
वो जब याद आए, बहुत याद आए...
किशोर कुमार, देश का वो नाम जिसपर जितना भी नाज़ किया जाए कम है। संगीत की दुनिया का वो सितारा जिसकी आवाज़ आज भी ज़ेहन में गूंजती है। जिसकी संगीत के बिन आज भी दिन अधूरा लगता है। 4 अगस्त को हिंदुस्तान उस किशोर कुमार को याद कर रहा है। जिसके गीत सुनकर लाखों-करोड़ों दिल जवां हुए। 4 अगस्त मध्य प्रदेश के खंडवा में जन्मे किशोर उर्फ आभास गांगुली ने अपने जीवन के हर क्षण में खंडवा को याद किया। खंडवा भी आज किशोर को याद करता है। ज़मीन से जुड़े किशोर ने हमेशा अपने शहर को याद किया। जिस जमाने में 10 पैसे की उधारी भी मायने रखती थी उस जमाने में भी किशोरदा अपने दोस्तों से पैसे लेकर कैंटीन में खाना खाया करते थे। किशोर कुमार पर इस तरह पाँच रुपया बारह आना उधार हो गए। पैसे चुकानी की बात जब भी होती तो किशोर दा कैंटीन में बैठकर ही टेबल पर गिलास, और चम्मच बजाकर पांच रुपया बारह आना गा-गाकर कई धुन निकालते थे। शायद भविष्य के खूबसूरत संगीत का आगाज़ यहीं से होना था। फिल्म जिद्दी में किशोर दा की आवाज का पहली बार जलवा दिखा। किशोर ने देवआनंद के लिए गाना गाया। के. एल. सहगल के फैन होने की वजह से ये गीत उन्होने सहगल साहब की आवाज़ में ही गाया। फिल्म चल पड़ी लेकिन किशोर दा को कोई खास तवज्जो नहीं मिली। इसी तरह 1951 में आई फणी मजूमदार की फिल्म आंदोलन में बतौर हीरो काम करने के बावजूद भी उन्हे किसी ने नहीं देखा। फिल्म भी फल्प रही। मजेदार बात है कि किशोर कुमार की शुरुआत की कई फिल्मों में मोहम्मद रफी ने किशोर कुमार के लिए अपनी आवाज दी थी। मोहम्मद रफी ने फिल्म ‘रागिनी’ तथा ‘शरारत’ में किशोर कुमार को अपनी आवाज उधार दी तो मेहनताना लिया सिर्फ एक रुपया। काम के लिए किशोर कुमार सबसे पहले एस डी बर्मन के पास गए। इसके बाद एसडी बर्मन ने किशोर कुमार को अपने संगीत निर्देशन में कई गीत गाने का मौका दिया। आर डी बर्मन के संगीत निर्देशन में किशोर कुमार ने 'मुनीम जी', 'टैक्सी ड्राइवर', 'फंटूश', 'नौ दो ग्यारह', 'पेइंग गेस्ट', 'गाईड', 'ज्वेल थीफ़', 'प्रेमपुजारी', 'तेरे मेरे सपने' जैसी फिल्मों में अपनी जादुई आवाज से फिल्मी संगीत के दीवानों को अपना दीवाना बना लिया। किशोर कुमार ने साल 1940 से 1980 के बीच के अपने करियर के दौरान करीब 574 से अधिक गाने गाए। किशोर कुमार ने हिन्दी के साथ ही तमिल, मराठी, असमी, गुजराती, कन्नड़, भोजपुरी, मलयालम और उड़िया फिल्मों के लिए भी गीत गाए। किशोर कुमार को आठ फिल्म फेयर अवार्ड मिले। किशोर कुमार की खासियत यह थी कि उन्होंने देव आनंद से लेकर राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन के लिए अपनी आवाज दी और इन सभी अभिनेताओं पर उनकी आवाज ऐसी रची बसी मानो किशोर खुद उनके अंदर मौजूद हों। किशोर कुमार ने 81 फ़िल्मों में अभिनय किया और 18 फिल्मों का निर्देशन भी किया। फ़िल्म 'पड़ोसन' में उन्होंने जिस मस्त मौला आदमी के किरदार को निभाया वही किरदार वे जिंदगी भर अपनी असली जिंदगी में निभाते रहे। 1975 में देश में आपातकाल के समय एक सरकारी समारोह में भाग लेने से साफ मना कर देने पर तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री विद्याचरण शुक्ला ने किशोर कुमार के गीतों के आकाशवाणी से प्रसारित किए जाने पर पर रोक लगा दी थी और किशोर कुमार के घर पर आयकर के छापे भी डाले गए। मगर किशोर कुमार ने आपात काल का समर्थन नहीं किया। यह दुर्भाग्य और शर्म की बात है कि किशोर कुमार द्वारा बनाई गई कई फिल्में आयकर विभाग ने जप्त कर रखी है और लावारिस स्थिति में वहाँ अपनी दुर्दशा पर आँसू बहा रही है। किशोर कुमार की पहली शादी रुमा देवी के से हुई थी, लेकिन जल्दी ही शादी टूट गई और इस के बाद उन्होंने मधुबाला के साथ विवाह किया। उस दौर में दिलीप कुमार जैसे सफल और शोहरत की बुलंदियों पर पहुँचे अभिनेता जहाँ मधुबाला जैसी रूप सुंदरी का दिल नहीं जीत पाए वही मधुबाला किशोर कुमार की दूसरी पत्नी बनी। 1976 में उन्होंने योगिता बाली से शादी की लेकिन ये साथ कुछ महीनों का ही रहा। इसके बाद योगिता बाली ने मिथुन चक्रवर्ती से शादी कर ली। 1980 में किशोर कुमार ने चौथी शादी लीना चंद्रावरकर से की जो उम्र में उनके बेटे अमित से दो साल बड़ी थीं। सदी के इस महान गायक के साथ कई विवाद जुड़े रहे लेकिन विवाद कभी भी उनपर हावी नहीं हुए। किशोर की आवाज़ उनकी पहचान है, और ये पहचान इतनी बड़ी थी कि विवाद उन्हे दागदार नहीं कर पाए। किशोर हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनका संगीत हमारे चारों ओर है। किशोरदा आप हमेशा याद आएंगे।
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