लेकिन कड़कती ठंड के सामने इन तमाम जीवनरक्षक चीजों का महत्व कम हो जाता है। सवाल इनकी गुणवत्ता पर फिर उठता है। मामला सेना के किसी अधिकारी या फिर मामले से जुड़े मंत्रालय तक आता है। और फिर ढाक के तीन पात... हथियारों के मामले में भी सवाल उठता रहा है। बोफोर्स कांड इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है। रूस और चीन से हथियार खरीदने के हर मामले में पर्दे के पीछे कोई ना कोई कहानी जरूर रही है। बहरहाल अर्द्धसैनिक बलों के लिए खरीदे गए बुलेटप्रूफ जैकेटों को परखने में
पुराने तरीके अपनाए जाने से पूरी प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगने के बाद गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने बुलेटप्रूफ जैकेट की खरीददारी रद्द करने का आदेश दिया था। हाल ही में सीआरपीएफ के लिए 59 हजार बुलेटप्रूफ जैकेट खरीद के दौरान इसके चयन की जिम्मेदारी चंडीगढ़ स्थित डीआरडीओ की लैब स्पार्क रेंज को सौंपी गई थी। सूत्रों के मुताबिक, बुलेटप्रूफ जैकिट सप्लाई करने की होड़ में नौ कंपनियां शामिल हैं। 26/11 के मुंबई हमलों के दौरान एटीएस प्रमुख करकरे की बुलेटप्रूफ जैकेट पहनने के बावजूद आतंकवादी की गोली लगने से मौत के बाद चिदंबरम ने जैकेटों को दोबारा टेस्ट करने के आदेश दिए थे। लेकिन रक्षा सूत्रों का कहना है कि परीक्षण में वे ही तकनीकी अधिकारी शामिल हैं जिन्हें पहले दौर के परीक्षण में जिम्मेदारी दी गई थी। आरोप है कि कुछ खास कंपनियों के बुलेटप्रूफ जैकेट को बेहतर सिद्ध करने के लिए दूसरी कंपनियों के बुलेटप्रूफ जैकेट को पहले अत्यधिक तापमान दिखाने के बाद उस पर बुलेट चला कर टेस्ट किया जा रहा है। इस वजह से कुछ जैकेट कसौटी पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं। बुलेटप्रूफ जैकेट पहनने वाले जवानों का जीवन इसकी मजबूती पर टिका होता है। इसलिए इसके चुनाव में अधिकारियों को पूरी पारदर्शिता बरतनी चाहिए। सूत्रों का कहना है कि परीक्षण के दौरान सभी कंपनियों के प्रतिनिधियों और रक्षा विशेषज्ञों की मौजूदगी में ये परीक्षण होने चाहिए ताकि जवानों को श्रेष्ठ उपलब्ध बुलेटप्रूफ जैकेट मुहैया हो सके। देश के विभिन्न हिस्सों में आतंकवाद से लड़ रहे थलसेना के जवानों के लिए भी भारी संख्या में मौजूदा जैकेटों से मजबूत और हल्के बुलेटप्रूफ जैकेट खरीदने की प्रक्रिया शुरू होगी। यदि डीआरडीओ ने किसी घटिया बुलेटप्रूफ जैकेट को मंजूरी दे दी तो इसे भविष्य में भी ऑर्डर मिलते रहेंगे जिससे जवानों को जिंदगी खतरे में पड़ सकती है। यानि फिर किसी करकरे की ज़िंदगी दांव पर लग सकती है...

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