Sunday, January 31, 2010

भारत के 'तालिबान'



अफगानिस्तान और पाकिस्तान की बुनियाद में तालिबान पहले ही सेंध लगा चुका है। तालिबान नाफरमानी करने वालों को ऐसी सज़ा देता है जिसे देखकर रूह कांप उठे। तालिबान के लिए सज़ा देने की कोई वज़ह ज़रूरी नहीं है। उसे बस अपनी मनमर्ज़ी करनी है। तालिबान का अपना कनून है। भारत शुक्र मनाता है कि उसकी धरती पर तालिबान ने कदम अभी तक नहीं रखा है। लेकिन ऐसा नहीं है। तालिबान हमारे देश में भी है। हमारे बीच है और हमारे कानून की धज्जियां डंके की कोट पर उड़ाता है। ज्यादादूर नहीं देश की राजधानी के पास हरियाणा में समान गोत्र में शादी करने वाले जोड़ों पर पंचायतों का तुगलकी फरमान थमने का नाम नहीं ले रहा है। पंचायतों के रूप में उभरे इस तालिबान के फरमान के खिलाफ जाने की हिम्मत सरकार के पास भी नहीं है। पंचायती तालिबान का ताजा शिकार बने हैं रोहतक के खेड़ी गांव के सतीश और कविता। दोनों की शादी ढाई साल पहले हुई थी और उनका 10 महीने का एक बेटा भी है, लेकिन पंचायत ता तुगलकी फरमान सुनिए। पंचायत ने दोनों को भाई-बहन की तरह रहने का आदेश सुनाया है। रोहतक में खेड़ी गांव के आजाद सिंह के बेटे सतीश बेरवाल की शादी झज्जर जिले के भागी गांव के राजवीर की पुत्री कविता के साथ हुई थी। कविता का गोत्र बैनीवाल है और खेड़ी गांव में बैनीवाल और बेरवाल का भाईचारा माना जाता है। ग्रामीणों को जब कुछ दिन पहले कविता के गोत्र की जानकारी मिली तो रास नहीं आया और स्थिति तनावपूर्ण होने पर शनिवार को पंचायत हुई। पंचायत ने इस मामले में अंतिम फैसले के लिए 21 सदस्यीय कमेटी गठित की। कमेटी ने पति-पत्नी का रिश्ता तत्काल प्रभाव से तोड़ दिया और उन्हें पंचायत में भाई-बहन के रूप में मान्यता दी। सतीश और कविता ने एक दूसरे को भाई-बहन भी कहा। इसके साथ ही पंचायत ने सतीश को उसके परिवार की पैतृक चल-अचल संपत्ति से बेदखल करते हुए गांव निकाले का फतवा भी सुना दिया। पंचायत ने सतीश और कविता के 10 महीने के पुत्र रौनक की परवरिश के लिए आजाद सिंह को 28 फरवरी तक तीन लाख रुपये देने का फैसला भी सुनाया। पंचायत के फैसले को स्वीकार करते हुए कविता के परिजन उसे अपने साथ ले गए। इससे पहले उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में पंचायत के फरमान पर एक प्रेमी जोड़े की पिटाई की गई और युवती से जबरन युवक को राखी बंधवाकर दोनों को गांव से बाहर निकाल दिया गया।
पंचायत ने पहले गांववालों से प्रेमी जोड़े की पिटाई करवाई और युवक से कहा कि वह युवती को पंचायत के सामने बहन कहे। फिर युवती से जबरदस्ती युवक को राखी बंधवाई। इसके बाद दोनों को गांव से निकल जाने का फरमान सुनाया। पंचायतों के प्यार पर ऐतराज़ है। प्यार के दुश्मन सिर्फ फिल्मों में नहीं हैं। असल ज़िंदगी में भी प्यार के पहरेदार मौजूद हैं। जिन्हे प्रमकरने वालों से नफरत है। सरकारें भी इम पंचायतों के आगे कमज़ोर हैं। भारत चांद पर घर बसाने की सोच रहा है। 21वीं सदी में हम दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बनने की राह पर है। लेकिन कुछ ऐसी ताकते हैं जो भारत को अंदर से खोखला कर रही हैं। और पंचायतें इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। देश का कानून मानो इनके लिए बना ही नहीं है। केवल अपना कानून मानती है पंचायत। सर्वसिक्षा अभियान का मंत्र यहां काम नहीं करता। नाफरमानी के लिए काफी सख्त सज़ा का प्रावधान है। इसलिए ज़रूरत है देश केअंदर पनप रहे इस तालिबान को खत्म करने की।

No comments:

Post a Comment