Saturday, August 1, 2009

सब कुछ ज़हरीला है !







मैं अगर कहूं कि आप ज़हर खा रहे हैं तो आप मुझे पागल कहेंगे। लेकिन चारों ओर यही शोर है। ये मत खाओ इसमें ज़हर है। वो मत पीओ उसमें ज़हर है। पिछले कई दिनों से सुनता आ रहा हूं कि ज़हर हमारे घरों तक पहुंच गया है और हम ज़हर खा रहे हैं। अब आप पूछेंगे कैसे। पिछले दिनों टीवी पर देखा, सूट-बूट में एक शख्स चिल्ला-चिल्ला कर कह रहा था। आप ज़हर खा रहे हैं। मैं मिठाई की दुकान पर गया। जो मुझे पसंद है वो लेकर घर आया। टीवी चालू कर बैठ गया अपने पसंदीदा मिठाई का लुत्फ उठाने। लो जी वही शख्स फिर दिखा। बोला ये मिठाई मत खाना, 'इसमें ज़हर है' मुझे लगा वो मेरी ही मिठाई पर नज़र गड़ाकर कह रहा है। मैंने मिठाई का डब्बा दूर फेंक दिया। भूख तो लगी थी। पेट भरने के लिए कुछ खाना तो ज़रूरी था। मैं फिर गया बाज़ार सोचा फलों से काम चला लूं। देखने में सुंदर और ताजे फलों को लेकर बड़े चाव से मैं घर आया। बुद्धूबक्से के आगे बैठकर फलों का स्वाद लेने बैठ गया। देश और दुनिया का हाल जानने की जिज्ञासा में फिर मैंने खबरिया चैनलों का रुख किया। खबरों के अलावा सब कुछ देखा। तभी वो शख्स फिर आता है और कहता है कि सावधान! ये फल मत खाना, 'इस फल में ज़हर है' मैं तो डर गया। उसने फलों में ना जाने कौन-कौन से ज़हर पाए जाने की बात कही। उसके स्टूडियो में भी कई सारे फल रखे थे। उसने कहा कि इन फलों को खाने से कैंसर हो जाएगा। फिर मुझे उस डॉक्टर को कोसने का मन हुआ जिसने मुझे कहा था कि सेहत बनाने के लिए फल खाना चाहिए। मैंने मान लिया कि डॉक्टर को भी नहीं पता होगा कि फलों में सेहतमंद बनाने जैसा कुछ नहीं होता उल्टे फल खाया तो मौत ज़रूर हो जाएगी। डॉक्टर पर हंसते हुए मैंने फलों को भी कूड़े की टोकरी के हवाले कर दिया। भूख तो लगी ही थी। किचन में हरी-हरी सब्ज़ियां मेरा इंतज़ार कर रही थीं। पत्नी को कहा कि कुछ स्वादिष्ट भोजन बना दो। थोड़ी ही देर में भरी हुई खुशबूदार थाली मेरे आगे थी। एक तो भूख ऊपर से खाने की खुशबू , मैं बस खाने पर टूट पड़ा। इस बार मैंने टीवी चालू नहीं किया। लेकिन थकी हारी मेरी पत्नी को टीवी देखने का मन किया। बोली खबरें तो आएंगी नहीं कुछ मनोरंजन का प्रोग्राम न्यूज चैनल पर ज़रूर आ रहा होगा। मैं कुछ बोल नहीं पाया। मेरा पूऱा ध्यान तो खाने पर था। पत्नी ने जैसी किचन और खाने का नाम सुना, चैनल पर टिककर बैठ गईं। मुझे फिर वही शख्स दिखाई दिया। अब मुझे उससे डर लगने लगा था। लेकिन इस बार उसके साथ कोई और भी खड़ा था। उसके आस-पास सब्ज़ियां और अनाज रखा हुआ था। मैंने रोटी का कौर मुंह में जाने से पहले ही रोक लिया। उस शख्स ने अब चिल्लाना शुरू किया, आपकी रसोई में ज़हर है। आपके खाने में ज़हर है। आपकी सब्ज़ियों में ज़हर है। डर के मारे मैंने थाली खिसका दी। उसके साथ जो खड़ा था, ये शख्स उसे डॉक्टर कहकर बुला रहा था। इसलिए मैंने ध्यान से सुनने की कोशिश की। उसने कहा कि आपकी थाली में पड़ी हर चीच में कोई ना कोई ज़हर है, जिसके खाने से मेरा दिल काम करना बंद कर देगा। मुझे गंभीर बीमारी हो सकती है। जो खाना अबतक मेरा पेट भरता था, जिसे खाकर मैं अबतक ज़िंदा हूं। वो खाना अब मेरी जान ले लेगा। अब मैं क्या करता ? सरकार को कोसने के अलावा मेरे पास कुछ ना बचा। इस न्यूज चैनल ने मेरी आंखें खोल दीं। अब भूख अपनी हद पार कर रही थी। सोचा दूध पीकर ही काम चला लूं। गिलास में दूध भरा ही था कि मेरी पत्नी ने आकर मेरा गिलास छीन लिया। मैं सकपका गया। पूछा क्या कर रही हो ? तो जवाब मिला कि ये दूध मत पीना। टीवी पर कह रहे हैं कि दूध पीने से दिमाग काम करना बंद कर देगा। इस दूध में भी ज़हर है और ये जान भी ले सकती है। मैंने सोचा जो दूध अबतक पवित्र माना जाता था। जिसको पीने से शरीर अब तक पुष्ट होता था। डॉक्टर हो या हकीम हर कोई दूध पीने की सलाह देता था। ये बुद्धूबक्सा उस दूध को ज़हरीला बता रहा है। हर बार की तरह बुद्धूबक्से की बात मानकर मैंने दूध फेंक दिया। सोचा मरने से अच्छा है कि भूखा रहूं। लेकिन यकीन मानिए रहा नहीं गया। तो सोचा पानी पीकर ही काम चला लूं। लेकिन यहां तो हद हो गई। मेरा पानी का गिलास भी ज़हरीला होगा ये मैं कभी सोच भी नहीं सकता था। लेकिन उस बुद्धूबक्से की बात मानकर मैंने पानी का गिलास भी रख दिया। मन में एक अजीब से डर को बसाकर मैंने अपने पूरे किचन को एक नज़र देखा। मुझे सबकुछ ज़हरीला दिख रहा था। मन मारकर टीवी के आगे बैठ गया। वो शख्स अभी भी मेरी आंखों के आगे ही था। मेरी भूख बढ़ती ही जा रही थी। उसके बाद से लेकर आज तक मेरे घर में टीवी की आवाज सुनाई नहीं दी। इसलिए अब मैं मैं सबकुछ खा सकता हूं।



हां वो टीवी टूटकर एक कोने में अपनी किस्मत को कोस रहा है।

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