Wednesday, January 13, 2010

ये 'अमर' कथा है !


आखिर अमरसिंह के सीने में कौन से राज दफन हैं मुलायम के? अमर सिंह मामले में एसपी सुप्रीमो मुलायम सिंह ने अपने चचेरे भाई को नीचा क्यों दिखाया? क्या मुलायम सिंह उस राज के बेपर्दा होने से डर रह है जो अमर सिंह के सीने में दफन है? आखिर अमर सिंह ने यह क्यों कहा है कि मुलायम के राज उनकी लाश के साथ ही जाएंगे?
ये और ऐसे ही कई सवाल राजनैतिक गलियारों में घूम रहे हैं। एसपी में चल रहे 'यादवी संघर्ष' का आनंद ले रहे लोग ये ज़रूर जानना चाहते है कि आखिर अमर सिंह के पास वो कौन सा दांव है जिसने मुलायम को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया है। 'अमर विवाद' में मुलायम का रुख रोज बदल रहा है। उनकी भाषा और लहजे में हो रहे परिवर्तन को लोगों ने बारीकी से देखा है। राजनीति के चतुर खिलाड़ी मुलायम और अमर के बीच सीधा संवाद सोमवार को ही हुआ है। मुलायम के रुख में सोमवार को आए बदलाव की मुख्य वजह अमर सिंह का ब्लॉग पर लिखा गया वो लेख माना जा रहा है जिसमें अमर ने अपनी कथा आम लोगों को बताई थी। अमर ने उनके खिलाफ बोले मोहन सिंह को इसी ब्लॉग में ये याद दिलाया कि कब उन्होंने मोहन सिंह का इलाज कराया और कब उन्हें चुनाव के लिए बड़ी रकम दी। अमर ने बृजभूषण तिवारी के जरिए एसपी के सबसे सीनियर सदस्य जनेश्वर मिश्रा पर भी निशाना साधा। अमर उन्हें ये बताना नहीं भूले कि किस तरह उनके इलाज के लिए उन्होंने भोपाल में अंबानी का जहाज पहुंचाया था और डॉ. प्रताप रेड्डी से कहकर सारी व्यवस्थाएं की थीं। राजनैतिक क्षेत्रों में ये माना जा रहा है कि अमर ने मोहन सिंह और जनेश्वर मिश्रा के जरिए मुलायम तक संकेत पहुंचा दिया था। यही वजह थी कि मुलायम ने सवेरे-सवेरे अमर सिंह को फोन करके सैफई आने का न्योता दे दिया और रामगोपाल को घर के खनकते बर्तन याद आने लगे। बेनी प्रसाद वर्मा, राज बब्बर, आजम खान और कल्याण के बाद मुलायम ने उन सभी मुस्लिम नेताओं को भी यह संदेश दिया है जो अमर के एसपी से निष्कासन की मांग कर रहे थे।
अमर के पास तुर्प का वो इक्का है जिससे मुलायम की राजनैतिक पारी अर्श से फर्श पर आ सकती है। इसलिए मुलायम फिलहाल अमर के साथ हैं लेकिन अमर फिलहाल मुलायम होने का नाम नहीं ले रहे।

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