Wednesday, January 13, 2010

उफ़ ये सर्दी...




घर से निकला तो दो हाथ दूर देखना भी मुहाल था। ठंड के मारे कलेजा हाथ में आ रहा था। हालांकि गले में मफलर और हाथ में दस्तानों के साथ शरीर में दो-दो स्वेटरों क कवच था। लेकिन कड़कड़ाती ठंड के तीरों को मेरे ठंडभेदी कवच भेदने से रोक नहीं पा रहे थे। मैं समंदर किनारे रहने वाला हूं। इसलिए ऐसी ठंड का सामना पहले कभी नहीं किया। जानलेवा सर्दी से मेरे हाथ-पैर कांपने लगे। सर्दी में दिल्ली वालों का रंग कुछ अलग ही होता है। सड़क के किनारे टपरी पर चाय का लुत्फ लेते दिखाई देंगे तो कहीं रेड़ी पर छोले-भटूरे का आनंद लेने का रंग भी दिखाई देगा। गले में रंग-बिरंगे मफलर हों या फिर रंगीन कपड़े, दिल्ली में सर्दी का मज़ा ही कुछ और होता है। सुना है कश्मीर और हिमाचल में खूब बर्फबारी हुई है। मौसम विभाग ने कहा कि दिल्ली में भी सर्दी का सितम बढ़ेगा। लेकिन तभी तापमान बढ़ गया और पारा नीचे गर गया। समझ गया कि ये हमारा मौसम विभाग है इसलिए आगे से ध्यान ना देने का वादा करके मैं शिमला और मनाली का ध्यान करने लगा। सफेद बर्फ की फर्श पर खेलकूद करते लोगों की तस्वीर दिखाई देने लगी। फिर अगले ही पल उत्तरभारत की वो तस्वीर दिखाई देने लगी जहां पुराने कंबल में लिपटा एक बूढ़ा ठंड की वजह से भगवान को कोस रहा है। ओस की वजह से टूटी झोपड़ी में कड़कड़ाती बूढ़ी अम्मा भगवान से दुआ करती हैं कि ये ठंड खत्म हो जाए। उत्तरभारत में अभिजात्य वर्ग तो अपने बंगले में अलाव जलाकर मूगफली के मजे लेता है। लेकिन उसी बंगले के बाहर ठंड से किसी की मौत भी एक सच है। वही अभिजात्य वर्ग उस मरे इंसान की आत्मा को कोसता है कि उसने मरने के लिए यही जगह क्यों चुनी। बेचारा मर गया लेकिन मरते-मरते एक जिम्मेदार बड़े अधिकारी को तकलीफ दे गया। कहीं ऐसा ना हो जाए कि कैमरे उनके दरवाजे पर आ खड़ें हों और सवाल पूछें कि आप पर शहर के लोगों की ज़िम्मेदारी है और घर के बाहर एक गरीब की मौत कैसे हो गई। सुना है कि गली-गली में कलेक्चर साहब कंबल बांट रहे हैं। केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने गरीबों को सर्दी से निजात दिलाने के लिए राहत फंड दिया है लेकिन उस फंड से बाबूसाहब मनाली ट्रिप पर जाने की तैयारी कर रहे हैं। बेचारे गरीब मरें तो मरें। नकी बला से। अब उनका भी कहना ठीक है। भई ठंड है और ठंड में ठंडी जगहों पर घूमने का मज़ा ही कुछ और होता है। हां जी ,साहब आप घूमिए। गरीब तो होता ही है मरने के लिए। बहरहाल ठंड है, आप ठंड का मज़ा लीजिए। हो सके तो कुछ गरीबों को अपने पुराने कपड़े दे दीजिए। ताकि आपके साथ वो भी सर्दी का मज़ा ले सकें। फिर चाहें तो आप घर में हीटर जलाकर गरमागरम पकौड़ों का आनंद लें।

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